अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

इंटरव्यू: अभी गठबंधन होने दीजिए, पीएम बाद में तय कर लेंगे-अखिलेश

SP, National, President, Akhilesh, meeting

उप-चुनावों में भाजपा से तीन लोकसभा सीटें छीनने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हौसले बुलंद हैं। पुरानी राजनीतिक दुश्मनी भुलाकर उन्होंने बसपा से हाथ मिलाया और अब इस गठजोड़ को विस्तार देने में जुटे हैं। वह भाजपा पर आक्रामक हैं और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के आगामी विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी उतारकर देश भर में पांव पसारने की रणनीति बना रहे हैं। हिन्दुस्तान लखनऊ के कार्यकारी संपादक के के उपाध्याय ने तमाम मुद्दों पर उनसे लंबी बात की। पेश हैं प्रमुख अंश:

'अगला आम चुनाव आप केवल बसपा के साथ मिलकर लड़ेंगे या कांग्रेस व अन्य दल भी गठबंधन में आएंगे?

सभी दल महसूस कर रहे हैं कि भाजपा लोकतंत्र के लिए खतरा है। केंद्र में उनका चार साल का काम और यूपी में साल भर का...। इसे देखिए। इन लोगों की भाषा देखिए, व्यवहार देखिए। यह सब लोकतंत्र के लिए खतरा है। हम चाहते हैं कि गठबंधन का ऐसा रास्ता निकले कि राजनीतिक तौर पर सभी संतुष्ट रहें। सपा-बसपा का जो तालमेल या गठबंधन होने वाला है, उसके साथ और लोगों को कैसे जोड़ सकते हैं, यह देखना है। वरना सपा-बसपा तो हैं ही।

'गठबंधन की रूपरेखा तैयार है या अभी काम चल रहा है?

यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे कि हमारी रूपरेखा कैसी थी? हम पहले से कुछ नहीं कहेंगे। हमसे कई लोगों ने कहा कि बसपा तो जीरो (पिछले लोकसभा चुनाव में) थी। उसके साथ आप कैसे जुड़ गए? रालोद जीरो है। हमने कहा, हम समाजवादी हैं, जानते हैं कि जीरो कहां लगाना है। जिसको जीरो बता रहे थे, उसने देश को हिला दिया।

'गठबंधन में सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा और इसमें निर्णायक भूमिका किसकी होगी? 

हमने निषाद पार्टी के अध्यक्ष के बेटे को गोरखपुर में सपा से चुनाव लड़ाया। एक यह फॉर्मूला था। कैराना में पार्टी विधायक की मां (तबस्सुम हसन) को रालोद से चुनाव लड़ाया। पूरी पार्टी ने सहयोग किया। यह दूसरा फॉर्मूला था। हम लोग परिणाम देने वाला गठबंधन करेंगे। यदि दो-चार सीटें कम भी हुईं, तो कोई परेशानी नहीं। हम समाजवादी लोग हैं, त्याग करना जानते हैं। समीकरण ऐसा बनेगा कि नतीजे अच्छे आएंगे और भाजपा परास्त होगी।

'राहुल गांधी ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। तो इस गठबंधन का नेता कौन होगा?

उन्होंने यह समझते हुए कहा होगा कि उनकी पार्टी सबसे ज्यादा सीटें जीतेगी। हमने पहले भी कहा है कि देश में बीजेपी को क्षेत्रीय दल ही रोकेंगे। चाहे तेलंगाना के सीएम हों या आंध्र प्रदेश के। अभी डीएमके के साथ वाले लोग हमें बता रहे थे कि तमिलनाडु में डीएमके की बड़ी और कांग्रेस की छोटी भूमिका होगी। इसी तरह बंगाल, ओडिशा, बिहार और यूपी में भूमिका तय होगी। बाद में प्रधानमंत्री तय होगा। चुनावी इतिहास में पहले भी प्रधानमंत्री बाद में तय हुआ है और आगे भी ऐसा ही होगा।

'आप किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे?.

सपा की कोशिश होगी कि भाजपा को मुद्दे से न हटने दे। सबसे बड़ा किसानों का सवाल है। कर्जमाफी व किसानों की आय दोगुनी होगी। गन्ना किसानों के पैकेज से किसानों का भला नहीं होने वाला है। उनके लिए सरकार ने बड़ी समस्या पैदा कर दी है। आलू एक कुंतल भी नहीं खरीदा गया। किसानों को गेहूं में नुकसान हो गया।

'पर सरकार तो कह रही है कि गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई?

गेहूं खरीद में बीच के लोगों ने, आढ़तियों ने अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों का पैसा ले लिया। किसानों को जो दाम मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। किसानों के गन्ने खेत में ही खड़े रह गए। हमारी सरकार ने अमूल के दो प्लांट लगवाए। बीजेपी का इसमें कोई योगदान नहीं है। हम एक्सप्रेस-वे के किनारे मंडी बनवा रहे थे। इन लोगों ने उसका काम रोक दिया। अभी हम बुंदेलखंड गए, तो पता लगा कि यह पैसा नहीं मिल रहा है। 

'भ्रष्टाचार तो इस सरकार में कम हुआ है?

भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ। इनके विधायक, सांसद, मंत्री खुद कह रहे हैं। किस जिले में ओवरलोडिंग नहीं हो रही है, बता दें? बांदा, हमीरपुर में तो हमने खुद देखा। हर जगह शराब खूब पकड़ी जा रही है।

'अपराधी भयभीत हैं, एनकाउंटर से अपराध कम हुए हैं? 

प्रदेश का क्राइम के मामले में बुरा हाल है। एनकाउंटर पर तो मानवाधिकार आयोग ने सरकार को नोटिसें दी हैं। कभी किसी दूधवाले का एनकाउंटर कर दिया, तो कभी राजस्थान से किसी को लाकर एनकाउंटर में मार दिया। सपा ने फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ आवाज उठाई, तो एनकाउंटर कम हो गए। अब केवल पकड़े जा रहे हैं। 

'तो आप मानते हैं कि अपराध नियंत्रण में सरकार फेल है?

अपराध नियंत्रण के मामले में सरकार सौ प्रतिशत फेल हुई है। यह हम नहीं कह रहे। इन्हीं के मंत्री, सांसद और विधायक कह रहे हैं। अभी डायल-100 वालों ने कहा कि साइकिल चलाने से स्वास्थ्य बेहतर होता है। डायल-100 वाले साइकिल की बात करने लगे। गडकरी साहब कह गए थे कि कन्नौज वाली जीटी रोड को फोर लेन से छह लेन कर देंगे। अब तो साल हो गया। कुछ नहीं हुआ। लखनऊ की कई सड़कों को छह लेन करने की बात हमने कही थी। इन लोगों ने अनुमति नहीं दी। 

'यह सरकार भी हाई-वे पर तो काम कर रही है, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की तैयारियां जोरों पर हैं। 

समाजवादी सरकार के एक्सप्रेस-वे पर इन लोगों ने खूब अंगुली उठाई। उसमें कोई भी कमी नहीं ढूंढ़ पाए। अब पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे में इन्होंने क्या किया? केवल समाजवादी शब्द हटा दिया और क्वालिटी के मानक कम कर दिए। लाइटिंग नहीं दी। सुविधाएं घटा दीं। इस एक्सप्रेस-वे के लिए 70 प्रतिशत जमीन तो हम लोग पहले ही खरीद चुके थे। डिजाइन हमारी सरकार में ही तय हो गया था। इन्होंने कौन सा नया काम कर दिया? अगर फाइनेंशियल और प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलेगा, तो यह एक्सप्रेस-वे नहीं बन पाएगा। हमने ऐसा एक्सप्रेस-वे बनवाया, जिसमें 120 की स्पीड पर चलने पर गाड़ी में रखे गिलास का पानी नहीं गिरेगा। आप 160 की स्पीड वाला ऐसा एक्सप्रेस-वे बनाकर दिखाओ। लखनऊ -आगरा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद आगरा के होटल और ज्यादा चलने लगे हैं।

'भाजपा अब अति पिछड़ों व अति दलितों का मुद्दा लेकर आ रही है। अति पिछड़ी जातियों को दलित वर्ग में शामिल करने को कह रहे हैं। आरक्षण की बात भी हो रही है?

(मुस्कराते हुए) ...मैं बीजेपी के लोगों को मिठाई खिलाऊंगा। कम से कम इन लोगों ने आरक्षण की बात तो की। लेकिन झगड़ा मत कराओ। मैं कहता हूं कि अति पिछड़ा, अति दलित मत करो। कुर्मी कितने हैं, बाथम कितने हैं? 17 जातियां कौन सी हैं? यह सब मत करो। इन सब जातियों को गिन तो लो। फिर उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षण दे दो। हम आपको और मिठाई खिला देंगे।

'भाजपा अगर राम मंदिर का मुद्दा उठाती है, तो आप लोगों के पास इसका क्या जवाब होगा?

भूखे भजन न होए गोपाला...। यह जमाना वाट्सएप-फेसबुक का है। युवा अब जानने लगे हैं कि भाजपा इन्हें कैसे धोखा दे रही है? कितनी बार शिक्षा मित्रों को लाठी मारोगे? कभी इतिहास में ऐसा नहीं हुआ होगा। बीपीएड वाले लाठी खा गए। 34 हजार पुलिस भर्ती वालों का रिजल्ट देखें। पुलिस वाले निकाल दिए गए। इन्होंने आरक्षण का नया तरीका लगा दिया। इन्होंने पिछड़ों व अति पिछड़ों को क्यों धोखा दिया? पुलिस भर्ती का रिजल्ट बदल दिया।

'यूपी सरकार को एक साल से ज्यादा वक्त हो गया। इसके कामकाज को आप कितने नंबर देंगे?

नंबर मैं नहीं दूंगा। नंबर तो जनता ने दे दिए। इनके सीएम को, डिप्टी सीएम को, इनके गन्ना मंत्री को, विधायकों को, पार्टी को और आरएसएस को। सबको दे दिए। यह पार्टी (भाजपा) तो किसी नंबर के लायक ही नहीं है।

'आपने कई मौकों पर पार्टी में राजनीतिक कुर्बानी देने को कहा है। क्या मतलब है इसका ?

जब राज्यसभा चुनाव हुआ, तो हमारे चार वोट इन लोगों ने तोड़ लिए। हाल ही में मुझसे कुछ लोग यह कहने आए, आप सदन (विधान परिषद) चले जाते, तो घर (सरकारी बंगला) बच जाता। मुझे तो नहीं पता था कि सदन जाने से घर बच जाता है। पर, हम तो उस वक्त पॉलिटिकल निर्णय ले रहे थे। हमने बसपा को मौका दिया।

'...तो यह त्याग की राजनीति की आपने?.

मैं त्याग की राजनीति देश को दिशा देने के लिए, सपा के सिद्धांतों को जनता तक पहुंचाने के लिए कर रहा हूं। लोकतंत्र को बचाना है। विपक्ष को प्रोटोकॉल व अन्य चीजों की ज्यादा जरूरत है। सत्ता वालों के पास तो सब कुछ है। यूपी की सरकार लोकतंत्र में भरोसा नहीं करती है। विपक्ष जितना मजबूत होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। यह लोग विपक्ष को कमजोर देखना चाहते हैं।

'चर्चा है कि आपका सरकारी बंगला जब खाली हुआ, तो उसमें से काफी सामान गायब पाया गया? तोड़-फोड़ भी की गई, कितनी सच्चाई है इसमें? 

मीडिया में वही तस्वीरें आईं, जो सरकार दिखाना चाहती थी। हमारा बंगला दिखता जरूर बड़ा था, लेकिन ज्यादा बड़ा है नहीं । पूजा घर बनवाने में हमने पैसा लगवाया। इसमें सजावट का पैसा हमारा लगा है। वहां बहुत सा काम हमने अपने पैसे से कराया था। जो मेरा सामान बिना तोड़-फोड़ के निकल सकता था, वह मैंने निकाला। जो सामान मेरा था, वह मैंने ले लिया। अब बंगले में मलबा कहां से आया है। यह देखा जाना चाहिए। वहां जेनरेटर मेरा था। क्या सरकार के लिए इसे छोड़ जाऊं? अब किसी ने टोटीं निकाल लीं, सरकार बताए तो उतनी टोंटी लगवा दूंगा। लेकिन पहले मेरा सामान भी सरकार वापस करे। .

'आपके विरोधियों की क्या नीयत है इन सबके पीछे?

अब ये लोग कैराना, नूरपुर हार गए। गोरखपुर, फूलपुर हार गए। अपनी हार कैसे छिपाएं? मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रमुख सचिव पर भ्रष्ट होने के आरोप लगे हैं। हमारे बंगले में एक सरकारी अधिकारी चुपचाप आया था। रात में वहां उसने क्या किया, मैं इसका जल्द खुलासा करूंगा। 

'सरकार कह रही है कि अधिकारी ठीक काम नहीं करते?

हमारे साथ तो अधिकारी बहुत अच्छा काम करते रहे। आप मेट्रो देखिए, एक्सप्रेस-वे देखिए। डायल-100 देखिए। लैपटॉप वितरण, समाजवादी पेंशन योजना का काम देखिए। इनसे दो इंजन की सरकार नहीं चल पा रही है।

'इन दिनों आप साइकिल चलाने लगे हैं। कहा जा रहा है यह भी राजनीति का हिस्सा है?

जब हम मैसूर में पढ़ा करते थे, तब से ही साइकिल चलाने और कसरत करने की हमारी आदत है। अब घर छूट गया तो क्या, बरसों पुरानी आदत थोड़े ही छूट जाएगी। लेकिन एक बात साफ है। साइकिल चलाते हुए जहां-जहां भी जाता हूं, लोग समाजवादी सरकार के काम की तारीफ बहुत करते हैं। हम लोग तो कितने दिनों से तमाम मुद्दों को लेकर लड़ते आ रहे हैं। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:exclusive interview with akhilesh yadav