Family of Muslim child worshipped as Hindu goddess durga in Bengal moves Supreme Court against CAA NRC calls it discriminatory - हिंदू देवी दुर्गा के रूप में पूजी गई मुस्लिम बच्ची फातिमा का परिवार CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CAA-NRC को बताया भेदभावपूर्ण DA Image
19 फरवरी, 2020|6:50|IST

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हिंदू देवी दुर्गा के रूप में पूजी गई मुस्लिम बच्ची फातिमा का परिवार CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CAA-NRC को बताया भेदभावपूर्ण

fatima worshipped as durga during kumari puja fatehpur sikri agra

हिंदू देवी दुर्गा के रूप में पिछले साल अक्टूबर में पूजी गई मुस्लिम परिवार की बच्ची फातिमा का परिवार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फातिमा के मामा एमडी अहमद ने सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि वजह से समाज में भेदभाव की स्थिति पैदा हो रही है। स्वामी विवेकानंद ने कश्मीर में एक मुस्लिम नाविक की बेटी का पूजन किया था। इसी तर्ज पर 121 साल बाद पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक दंपति ने मुस्लिम बच्ची का पूजन किया था। 

फातिमा के मामा याचिकाकर्ता एम.डी अहमद ने कहा, “हम ने बुधवार को एक याचिका दायर की है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के साथ-साथ राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) समाज को अलग विभाजित करेगा। हम सभी इस देश के नागरिक हैं। इतने सालों बाद लोग, विशेष तौर पर गरीब लोग अपना जन्म प्रमाण पत्र या किसी भी अन्य तरह का दस्तावेज कैसे देंगे। 

उत्तर 24 परगना जिले के कमरहटी के निवासी अहमद 4 साल की फातिमा के मामा हैं। फातिमा के पिता मुहम्मद ताहिर आगरा में फतेहपुर सीकरी के पास किराने की दुकान चलाते हैं। पिछले साल अक्टूबर में दुर्गा पूजा के दौरान, कमरिमा नगर पालिका के एक इंजीनियर और उनकी पत्नी मौसुमी, वकील तमाल दत्ता ने फातिमा को देवी के मानव रूप के रूप में पूजन किया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सीएए को लागू करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इस पर अहमद का प्रतिनिधित्व कर रहे कोलकाता के पूर्व महापौर बिकास रंजन ने कहा, ''अहमद की याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अदालत ने कहा कि सभी याचिकाओं पर संविधान पीठ द्वारा एक साथ सुनवाई की जाएगी।'' 

क्या है कन्या पूजा -

हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए एक पुजारी ने कहा, कुमारी पूजा, या कन्या पूजा के दौरान उन लड़कियों की पूजा की जाती है जो कि अविवाहित होती हैं। यह मध्य और उत्तरी भारत में नवरात्रि समारोह का अहम हिस्सा है। हालाँकि, यह बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान कई घरों और मंदिरों में किया जाता है। हाल के समय में कोई भी ऐसा परिवार नहीं है जिसने मुस्लिम लड़की की पूजा की हो।

स्वामी विवेकानंद ने बेलूर मठ में की थी दुर्गा पूजा -

1901 में, विवेकानंद ने बंगाल के हावड़ा जिले के बेलूर मठ में दुर्गा पूजा के दौरान यह अनुष्ठान शुरू किया। तब से यह चल रहा है और लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।

दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जनवरी और 12 जनवरी को कोलकाता में बालूर मठ में एक रात बिताई। मोदी ने अपनी 157 वीं जयंती पर रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि दी।

बेलूर मठ में संबोधन के दौरान मोदी ने कहा, “कई युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। सीएए नागरिकता लेने के बारे में नहीं है बल्कि नागरिकता देने के बारे में है। CAA पाकिस्तान में सताए गए लोगों के लिए केवल एक संशोधन है। क्या हमें इन लोगों को पाकिस्तान में मरने के लिए वापस भेज देना चाहिए? क्या यह नेक काम नहीं है?"

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