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किसानों के पक्ष में SAD का बड़ा फैसला, BJP से गठबंधन की टूटेगी आस? 2020 में इसी मुद्दे पर छूटा था साथ 

शिरोमणि अकाली दल ने शंभू और खानौरी सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ सहयोग दिखाते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। शिअद ने बुधवार को घोषणा की है कि वह दो जिलों में पंजाब बचाओ यात्रा रोक रहे हैं।

किसानों के पक्ष में SAD का बड़ा फैसला, BJP से गठबंधन की टूटेगी आस? 2020 में इसी मुद्दे पर छूटा था साथ 
Deepakहिन्दुस्तान टाइम्स,चंडीगढ़Wed, 14 Feb 2024 05:22 PM
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शिरोमणि अकाली दल ने शंभू और खानौरी सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ सहयोग दिखाते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। शिरोमणि अकाली दल ने बुधवार को घोषणा की है कि फिरोजपुर और फरीदकोट जिलों में पंजाब बचाओ यात्रा को स्थगित कर रही है। दूसरे चरण की यह यात्रा गुरुवार को होने वाली थी। पार्टी ने दोनों जिलों में यात्रा निकालने की योजना बनाई थी। उसके बाद इसे गिद्दरबाहा और मुक्तसर में 19 फरवरी और गुरुहरसहाय और जलालाबाद में 20 फरवरी को फिर से शुरू करना था। गौरतलब है कि इस पार्टी ने किसानों के मुद्दे पर ही सितंबर 2020 में भाजपा का साथ छोड़ दिया था। हालांकि आगामी चुनाव से पहले दोनों के बीच बातचीत फिर शुरू हो गई थी।

वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार, एक फरवरी को शुरू हुई यात्रा 11 मार्च को दमदमा साहिब में समाप्त होगी। इसमें पांच संसदीय क्षेत्र अमृतसर, खडूर साहिब, फिरोजपुर, फरीदकोट और बठिंडा शामिल हैं। इनमें 45 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहाकि पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 15 फरवरी (गुरुवार) को चंडीगढ़ में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक आयोजित करने का फैसला किया है। इसमें किसान आंदोलन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और पार्टी के रुख की घोषणा की जाएगी। 

किसान अन्य मांगों के साथ ही सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने और किसानों का पूरा कर्ज माफ करने के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। ‘दिल्ली चलो’ मार्च का नेतृत्व कर रहे 17 किसान संगठन पड़ोसी राज्य हरियाणा से लगी शंभू और खनौरी सीमाओं पर फंसे हुए हैं। चीमा ने कहाकि बैठक में यात्रा के आगे के पाठ्यक्रम की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसानों पर लाठीचार्ज, रबर की गोलियां चलाने और आंसू गैस के गोले दागने की निंदा करती है और कहाकि पार्टी कल की बैठक में आगे की कार्रवाई के बारे में काम करेगी। 

बता दें कि सितंबर 2020 में शिरोमणि अकाली दल ने किसानों के मुद्दे पर ही भाजपा से 24 साल पुराना नाता तोड़ लिया था। हालांकि लोकसभा चुनाव से पूर्व दोनों दलों के एक बार फिर साथ आने के आसार बनने लगे थे। दोनों दलों में बातचीत भी शुरू हो गई थी। लेकिन मंगलवार से शुरू हुए किसान आंदोलन ने लगता है इस पर पानी फेर दिया है। शिअद के एक नेता ने नाम न छापने के अनुरोध पर कहाकि अगर हम इस स्तर पर भाजपा के साथ गठबंधन करते हैं तो हम चेहरा खो देंगे। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर शिअद ने भाजपा से नाता तोड़ा था, वही मुद्दा फिर से सामने आ गया है।

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