यमुना ने बहा दी फसल और जमीन, सिस्टम ने बहा दिए वादे

हिन्दुस्तान, बागपत
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बड़ौत। एक साल बाद भी यमुना की बाढ़ से किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। 40 प्रतिशत को 5000 रुपये का मामूली मुआवजा मिला है, जबकि 60 प्रतिशत अभी भी खाली हाथ हैं। प्रभावित किसानों ने सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है, अन्यथा वे अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे।

यमुना ने बहा दी फसल और जमीन, सिस्टम ने बहा दिए वादे

बड़ौत। एक साल बीतने के बाद भी यमुना की बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई किसानों को अभी तक नहीं हुई है। लाखों रुपये की फसल, बेशकीमती जमीन यमुना की धार में बह गई और मुआवजे के नाम पर सिर्फ 40 प्रतिशत किसानों को 5000-5000 रुपये का मामूली मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड लिया गया। आरोप है कि अभी भी 60 फीसदी किसान ऐसे हैं जिनको मुआवजे के नाम पर फूटी कोडी तक नहीं मिली है जबकि बाढ की अगली आफत सिर पर खडी हो गई है। दरअसल, यमुना की विनाशकारी बाढ़ को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन प्रभावित किसानों का दर्द आज भी ज्यों का त्यों बना हुआ है। बाढ़ में किसानों की लाखों रुपये की खड़ी फसल तबाह हो गई, कई किसानों की बेशकीमती कृषि भूमि यमुना की तेज धारा में समा गई, लेकिन नुकसान की भरपाई आज तक नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि बाढ़ के बाद शासन के निर्देश पर राजस्व विभाग की ओर से कई बार नुकसान का सर्वे कराया गया। लेखपाल बार-बार गांवों में पहुंचकर पात्र किसानों की सूची तैयार कर अपने साथ ले गए और आश्वासन दिया गया कि जल्द ही मुआवजा मिलेगा, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद अधिकांश पात्र किसानों के खातों में कोई सहायता राशि नहीं पहुंची। शबगा गांव के किसान ओमप्रकाश पंवार, कुलदीप पंवार, शिवकुमार, उपेंद्र, राजपाल, धर्मेंद्र आदि का आरोप है कि मुआवजे के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। कुछ गिने-चुने किसानों को मात्र 5,000 रुपये की सहायता राशि देकर औपचारिकता पूरी कर दी गई, जबकि वास्तविक नुकसान लाखों रुपये का था। वहीं करीब 60 प्रतिशत पात्र किसान आज भी मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं। सबसे अधिक पीड़ा उन किसानों को है जिनकी उपजाऊ जमीन ही यमुना की धारा में बह गई। ऐसे किसानों के सामने केवल एक फसल का नहीं, बल्कि भविष्य की खेती और परिवार के पालन-पोषण का भी संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि जिनकी जमीन नदी में समा गई, उनके लिए 5,000 रुपये की सहायता किसी भी तरह से नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती。

बाढ से हुए नुकसान का विस्तृत विवरण

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125 किसानों की 4000 बीघा जमीन निगल गई थी बाढ़

बड़ौत। जागोस गांव के किसानों अनिल मुखिया, राजकुमार त्यागी, सुनील त्यागी, सुधीर शर्मा, सोमदत्त शर्मा, ओमदत्त शर्मा ने बताया कि जागोस गांव के करीब 125 किसानों की 4000 बीघा फसल जमीन समेत यमुना में समा गई थी। किसी किसान की 30 बीघा तो किसी की 35 बीघा जमीन ही फसल समेत यमुना में समा गई। इसके अलावा किसानों के निजी ट्यूबवेल, विद्युत पोल, लाइन तक नहीं बची। किसानों को ऊंट के मुंह में जीरा के समान 5000-5000 रुपये की खैरात बांट दी गई जबकि किसानों की अब न तो जमीन वापस आएगी और न ही लाखों रुपये की फसल। दर्जनों किसानों को एक साल बीतने पर एक रुपया तक नहीं मिल पाया है। बहुत से किसानों के पास तो अब बुवाई के लिए जमीन ही नहीं बची हैं।

प्रशासन की भूमिका और मुआवजा की मांग

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अधिकारी देते रहे आश्वासन, आज तक नहीं मिला मुआवजा

बड़ौत। शबगा गांव के किसानों हरेंद्र, सत्यकुमार, राकेश, महावीर, कपिल पंवार का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन आश्वासनों के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला। बार-बार सर्वे और सूची तैयार होने के बावजूद राहत राशि का इंतजार खत्म नहीं हुआ। प्रभावित किसानों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ से हुए वास्तविक नुकसान का पुन: सत्यापन कर सभी पात्र किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए। साथ ही जिन किसानों की भूमि यमुना में समा गई है, उनके लिए विशेष राहत पैकेज और पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। किसानों का कहना है कि एक साल बाद भी न्याय और राहत का इंतजार प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बिजेन्द्र पंवार, ओमप्रकाश का कहना था कि राज्य स्तरीय कमेटी आकर उनके गांव में हुए नुकसान की जांच करें, किसानों को उनकी फसल का ढंग से मुआवजा दिया जाए, जिन किसानों के पास जमीन नहीं बची है, उनके परिवार को नौकरी/रोजगार की व्यवस्था की जाए, प्रभावित किसानों का बिजली माफ किया जाए। इसके अलावा यमुना से हर साल होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बांध बनाया जाए।

मुआवजे की पारदर्शिता की मांग

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11 करोड़ रुपये के मुआवजे का हिसाब किया जाए सार्वजनिक

बड़ौत। किसानों संजय, बिजेंद्र, उपेंद्र पँवार, राहुल, मोहित, राजपाल, हरेंद्र, सतेंद्र, मनोज, दीपक, कुलवीर आदि का यह भी आरोप है कि 11 करोड़ रुपया मुआवजा देने के लिए सरकार ने जारी किया था, उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए। बैठक में निर्णय लिया गया कि वे अब मांग पूरी न होने पर यमुना किनारे अपने परिवार व पशुओं के साथ अनशन पर बैठेंगे। उसके बाद भी निर्णय नहीं निकला तो भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

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कोट:

यमुना में आई बाढ़ से प्रभावित हुए किसानों का सर्वे कर लिया गया था जो किसान मुआवजा मिलने से शेष रह गए हैं उन्हें दिखाया जा रहा है। यदि जानबूझकर किसी की लापरवाही सामने आती है तो जांच के बाद उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विनीत उपाध्याय, एडीएम बागपत

सामान्य प्रश्न

किसानों की समस्याएं क्या हैं?
किसानों का कहना है कि यमुना की बाढ़ से हुई नुकसान की भरपाई नहीं हुई है और अधिकांश पात्र किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।

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