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इंटरव्यू: रेल यात्रियों को मिलेंगी विमान जैसी सुविधाएं-पीयूष गोयल

पीयूष गोयल (फाइल फोटो)

रेल मंत्री पीयूष गोयल मोदी सरकार के व्यस्ततम मंत्रियों में से एक हैं। सरकार और पार्टी के भीतर उनकी भूमिका संकटमोचक की रहती है। अपनी जुझारू कार्यशैली के लिए मशहूर गोयल कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। अरुण जेटली की अस्वस्थता की स्थिति में वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें सौंपा गया है। सरकार के चार साल पूरे होने पर गोयल ने रेल महकमे के कामकाज, सरकार की उपलब्धियों व ज्वलंत राजनीतिक मुद्दों पर हिन्दुस्तान के ब्यूरो प्रमुख मदन जैड़ा और विशेष संवाददाता अरविंद सिंह से विस्तृत बात की। पेश हैं प्रमुख अंंश-

आपकी सरकार में रेल किराया नहीं बढ़ा। रेलवे का घाटा 35 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है। ऐसे मेें, आधुनिकीकरण के लिए धन कहां से आएगा?

इसकी वजह सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कारण वेतन में बढ़ोतरी है। इससे रेलवे पर सीधे 22 हजार करोड़़ रुपये का बोझ बढ़ा। फिर भी मेरा व्यक्तिगत मानना है कि रेलवे के आधुनिकीकरण व बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सिर्फ किराया बढ़ाना समाधान नहीं है। तकनीक से रेलवे की दक्षता बढ़ाई जाएगी। हम दक्षता और क्षमता में इजाफा करके भी संसाधन जुटा सकते हैं। वैसे भी, मोदी सरकार ने चार साल में रेलवे में जितना निवेश किया है, इसका असर आगे नजर आएगा। छह-सात साल में रेलवे का कायापलट हो जाएगा। 

'तो उम्मीद करें कि रेल किराया नहीं बढ़ेगा?

हां, रेलवे में खर्च कम करेंगे। इसकी क्षमता बढ़ाएंगे। यात्रियों को बेहतर सुविधाएं भी देंगे। 

लेकिन आप रेल डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरडीए) बनाने जा रहे हैं, जो रेल किराया व मालभाड़ा तय करेगी?

आरडीए के अध्यक्ष व सदस्यों के चयन के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की पहचान हो रही है। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी। तब ऐसा भी हो सकता है कि खराब सेवाओं के लिए रेल किराया घटाने की सिफारिश हो जाए, या किराया बढ़ाने के लिए कहा सकता है। दोनों बातें हो सकती हैं।

गैर राजस्व किराये से रेलवे की मोटी कमाई की योजना थी। इसमें सफलता क्यों नहीं मिली?

सरकार ने इसके लिए नीतियों में बदलाव किया है। पहले रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास में जमीन लीज पर कम समय के लिए दी जाती थी। अब इसे 99 साल के लिए दिया जाएगा। निजी क्षेत्र स्टेशन का विकास करें और मुनाफा कमाएं। कुछ कंपनियों ने रेलवे में काम करने में रुचि नहीं दिखाई, क्योंकि उन्हें लगता था कि यदि किसी प्रकार की नीतिगत समस्या खड़ी होगी, तो क्या होगा? इस असुरक्षा भाव को समाप्त करने के लिए सरकार नई सोच के साथ आगे बढ़ रही है। निजी कंपनियां स्वयं डिजाइन बनाएं और निर्माण करें। इससे रेलवे के साथ काम करना आसान हो जाएगा और रेलवे को अधिक राजस्व भी मिलेगा। अनिश्चितता का माहौल समाप्त होने से बडे़ खिलाड़ी रेलवे में निवेश करने को तैयार होंगे।

'मानव रहित क्रॉसिंग पर हादसे, गंदे शौचालय, स्टेशनों की गंदगी, छवि खराब करने वाली ये समस्याएं कैसे दूर होंगी?

रेलवे की छवि जन-भागीदारी से ही सुधर सकती है। ट्रेनों में बॉयो-टॉयलेट लगाए जा रहे हैं, आगामी मार्च तक सभी ट्रेनों में इन्हें लगाने का काम पूरा हो जाएगा। लेकिन यात्री बॉयो-टॉयलेट में कूड़ा डाल देंगे, तो यह बंद हो सकता है, इसलिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। रेलवे के प्रमुख मार्गों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग इस साल दिसंबर तक समाप्त हो जाएगी।

'यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए क्या हो रहा है?

सरकार हवाई जहाज की तरह टे्रनों में वैक्यूम टॉयलेट लगाने की योजना बना रही है। प्रयोग के तौर पर 500 से अधिक वैक्यूम टॉयलेट लगाए जाएंगे। यह महंगा है, लेकिन जनता को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए महंगा-सस्ता नहीं देखना है। प्रधानमंत्री की सोच है कि हवाई चप्पल पहनने वाले हवाई जहाज की यात्रा करें। उसी तर्ज पर हवाई चप्पल वाले रेल यात्री को हवाई जहाज जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। 

रेलवे की कार्य-संस्कृति में आप क्या बदलाव ला पाए?

रेलवे की कार्य-संस्कृति में बहुत बदलाव आया है। रेलवे के 13 लाख कर्मियों की, जो दिन-रात सुरक्षित टे्रन चलाने में लगे हैं। कोई भी निजी संस्था, सरकार या मंत्रालय हो सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नेतृत्व कैसा है और उनका विजन क्या है? मोदीजी ने सरकार व देश को सोचने का नया ढंग दिया है। नया विजन दिया है। इस कारण रेलवे में भी कर्मचारी सातों दिन 24 घंटे काम करते हैं। बैठकें रात 12 बजे तक चलती हैं और अधिकारी इसमें पूरा सहयोग करते हैं। खुशी से काम करते हैं, और इसके बदले उन्हें अधिक वेतन नहीं दिया जाता। उनके मन में भी है कि यह मेरी रेल है, इसे कैसे बेहतर बनाया जाए?

मुंबई-अहमदाबाद के बाद क्या दिल्ली-हावड़ा के बीच हाई स्पीड ट्रेन चलेगी? 

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड ट्रेन योजना को समय से पहले 2022 तक पूरा करेंगे। पहले लक्ष्य 2023 का था। योजना पर तेजी से काम हो रहा है। दिल्ली-हावड़ा रूट पर यह परियोजना लागू करने का अभी कोई विचार नहीं है।

क्या दिल्ली से बनारस के बीच हाई स्पीड कॉरिडोर बनने जा रहा है?

नहीं, अभी नहीं। 

रेलवे में पांच बडे़ सुधार क्या हुए हैं?

कई सुधार हुए हैं। अब अतिरिक्त सचिव स्तर (एचएजी ग्रेड) के अफसरों में आम सहमति से फैसले किए जा रहे हैं। इसमें पृथक राय नहीं होती है। कैडर और विभाग गौण होगा। यह फैसला उच्च प्रबंधन की बैठक में लिया गया है। दूसरा, संरक्षा की प्राथमिकता अनिवार्य कर दी गई। इसके लिए रेलवे बोर्ड की तमाम शक्तियों को जोनल व डिवीजन स्तर पर विकेंद्रीकृत किया गया है। जिससे संरक्षा मजबूत करने के लिए डिवीजन स्तर के अधिकारी त्वरित फैसला ले अमल कर रहे हैं। यही कारण है कि इस साल महज 73 रेल हादसे हुए। रेल कर्मियों की गंभीर बीमारियों के लिए डिवीजन स्तर पर निजी अस्पतालों को रेफर किया जा रहा है। इसके पूर्व जोनल व रेलवे बोर्ड स्तर पर मंजूरी लेनी पड़ती थी। यदि फाइल पर प्रश्नचिन्ह लगा, तो पुन: डिवीजन से जोन फिर बोर्ड तक फाइल घूमती थी। इमरजेंसी हो तो मरीज की जान पर बन आती थी। इसे समाप्त किया गया है। सभी रेल परियोजनाओं को थोड़ा-थोड़ा बजट आवंटित करने की बजाय महत्वपूर्ण पांच परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया गया है, ताकि काम समय पर पूरा हो। इससे घाटा कम होगा। यात्रियों की सुविधाएं भी बढे़ंगी।

रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में क्या अड़चनें हैं?

जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी अड़चन है। हमने राज्य सरकारों से रेल परियोजनओं के लिए समय पर जमीन उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि परियोजनाएं समय से पूरी हो सकें, अन्यथा ये दशकों तक लटकी रहेंगी। इस प्रकार, रेलवे की कार्य-संस्कृति पूरी तरह बदल चुकी है।

आप महाराष्ट्र से आते हैं, वहां शिवसेना सरकार से काफी नाराज है। कैसे मनाएंगे?

बातचीत और मिलना-जुलना तो लगा रहता है। शिव सेना हमारे साथ केंद्र और राज्य, दोनों में है। जहां तक नाराजगी का सवाल है, तो वह कई बार बयान दे चुकी है। हम इसे प्रतिक्रिया मानते हैं। इस प्रतिक्रिया का मतलब यह नहीं है कि वह साथ छोड़ देगी। वह हमारा सबसे पुराना साथी दल है, इसीलिए हम चाहते हैं कि आगे भी साथ रहे। 

सहयोगी नाराज हो रहे हैं और विपक्ष आपके खिलाफ एकजुट, इस चुनौती को कैसे देखते हैं?

विपक्ष के एकजुट होने से हमें कोई दिक्कत नहीं है। पूरे देश ने देख लिया कि जब कांग्रेस के साथ विपक्ष मिलता है, तो क्या होता है? इंद्रकुमार गुजराल के साथ क्या हुआ, देवगौड़ा के साथ क्या हुआ और चंद्रश् ोखर के साथ क्या हुआ? 2019 के आम चुनाव से पहले विपक्ष किस एजेंडे पर गठबंधन करेगा, यह साफ नहीं है। कर्नाटक में हाल में जो गठबंधन हुआ और उनमें जो मनमुटाव हो रहा है, वह किसी से छिपा नहीं है। मोदीजी के डर से विपक्षी क मंच पर खड़ा होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके मतभेद गठबंधन के लिए सबसे बड़ी अड़चन साबित होगी।

विपक्ष रोजगार के सवाल को उठा रहा है?

पहली बात तो यह कि रोजगार का मतलब यानी सरकारी नौकरी नहीं होता। बेरोजगारों को काम करने का अवसर मिलना चाहिए। अर्थव्यवस्था दर पिछली तिमाही में 7.7 पर पहुंच गई है। इससे अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि किस गति से लोगों को काम का अवसर मिल रहा है। बुनियादी ढांचे से जुडे़ जो कार्य हो रहे हैं, चाहे राष्ट्रीय राजमार्गों का बनाना हो, नई टे्रन चलानी हो, नया ट्रैक बिछाना हो या एक करोड़ नए घर, इन सबमें लोगों को काम मिल रहा है। सरकार में आने से पहले 398 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछा था, हमने तीन लाख किलोमीटर बिछा दिया। सिर्फ ओला और उबर में 10 लाख लोग काम कर रहे हैं। इसको ध्यान में रखते हुए जनता मोदीजी का साथ देगी।

आपके पास कोयला मंत्रालय भी है, क्या विदेशों से कोयले का आयात फिर बढ़ गया है?

नहीं, ऐसा नहीं है, बल्कि अप्रैल में 10 फीसदी घटा ही हैं।

क्या भविष्य में कोयला आधारित बिजलीघर नहीं बनेंगे?

नहीं, ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ है। हमारी अपनी आवश्यकताएं हैं। 

केंद्र सरकार की 4 साल की बड़ी उपलब्धि आप क्या मानते हैं?

जब हमने 2014 में सत्ता संभाली थी, तब देश की अर्थव्यवस्था बहुत बुरी हालत में थी। केंद्र सरकार के सभी विभागों में पॉलिसी पैरालिसिस की स्थिति थी। समझ में नहीं आ रहा था कि कहां से शुरुआत करें। उवर्रक से लेकर रेलवे तक, सभी क्षेत्रों में यही स्थिति थी। सरकार ने इस स्थिति को समझा और योजनाएं लागू कर उसे दूर किया। साथ ही संसाधन भी जुटाए। वह भी महज चार साल में। पिछले 48 सालों में इतना काम नहीं हुआ, जितना मोदी सरकार ने 48 माह में कर दिया। .

सरकार ने समस्या के मूल में जाकर सुधार किए हैं। यूरिया को ही लीजिए। इसके लिए हर साल गोलियां-लाठियां चलती थीं। इसका रास्ता कांग्रेस को पता था कि नीम कोटेड यूरिया से इसका इस्तेमाल केमिकल फैक्टरियों में बंद हो जाएगा। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने 30 फीसदी से अधिक नीम कोटेड यूरिया पर कैप लगाया। लेकिन हमारी सरकार ने यूरिया को 100 फीसदी नीम कोटेड कर दिया। समस्या खत्म हो गई। इसका अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस की नीयत साफ नहीं थी। .

हमारे देश की जनता काफी परिपक्व है, वह दोबारा अस्थिरता को नहीं अपनाएगी। जनता को यह समझ है कि देश को राजनीतिक स्थिरता कौन देगा? वह यह भी समझती है कि कौन, कैसी सरकार देगा? चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा होगा। इसी एक मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात दे देंगे। .

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  • Web Title:exclusive interview with railway minister piyush goyal