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एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: वरुण गांधी बोले, मोदी के नेतृत्व ने जगाई काफी उम्मीदें'

बीजेपी सांसद 39 वर्षीय वरुण गांधी (Varun Gandhi) अपना तीसरा लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections 2019) उत्तर प्रदेश के पीलीभीत (Pilibhit) से लड़ रहे हैं। उन्होंने अपनी पार्टी और चुनाव से जुड़े तमाम मुद्दों को लेकर हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ विस्तारपूर्वक चर्चा की। पढ़ें, इस इंटरव्यू के संपादित अंश: 

सवाल: मां मेनका गांधी की लोकसभा सीट और अपनी लोकसभा सीट में अदला-बदली की क्या वजह थी?

जवाब: पार्टी का वफादार सिपाही होने की वजह से जो भी पार्टी फैसला करती है, वह हमें मान्य होता है। हम परिवार से इकलौते ऐसे दो लोग हैं, जिन्हें बीजेपी ने टिकट दिया है। पार्टी ने हमें काफी कुछ दिया है और वो जो भी फैसला करते हैं, हम उसका सम्मान करते हैं। पीलीभीत हमारे लिए पिछले 30 सालों से एक घर की तरह ही है।

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सवाल: आप अपनी जीत को लेकर कितने आश्वस्त हैं?

जवाब: पूरी तरह से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने काफी उम्मीदें जगाई हैं और यह हम सभी के लिए फायदेमंद है। 

सवाल : सपा-बसपा के महागठबंधन से जातीय समीकरण पर क्या असर होगा?

जवाब: पिछले पांच सालों में दो चीजें हुई हैं। एक है बीजेपी की सामाजिक नीति पहल जैसे कृषि, शैक्षिक या स्वास्थ्य क्षेत्र। इसने ग्रामीण परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। उदाहरण- किसान सम्मान निधि (जिसके तहत दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों को उनके बैंक खातों में सालाना 6,000 रुपये का नकद ट्रांसफर किए जाएंगे)। इसके अलावा एससी, एसटी और अन्य पिछड़ी जातियों के लोगों को काफी फायदा सरकार ने पहुंचाया है और इस बात का पता लोगों को जरूर है। वोटर शेयर में यह महागठबंधन के अंकगणित को खराब कर देगा।

जवाब: जो लोगों को सरकारी फायदे मिले हैं, उससे क्या वे जातिगत पहचान से ऊपर उठेंगे?

जवाब: पहचान की राजनीति को तोड़ना बेहद मुश्किल है ... लेकिन आइडेंटिटी पॉलिटिक्स मेरे लिए आर्थिक परिवर्तन की तरह है। चाहे वह बिहार, तमिलनाडु या उत्तर प्रदेश हो- हमेशा ही वंशवाद की भावना को हवा दी है। 

सवाल: आप साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में क्या फर्क देख रहे हैं?

जवाब: 2014 का चुनाव नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर केंद्रित चुनाव था। लेकिन तब तक केंद्र में उनका काम किसी ने देखा नहीं था। इस बार हम चुनाव उनके काम के आधार पर लड़ रहे हैं। हम प्रामाणिकता के साथ अब बोल सकते हैं। वह समय सपनों और आशाओं पर आधारित था। इस बार, यह नतीजों और ग्राउंडवर्क पर आधारित है। 

सवाल:  क्या आप इस बार 2014 जैसी मोदी और बीजेपी की लहर देख पा रहे हैं?

जवाब: हां, मैं देख रहा हूं लेकिन इस बार लहर कुछ अलग है। यह एक ऐसी लहर है जो मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में दिखाती है जिसमें उन्होंने जो वादे किए थे, उन्हें पूरे किए। इसके बाद अब आशाएं हैं कि वे इसे अगले स्तर तक कैसे ले जाते हैं। यह वैसी ही है, जैसी बराक ओबामा ने अपने पहले चुनाव में जीत हासिल की थी और फिर साल 2012 में जीत दर्ज की। दोनों ही बार लहर थी और वे ज्यादा बहुमत के साथ जीते। पहले चुनाव में ताजगी की उम्मीद थी और दूसरी बार यह महसूस हुआ कि उन्होंने देश को आगे बढ़ाया है। इसलिए लोग यह देखना चाहते थे कि वे अगले कार्यकाल में क्या देने वाले हैं।

सवाल: क्या बीजेपी एंटी इंकमबेंसी का भी सामना कर रही है?

जवाब: किसी व्यक्तिगत उम्मीदवार के खिलाफ थोड़ी सी एंटी इनकमबेंसी होती ही है। लेकिन मोदी के लिए बहुत बड़ी सद्भावना है। बीजेपी का टिकट वितरण भी बेहतर तरीके से हो रहा है। 

सवाल: संगठनात्मक सुधार किस तरह से बीजेपी की मदद कर रहा है?

जवाब: इसका बहुत बड़ा प्रभाव है। मैंने दो चुनाव लड़े हैं, लेकिन इस बार मुझे लग रहा है कि ऐसी ताकत है जो मेरे लिए काम कर रही है। एक ऐसी आदृश्य ताकत है जो इस बार काम कर रही है। मुझे लगता है कि यह देशभर को फायदे पहुंचाएगा।

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  • Web Title:Exclusive Modi s leadership generates lot of hope says Varun Gandhi