अवैध पटाखा फैक्टरी कांड : बचे पटाखों और अवशेषों से खुलेगा विस्फोट का राज
प्रयागराज में चिल्ला शहबाजी गांव में मिली अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट की जांच जारी है। पुलिस और प्रशासन बचे पटाखों और अवशेषों की फॉरेंसिक जांच कराएंगे ताकि यह जानकारी मिल सके कि फैक्टरी में सामान्य पटाखे या घातक विस्फोटक सामग्री का उपयोग हो रहा था। मुख्य आरोपी की पूछताछ भी की जाएगी।

प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। प्रयागराज-कौशाम्बी सीमा पर चिल्ला शहबाजी गांव की अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट की जांच में पुलिस और प्रशासन अब फैक्टरी में बचे पटाखों और विस्फोट के बाद मिले अवशेषों को अहम कड़ी मानकर आगे बढ़ रहा है। इनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि फैक्टरी में सामान्य पटाखे तैयार किए जा रहे थे या वहां घातक विस्फोटक सामग्री का भी इस्तेमाल और भंडारण हो रहा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट हादसे की वजह और फैक्टरी में इस्तेमाल सामग्री की प्रकृति की जांच में अहम भूमिका निभाएगी。
जांच की प्रक्रिया
पुलिस मुख्य आरोपी फैक्टरी मालिक नौशाद से पूछताछ में सामने आए थोक पटाखा कारोबारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। जांच में प्रयागराज के कीडगंज और चौक के अलावा प्रतापगढ़ के कुंडा के कुछ कारोबारियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन कारोबारियों से नौशाद किस तरह पटाखा और अन्य सामग्री की खरीद-फरोख्त करता था।
अवैध धंधे का इतिहास
अवैध पटाखा कारोबार और विस्फोटक सामग्री के मामले में प्रयागराज का नैनी क्षेत्र भी पहले से पुलिस के रडार पर रहा है। सितंबर 2021 में नैनी के एक पोल्ट्री फार्म से आईईडी बरामद हुई थी। इससे पहले अप्रैल 2021 में नैनी के धनवा गांव स्थित पटाखा फैक्टरी में भी विस्फोट हुआ था। इन घटनाओं को भी मौजूदा जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस-प्रशासन अब चिल्ला शहबाजी फैक्टरी से जुड़े हर व्यक्ति, सप्लायर, खरीदार और सामग्री की आपूर्ति के स्रोत की पड़ताल कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाली प्रत्येक कड़ी को जोड़कर यह पता लगाया जाएगा कि अवैध कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा था और इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री वहां कैसे पहुंची।


