बुलेट पर सवार भोलेनाथ, कांवड़ में गूंज रही अनूठी मन्नत
कांवड़ यात्रा में आस्था और मन्नतें अद्वितीय होती हैं। हरियाणा के आशीष ने बुलेट पर भोलेनाथ की प्रतिमा के साथ गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का संकल्प लिया है। उसने कांवड़ को फूलों से सजाया है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया है। उत्तर प्रदेश में कांवड़ियों की सेवा की भी सराहना की।
बड़ौत। कांवड़ यात्रा में आस्था के रंग जितने निराले हैं, मन्नतों की कहानियां भी उतनी ही अनूठी हैं। कोई परिवार की खुशहाली तो कोई संतान सुख की कामना लेकर गंगाजल ला रहा है, लेकिन हरियाणा के सोनीपत निवासी आशीष की कांवड़ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बुलेट पर विराजमान भोलेनाथ, फूलों से सजी कांवड़ और मन में एक ही संकल्प-गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा। आशीष बुलेट से कांवड़ लेकर हरिद्वार से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है। बुलेट पर भोलेनाथ की मनमोहक प्रतिमा विराजमान है, जबकि पूरी कांवड़ को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। सड़क से गुजरते समय यह अनूठी कांवड़ राहगीरों को ठिठककर देखने और तस्वीर लेने के लिए मजबूर कर रही है। आशीष का कहना है कि उसकी कांवड़ किसी निजी मनोकामना के लिए नहीं, बल्कि गौमाता के सम्मान और उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के संकल्प के लिए है। उसे विश्वास है कि भोलेनाथ उसकी पुकार सुनेंगे और उसकी मनोकामना पूरी होगी। उसका कहना है कि जब तक यह संकल्प पूरा नहीं होगा, कांवड़ यात्रा का सिलसिला जारी रहेगा। कांवड़ को फूलों से सजाने के पीछे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी है। आशीष का कहना है कि फूल कृत्रिम जरूर हैं, लेकिन इनके माध्यम से वह लोगों को प्रकृति और पौधरोपण के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहा है。
यूपी में कदम रखते ही दिखती है सेवा की मिसाल
आशीष ने उत्तर प्रदेश में कांवड़ियों के लिए की गई व्यवस्थाओं की भी जमकर सराहना की। उसका कहना है कि उत्तराखंड से यूपी की सीमा में प्रवेश करते ही कांवड़ यात्रा का रंग ही बदल जाता है। जगह-जगह सेवा शिविर, भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था शिवभक्तों को बड़ी राहत देती है। सेवादार जिस श्रद्धा से कांवड़ियों की सेवा कर रहे हैं, वह अपने आप में भक्ति की मिसाल है।
एक और अनूठी मन्नत
आशीष ने भगवान आशुतोष से एक और मन्नत मांगी है। उसका कहना है कि वह चाहता है कि योगी आदित्यनाथ हरियाणा के मुख्यमंत्री बनें। आशीष का दावा है कि जब तक उसकी यह मनोकामना पूरी नहीं होगी, वह कांवड़ यात्रा करता रहेगा।


