.नियमों में उलझ गए उवर्रक के जरूरतमंद किसान
कृषि मंत्री से खाद कमी की शिकायत करने वाले किसान अभी भी राहत नहीं पा सके हैं। विभाग का दावा है कि यूरिया और डीएपी से गोदाम भरे हैं। किसानों ने खाद की जरूरतों को लेकर शिकायतें की हैं। विभाग की ओर से वितरण की मात्रा कम बताई जा रही है, जिससे किसानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

कृषि मंत्री से खाद कमी की शिकायत करने वाले किसान अभी भी राहत नहीं पा सके हैं। विभाग का दावा है कि यूरिया और डीएपी से विभाग के गोदाम भरे हैं। जबकि, बुधवार को भाकियू के सदस्यों ने जिलाधिकारी को यूरिया समस्या के निदान की मांग दोहराई। धान की रोपाई, गन्ने में यूरिया की जरूरत, सब्जी तथा दलहन की खेती में खाद की जरूरत का हवाला देने वाले किसान विभाग, सहकारिता पर आरोपों की झड़ी गला रहे हैं। बीते दिनों कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के मुरादाबाद दौरे के समय ठाकुरद्वारा में किसानों में एक साथ जरूरत की खाद नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। तब विभाग की ओर से बताया गया कि नियमों की पेंच की वजह से किसानों का पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है।
खाद वितरण की स्थिति
विभाग की ओर से सात एक एकड़ खेती के लिए सात बोरी यूरिया और पांच बोरी रासायनिक खाद वितरण का नियम बनाया है। जिले में सहकारिता के 63 और निजी तौर पर 800 लाइसेंसी दुकानें हैं। किसानों की खाद की कमी की शिकायत के मद्देनजर अधिकारी जायद के सीजन में खाद वितरण के कोटे तय नहीं होने की बात कह रहे हैं। एआर कोऑपरेटिव अमरेंद्र कुमार का कहना है कि सहकारी समितियों के पास 1000 एमटी फास्फेटिक खाद है, जबकि 1100 एमटी यूरिया का स्टॉक है।
समस्याओं का निवारण
एआर ने कहा कि एक मुश्त खाद वितरण और जायद के कोटे के निर्धारण के बाद किसानों की शिकायत दूर होगी। समितियों पर कीटनाशक की बिक्री का लाइसेंस ही नहीं होता है। जिला कृषि अधिकारी डॉ.आरपी सिंह का कहना है कि खाद भरपूर है। नियमानुसार वितरण हो रहा है।
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