मोनाड यूनिवर्सिटी में छात्रवृत्ति घोटाले की निदेशालय करेगा जांच
मोनाड यूनिवर्सिटी द्वारा फर्जी डिग्री और मार्कशीट बांटने के आरोप के चलते मामला गंभीर है। समाज कल्याण विभाग की जांच में छात्रवृत्ति घोटाले के सबूत मिले हैं। 2023 में, सामान्य वर्ग के छात्रों को एससी दिखाकर छात्रवृत्ति हड़पने के आरोप भी लगे हैं। जांच जारी है।

मोनाड यूनिवर्सिटी का फर्जी डिग्री और मार्कशीट बांटने का मामला शांत नहीं हुआ था और वर्ष-2022-23 से यूनिवर्सिटी ने छात्र-छात्राओं की करोड़ों की छात्रवृत्ति डकारनी शुरू कर दी थी। इसका खुलासा समाज कल्याण विभाग द्वारा रूटिन चैकिंग में हुआ था। इसके बाद बीती जनवरी में तत्कालीन डीएम ने मामले की पुन: जांच भी करायी थी, इस जांच में भी आरोप सहीं पाए गए थे। तब यूनिवर्सिटी को ब्लैक लिस्ट करने की डीएम ने संस्तुति की थी। हालांकि इसके बाद मोनाड यूनिवर्सिटी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। बता दें कि मोनाड यूनिवर्सिटी पर साल-2019 से फर्जी डिग्री और मार्कशीट बांटने के आरोप लगने शुरू हुए थे। जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी को काउंसलिंग सीट एलोट करता था, अगर यूनिवर्सिटी को 10 सीट एलोट होती थी तो इसकी एवज में यूनिवर्सिटी कई डिग्री बनाकर दूर-दराज के छात्र-छात्राओं को बांटता था। इसमें पीएचडी की करीब सैकड़ों डिग्री बांटी गई थी। इसी तरह बीए से लेकर एम टैक तक की डिग्री बांटने का कोराबार शुरू हुआ।
जांच की प्रक्रिया
इसकी शिकायत एसटीएफ को भी मिली तो उन्होंने मामले की जांच शुरू कर दी। करीब नौ महीने की जांच के बाद एसटीएफ की टीम ने मोनाड यूनिवर्सिटी पर छापा मारा और अभिलेखों की जांच शुरू की। जांच के दौरान यूनिवर्सिटी में तमाम तरह की खामियां पायी गई। तब मालिक समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसी बीच समाज कल्याण विभाग द्वारा रूटिन चैकिंग में 2022 से 2025 तक के तीनों सत्रों में छात्रवृत्ति में घोटाले का मामला सामने आया। तत्कालीन डीएम ने छात्रवृत्ति घोटाले की पुन: जांच करानी शुरू की तो जांच टीम के समक्ष छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप सिद्ध होने लगे। इसपर डीएम ने यूनिवर्सिटी को ब्लैक लिस्ट करने की शासन को संस्तुति की थी。
छात्रों की भर्ती में धांधली
बिहार के सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को एससी बनाकर छात्रवृत्ति हड़पने के लगे थे आरोप:
जानकारी के अनुसार साल-2023 में बिहार के करीब 20 से 25 छात्राओं का मोनाड यूनिवर्सिटी में दाखिला हुआ था। यह सभी छात्र सामान्य वर्ग के थे, जिन्हें एससी वर्ग में दिखाकर छात्रवृत्ति हड़पने के आरोप लगे थे। हालांकि यूनिवर्सिटी के कुछ लोगों का कहना है कि कंसल्टेंट व एडमिशन डायरेक्टर की साठ-गांठ से यह घोटाला किया गया था, जिसमें यूनिवर्सिटी का कोई हाथ नहीं था। लेकिन 2022 से 2025 तक लगातार छात्रवृत्ति में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को एससी दिखाकर छात्रवृत्ति हड़पने के आरोप है, जिसकी जांच अब निदेशालय द्वारा की जाएगी।


