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चुनाव से पहले भारी पड़ सकती है किसानों की नाराजगी, सरकार भी सतर्क; 3 मंत्रियों ने संभाला मोर्चा

किसानों के साथ होने वाली बैठक में सरकार की तरफ से कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय सहित तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम भाग लेगी।

चुनाव से पहले भारी पड़ सकती है किसानों की नाराजगी, सरकार भी सतर्क; 3 मंत्रियों ने संभाला मोर्चा
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Sun, 11 Feb 2024 06:40 AM
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केंद्र सरकार ने शनिवार को उन किसानों के साथ बातचीत के लिए एक सीधी लाइन खोली, जिन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली मार्च की घोषणा की है। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन्हें 12 फरवरी को दूसरे दौर की चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने देर रात संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक जगजीत सिंह डल्लेवाल और किसान मजदूर मोर्चा के संयोजक सरवन सिंह पंधेर को एक पत्र जारी कर उन्हें एक बैठक के लिए आमंत्रित किया। किसान नेताओं के साथ यह बैठक 12 फरवरी को शाम 5 बजे महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (MAGSIPA) चंडीगढ़ में होगी।

इस बैठक में सरकार की तरफ से कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय सहित तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम भाग लेगी। पत्र में कहा गया है कि बैठक में किसानों की मांगों पर चर्चा होगी।

आपको बता दें कि एसकेएम और केएमएम ने फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून बनाने सहित कई मांगों को स्वीकार करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए 200 से अधिक किसान संघों के साथ 'दिल्ली चलो' मार्च की घोषणा की है।

इससे पहले तीनों मंत्री गुरुवार को चंडीगढ़ पहुंचे थे और किसान नेताओं के साथ बैठक की थी। उस बैठक का समन्वय पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया था, जिन्होंने बाद में कहा था कि अब निरस्त कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर आम सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री नकली बीज के निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए कड़ी सजा पर भी सहमत हुए हैं।

बैठक के तुरंत बाद सत्तारूढ़ आम आदमी ने अपने सोशल मीडिया पेज पर भगवंत मान को केंद्र और किसानों के बीच एक पुल के रूप में काम करने के लिए धन्यनाद दिया। आप ने कहा, “पंजाब सरकार केंद्र तक उनकी मांगों को पहुंचाने के लिए किसानों के साथ हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों को सुरक्षित करेगी।”

पत्र और दूसरे दौर की बैठक के बारे में पूछे जाने पर पंधेर ने कहा, ''पहले दौर की वार्ता में किसान नेताओं के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया था। 12 फरवरी की बैठक के लिए प्रतिनिधिमंडल बड़ा होगा। हम जल्द ही बैठक में शामिल होने वाले नेताओं के नाम तय करेंगे।''

इस बीच दल्लेवाल ने चेतावनी दी कि "अगर बातचीत विफल रही", तो 2,000 से अधिक ट्रैक्टरों का काफिला पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ेगा। उन्होंने कहा, "हम सभी बैरिकेड्स को हटा देंगे जैसा कि हमने नवंबर 2020 में किया था। यूपी से 500 से अधिक ट्रैक्टर और राजस्थान से लगभग 200 ट्रैक्टर भी मार्च में हिस्सा लेंगे।"

भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह लाखोवाल ने भी चेतावनी दी कि अगर पंजाब, हरियाणा या दिल्ली सरकारें राष्ट्रीय राजधानी की ओर मार्च कर रहे किसानों पर किसी भी तरह का दमन करती हैं तो हमारे संघ के सदस्य विरोध मार्च में शामिल होंगे।

लाखोवाल संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की राष्ट्रीय समन्वय समिति के सदस्य हैं। एसकेएम दिल्ली चलो विरोध मार्च का हिस्सा नहीं है। लाखोवाल ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर विरोध मार्च में शामिल होने का निर्णय केवल उनकी यूनियन का है, एसकेएम का नहीं।

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