किसानों के कृषि ऋण माफ करने की मांग
महोबा में भारतीय किसान यूनियन ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा। इसमें किसानों के ऋण माफ करने, उर्वरकों की मांग, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने, और प्राकृतिक आपदाओं के लिए मुआवजा देने की बात की गई। किसानों ने अन्य मांगों के साथ 200 दिन का काम और 700 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी भी मांगी।

महोबा। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर 15 सूत्रीय मांगों को जोरदार तरीके से उठाते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा है। ज्ञापन में किसानों के ऋण माफ करने की मांग सहित डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की मांग की गई है। मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी किसानों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां भारत अमेरिका समझौता को किसानों के भविष्य के लिए घातक बताया। सभी फसलों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू कर एमएसपी की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद कानून बनाने की मांग उठाई। किसानों एवं कृषि मजदूरों के संपूर्ण ऋण माफ करने की मांग की गई।
खेती के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज,सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रमाीण क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं को 300 यूनिट बिजली मुफ्त करने सहित स्मार्टमीटर की व्यवस्था को समाप्त करने और विभाग के निजीकरण पर रोक की मांग की गई। मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग की गई। बाढ़, सूखा अतिवृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा दिया जाएं। प्रधानमंत्री फसल बीमा की समीक्षा कर पारदर्शी बनाया जाए। किसान और मजदूरों के हित में चार श्रम संहिताएं बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपरण नीति, राष्ट्रीय सहकारिता नीति को वापस लेने की मांग उठाई गई। डीएपी यूरिया और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और सब्सिडी बहाल कराने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में माधुरी दीक्षित, अवधेश कुमार सिंह, इशहाक खां, रामआसरे शुक्ला, रेखा, रमानुज तिवारी, ओम प्रकाश, बालादीन सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।


