नेत्र उत्सव में नव यौवन रूप में दर्शन दिए जगन्नाथ , उमड़ी श्रदालुओं की भीड़

हिन्दुस्तान, सराईकेला
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सरायकेला के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में नेत्र उत्सव श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया। प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का रत्न सिंहासन पर वास हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान के नव यौवन रूप के दर्शन किए। धार्मिक अनुष्ठान में राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने भाग लिया और आयोजकों ने भंडारा का आयोजन किया।

नेत्र उत्सव में नव यौवन रूप में दर्शन दिए जगन्नाथ , उमड़ी श्रदालुओं की भीड़

सरायकेला। सरायकेला के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को नेत्र उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास पूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस पावन अवसर पर प्रभु जगन्नाथ,उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा को अणसर गृह (एकांतवास) से पूरे विधि-विधान के साथ मंदिर के रत्न सिंहासन पर विराजमान कराया गया। रत्न सिंहासन पर विराजमान होने के बाद तीनों विग्रहों का भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया गया। इसके उपरांत, सुबह से ही श्रद्धालुओं ने भगवान के दिव्य नव यौवन रूप के दर्शन किए। इस मनोहारी रूप को देखने के लिए मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन किए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।

धार्मिक अनुष्ठान

नेत्र उत्सव के दौरान मुख्य पुरोहित, सेवायत और पूजा समिति के पदाधिकारियों की देखरेख में सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। धार्मिक अनुष्टान में राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव शामिल हुए। उनकी उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक पूजा-अर्चना के बीच भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर हो उठा। धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति के बाद मंदिर समिति की ओर से भंडारा का आयोजन किया गया।

भंडारा और रथ मेला

भंडारा में बड़ी संख्या में श्रदालुओं ने भाग लिया। नेत्रोत्सव संपन्न होने के साथ ही सरायकेला में ऐतिहासिक रथ मेला और रथ यात्रा की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। भगवान जगन्नाथ के मौसी बाड़ी (गुंडिचा मंदिर) जाने के मार्ग पर अब चहल-पहल बढ़ गई है। मौसी बाड़ी परिसर में धीरे-धीरे विभिन्न प्रकार की दुकानें और आकर्षक झूले सजने लगे हैं।

आकर्षण और इंतज़ार

आयोजकों ने बच्चों के लिए मिकी माउस, ड्रैगन ट्रेन और मून-राइड जैसे कई झूले लगाए हैं, वहीं बड़ों के लिए भी विशाल झूलों ब्रेक डांस और जायंट व्हील की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, स्थानीय हस्तशिल्प, चाट-पकौड़े, और खिलौनों की दुकानों के सजने से पूरा सरायकेला रथ की रौनक में सराबोर हो गया। श्रद्धालु रथ यात्रा और मेला का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बार जलपरी मेले में मुख्य आकर्षण रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेत्र उत्सव कब मनाया गया?
नेत्र उत्सव मंगलवार को मनाया गया।
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