बुटन और सोमारी देवी को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
बुंडू के ताऊ गांव की प्रसिद्ध नृत्यांगना बुटन देवी और सोमारी देवी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। दोनों बहनों ने पारंपरिक नृत्य-संगीत को सहेजते हुए क्षेत्र में पहचान बनाई और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित की जाएंगी। उनके योगदान से पंचपरगना क्षेत्र में खुशी की लहर है।

बुंडू, संवाददाता। पंचपरगना की पारंपरिक नृत्य-संगीत और संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में योगदान देने वाली बुंडू के ताऊ गांव निवासी प्रसिद्ध नृत्यांगना बुटन देवी और उनकी छोटी बहन सोमारी देवी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। नृत्य के संरक्षण और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए दोनों सगी बहनों को दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मानित करेंगी। दोनों बहनों को सम्मान मिलने की खबर से पंचपरगना क्षेत्र में खुशी की लहर है। बुटन देवी और सोमारी देवी का जन्म सोनाहातू के तेतला गांव के गरीब परिवार में हुआ था। इनके पिता पंचानन लोहरा और माता लथुमनी देवी थीं।
आर्थिक तंगी के कारण दोनों बहनें विद्यालय नहीं जा सकीं, लेकिन लोककला और नृत्य-संगीत में उनकी रुचि बचपन से ही थी। दोनों गांव और आसपास होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगीं। इसी दौरान बुटन देवी की मुलाकात बुंडू के ताऊ गांव निवासी नृत्य-संगीत प्रेमी लखीचरण मुंडा से हुई। दोनों ने मिलकर संगीत मंडली बनाई। अपनी गायकी और नृत्य की प्रतिभा के दम पर बुटन देवी ने क्षेत्र में पहचान बनाई और उन्हें ‘स्वर कोकिला’ के नाम से जाना जाने लगा। वर्ष 1983 में उन्होंने लखीचरण मुंडा से विवाह किया। बाद में सोमारी देवी का विवाह तमाड़ के जामडीह निवासी जगजीवन लोहरा से हुआ। उन्होंने भी अपनी अलग संगीत मंडली बनाई और नृत्य-संगीत की साधना जारी रखी।दोनों बहनों की ख्याति पंचपरगना से निकलकर रांची, अविभाजित बिहार और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया क्षेत्र तक पहुंची। बुटन देवी के रिकॉर्ड किए ‘मनसा मंगल’ और विवाह गीत के कैसेट काफी लोकप्रिय हुए। लोककला में योगदान के लिए उन्हें सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभाग समेत विभिन्न संस्थाओं ने प्रमाणपत्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। उम्र के इस पड़ाव पर भी बुटन देवी पंचपरगनिया भाषा, लोकसंस्कृति और संगीत के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं और कलाकारों को प्रशिक्षण दे रही हैं। संगीत नाटक अकादमी का यह सम्मान दोनों बहनों की दशकों की साधना के साथ पंचपरगना की समृद्ध लोक संस्कृति का भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।


