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वे कतर को सुरक्षित बनाने गए थे, उसने मौत दे दी; पूर्व भारतीय नौसेनिकों के परिवार ने मांगा सबूत

कतर न्यायालय के 26 अक्टूबर के फैसले का विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन रिपोर्टों से पता चला है कि उन्हें एक पनडुब्बी परियोजना पर इजरायल के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया गया था।

वे कतर को सुरक्षित बनाने गए थे, उसने मौत दे दी; पूर्व भारतीय नौसेनिकों के परिवार ने मांगा सबूत
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 01 Nov 2023 07:21 PM
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कतर में मौत की सजा पाए आठ पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों के परिजन भारत सरकार से उम्मीद लगा रहे हैं। इस बीच परिजनों ने स्पष्ट रूप से इस बात से इनकार किया है कि उन लोगों का जासूसी से कोई लेना-देना था। उन्होंने कहा कि कतर ने जो आरोप लगाए हैं उनका "कोई सबूत" नहीं मिला है। पिछले साल गिरफ्तार किए गए पूर्व नौसैनिकों में कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता और नाविक रागेश गोपकुमार शामिल हैं। 

वे एक निजी फर्म, दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए काम करने गए थे। यह फर्म कतर के सशस्त्र बलों के लिए ट्रेनिंग और अन्य सेवाएं प्रदान करती थी। भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों को बृहस्पतिवार को कतर की अदालत ने मौत की सजा सुनाई। भारत ने इस फैसले को ‘बहुत ही स्तब्ध’ करने वाला करार दिया और इस मामले में सभी विकल्पों का इस्तेमाल करने का संकल्प लिया।

कतर में प्रथम दृष्टया न्यायालय द्वारा आठ लोगों के खिलाफ 26 अक्टूबर के फैसले का विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन रिपोर्टों से पता चला है कि उन्हें एक पनडुब्बी परियोजना पर इजरायल के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया गया था। एनडीटीवी को दिए एक बयान में सात पूर्व अधिकारियों और एक नाविक के परिवारों ने सभी आरोपों से इनकार किया है।

बयान में कहा गया है कि डहरा ग्लोबल में काम करते समय उनमें से कोई भी किसी पनडुब्बी कार्यक्रम से जुड़ा नहीं था। उन्होंने कहा, "आठ पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी इजरायल के लिए जासूसी में शामिल नहीं थे। वे कतरी नौसेना का निर्माण करने और उस देश की सुरक्षा का निर्माण करने गए थे। वे कभी जासूसी नहीं कर सकते। कतर की ओर से कोई आरोप या आरोपों के सबूत नहीं हैं।"

उनमें से कुछ लोग बड़े ओहदे पर रह चुके अधिकारी हैं और उन्होंने भारतीय नौसेना में अपने समय के दौरान युद्धपोतों की कमान संभाली थी। उनके बेदाग रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए बयान में कहा गया, ''सभी लोगों ने पूरी निष्ठा के साथ विशिष्ट सेवा की है और भारतीय नौसेना में सेवा करते हुए उच्च सम्मान के साथ देश का प्रतिनिधित्व किया है।'' आठ लोगों को अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था और वे अधिकांश समय हिरासत में रहे क्योंकि उनकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज कर दी गई थीं।  

इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को भारतीय नौसेना के उन आठ पूर्व कर्मचारियों के परिवारों से मुलाकात की, जिन्हें कतर की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। इस मौके पर उन्होंने भरोसा दिया कि सरकार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। जयशंकर ने इन लोगों को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को ‘‘सर्वोच्च महत्व’’ देती है और वह उनकी ‘‘चिंताओं एवं दर्द’’ को साझा करती है।

विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘आज सुबह, कतर में हिरासत में लिए गए आठ भारतीयों के परिजनों से मुलाकात की। इस बात पर जोर दिया कि सरकार मामले को सर्वोच्च महत्व देती है। हम परिजनों की चिंताओं और दर्द को पूरी तरह से साझा करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह रेखांकित किया कि सरकार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेगी। इस संबंध में परिजनों के साथ समन्वय किया जाएगा।’’

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