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Hindustan Exclusive: PF से कमाई पर टैक्स क्यों, करदाताओं को राहत देने को क्या हैं उपाय? बजट पर वित्त सचिव अजय भूषण का इंटरव्यू

सरकार ने मध्यम वर्ग को भले ही टैक्स छूट न दी हो लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े ऐलान से उन्हें तमाम फायदे होंगे। वित्त सचिव अजय भूषण पाण्डे ने हिंदुस्तान के विशेष संवाददाता सौरभ...

Hindustan Exclusive: PF से कमाई पर टैक्स क्यों, करदाताओं को राहत देने को क्या हैं उपाय? बजट पर वित्त सचिव अजय भूषण का इंटरव्यू
Shankar Panditलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीWed, 03 Feb 2021 07:37 AM
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सरकार ने मध्यम वर्ग को भले ही टैक्स छूट न दी हो लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े ऐलान से उन्हें तमाम फायदे होंगे। वित्त सचिव अजय भूषण पाण्डे ने हिंदुस्तान के विशेष संवाददाता सौरभ शुक्ल से बातचीत में कहा कि सरकार ने भले ही टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं किए हों लेकिन टैक्स के मोर्चे पर समानता और कानूनी दांवपेच कम करने की कवायद की गई है। उनके मुताबिक, मौजूदा टैक्स दरों पर ही प्रभावी तरीके से टैक्स वसूली करते हुए सरकार की कमाई बढ़ेगी। साथ ही आने वाले दिनों तेज होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी इसमें योगदान देंगी। तो चलिए जानते हैं टैक्स से लेकर नौकरियों के सवालों पर वित्त सचिवव अजय भूषण पांडेय ने क्या-क्या कहा।

सवाल: मध्यमवर्ग को टैक्स के मोर्चे पर छूट‌ की उम्मीद थी, लेकिन इस बजट में कोई टैक्स स्लैब नहीं बदला और आम लोगों को किसी भी तरह की छूट नहीं मिली है। ऐसे में वो बजट से अपने लिए ‌क्या फायदा समझें? 
जवाब: लोगों को टैक्स की दरों में स्थिरता चाहिए होती है और वो कानूनी दांवपेच में आसानी चाहते हैं। ऐसे में ‌इस साल के बजट‌ में इन्हीं दोनों चीजों पर फोकस किया गया है। बजट में स्वास्थ्य से जुड़े खर्च को बढ़ाने के जो फैसले लिए गए हैं उससे आम लोगों को भी राहत होगी। ऐसे में हमें समझना होगा कि सिर्फ टैक्स घटाने से ही नहीं, किए जा रहे अतिरिक्त खर्च भी लोगों के लिए फायदेमंद है। बजट की प्रक्रिया में करीब 1.7 करोड़ लोग ही ऐसे होते हैं जो इनकम टैक्स देते हैं। इस बजट‌ में देश की पूरी आबादी के फायदे की व्यवस्था करने की कोशिश हुई है। 
 
सवाल: फिर आपने पीएफ से कमाई पर टैक्स क्यों लगा दिया? 
जवाब:देखिए, कुल करदाताओं में से से 99% की आय 20-25 लाख के नीचे रहती है। ऐसे में वो सभी 2.5 लाख के दायरे में आ जाते हैं और उन पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन इसके उलट अब तक ज्यादा कमाई वाले लोग इस मद‌ में करोड़ों रुपए का निवेश करके पीएफ का 8 फीसदी वाला निश्चित रिटर्न कमाते थे। अब ज्यादा कमाई वाले लोगों को, कम कमाई वाले लोगों के टैक्स के पैसे तो फायदा नहीं दिया जाना चाहिए। यही वजह है कि इस बजट में ये समानता करते हुए लंबे समय से चली आ रही अहम विसंगति दूर करने की कोशिश हुई है।  

सवाल: करदाताओं को राहत देने से जुड़े बजट में क्या-क्या इंतजाम किए जा रहे हैं? 
जवाब: इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमता विस्तार पर जो खर्च किया जाएगा उसका फायदा भी लोगों को ही मिलेगा। लोगों को सिर्फ टैक्स घटाकर ही फायदा नहीं दिया जा सकता है। दूसरे भी माध्यम हैं। सरकार ने प्रीफिल्ड आईटीआर 2 के लिए भी बढ़ाने का फैसला किया है। तकनीक‌ के इस्तेमाल से न सिर्फ बैंक जमा पर ब्याज बल्कि शेयर बाजार, म्युचुअल फंड और डिविडेंड जैसी चीजें भी पहले से फॉर्म में भरी हुई आया करेंगी। इसके फायदा छोटे करदाताओं को होगा। उन्हें रिटर्न की तकनीक मुश्किलें समझने के लिए सीए पर खर्च नहीं करना पड़ेगा। लोग सीधे फॉर्म देख कर रिटर्न दाखिल कर पाएंगे। साथ ही टैक्स चोरी रोकने में भी मदद मिलेगी।  वहीं कॉरपोरेट टैक्स भी देश में सबसे कम है जो निवेश को आकर्षित करेगा जिससे अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा और सभी को फायदा मिलेगा।  
 
सवाल: कस्टम ड्यूटी के स्ट्रक्चर में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी। नई व्यवस्था में आशंका है कि दाम बढ़ जाएंगे। आप क्या कहेंगे? 
जवाब: इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। कई चीजों पर ड्यूटी घटी भी है। कस्टम ड्यूटी में बदलाव के पीछे सरकार की मंशा मौजूदा नियमों को तर्कसंगत बनाना रहा है। सरकार ‌ने कई आइटम्स पर इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर खत्म किया है और कोशिश की है कि भारत ‌में आयात किया जाने वाला कच्चा माल ‌सस्ते दाम पर मिले। हमने जो उपाय किए हैं उससे सरकार की कमाई बढ़ेगी और चोरी घटेगी।  

सवाल: कृषि सेस से भी की सामान महंगा होने की आंशका है। इसे लगाने के पीछे क्या वजह रही?  
जवाब: ये सिर्फ 15-16 कैटेगरी के आइटम में ही लगाया गया है। कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में इसका इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए एक डेडिकेटिड फंड की जरूरत काफी समय से रही है। इसके फंड की निरंतरता भी बनी रहनी चाहिए। कृषि विकास सेस से अगले वित्त वर्ष में 30 हजार करोड़ रुपए इकट्ठा होने का अनुमान है जो सेक्टर के लिए फायदेमंद रहेगा। 

सवाल: आर्थिक हालात को देखते हुए जीएसटी के जरिए कमाई कैसे बढ़ेगी? 
जवाब :सरकार की तरफ से उठाए गए नए कदमों से और तकनीक के इस्तेमाल से कमाई बढ़ी है। ज्यादा कमाई सिर्फ टैक्स की दरें बढ़ाने से नहीं बल्कि मौजूदा दरों पर ही टैक्स कलेक्शन को प्रभावी तरीके से किए जाने से बढ़ती है। पिछले 3-4 महीनों में कमाई बढ़ी भी है। कोरोना महामारी के चलते कमाई पर असर पड़ा है लेकिन अभी तीन महीने के आंकड़े आने बाकी है। हमें उम्मीद है कि बचे महीनों में अच्छी कमाई रहेगी और घाटा बेहद कम हो जाएगा।  

सरकार ने डाटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में पारंपरिक उपायों से आगे बढ़कर तकनीक के इस्तेमाल से इन्हीं दरों पर ज्यादा कमाई होगी। एक से दो तिमाहियों में सरकार ये बताने की हालत में होगी कि नई व्यवस्था में कमाई कितनी बढ़ी है। 

सवाल: राज्यों का घाटा होने पर उन्हें कंपंसेशन किस तरह दिया जाएगा? 
जवाब: खर्च को लेकर किए गए नए उपायों के जरिए कमाई भी बढ़ेगी। इस साल आर्थिक हालात को देखते हुए जिस हिसाब से कंपंसेशन सेस में गैप दिखा वो अगले साल भी कुछ रहेगा लेकिन ये पिछले कुछ महीनों के अनुमान के हिसाब से कम रहेगा। कंपंसेशन के लिए कानूनी व्यवस्था का पालन किया जाएगा और राज्यों को घाटा नहीं होने दिया जाएगा। सेस फंड में जो भी रकम इकट्ठा होगी वो राज्यों को मिलेगी ही। 

सवाल: जीएसटी में दरों के स्ट्रक्चर में भी क्या बदलाव किए जाने हैं? 
जवाब :सरकार की मंशा साफ है कि जीएसटी दरों में स्थिरता रहे। बावजूद इसके कई मोर्चों पर दरों की समीक्षा की जरूरत समय समय पर रहती है। आने वाली एक से दो जीएसटी काउंसिल की बैठकों में इस बारे में विचार विमर्श किया जाना है। पहले भी इस पर चर्चा हुई है लेकिन इसे टाल दिया गया है। वित्तमंत्री ने भी बजट भाषण में भी साफ कहा है कि इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसे मुद्दों को हल करने की जरूरत है।  

सवाल : बैंकों के निजीकरण को लेकर भी यूनियनों का विरोध सामने आने लगा है। ऐसे में विनिवेश के मोर्चे पर चुनौतियों से कैसे निपटेंगे? 
जवाब : हर चीज में विरोध होगा ये सोचकर रुकना सही नहीं होगा। कई कंपनियों को निजीकरण पहले भी हुआ है और वो सफल रहा है। ऐसे में इस तरह की गतिविधियां कर्मचारियों के हित में ही हैं। 

सवाल : नौकरियां कितनी बढ़ेंगी और किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा रहेंगी? 
जवाब : कुल नौकरियों का आंकड़ा बताना मुश्किल है लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य की दिशा में उठाए जा रहे कदमों से इस तरफ ज्यादा मौके आएंगे। सरकार की तरफ से बढ़े खर्च और निजी निवेश के लिए अच्छा माहौल बनाया जाता है तो सभी क्षेत्रों में उसका असर बढ़ेगा। सरकार ने देश में निवेश बढ़ाने वाली नीतियों का ऐलान किया है। नई कंपनियां खुलने से न सिर्फ उस कारोबार में बल्कि उससे जुड़े कई क्षेत्रों में रोजगार के मौके देखे जा सकते हैं। इससे जो बदलाव आएगा वो न सिर्फ नई नौकरियों में बढ़त दिखेगी बल्कि पुरानी नौकरियों की सैलरी भी बढ़ने की पूरी उम्मीद है।  

सवाल : कोरोना की दूसरी लहर को लेकर सरकार का क्या रुख है? क्या इसके निपटने की कोई रणनीति है? 
जवाब: जब हम महामारी के माहौल में हैं तो हमें तैयार रहना चाहिए कि इसकी कई वेव आ सकती हैं लेकिन उसकी तीव्रता में अंतर रहेगा। एक बार जब बीमारी शिखर पर पहुंच कर नीचे आ जाती है तो हमें उसका अंदाजा हो जाता है। ऐसे हालात में हमें अपनी तरफ से एहतियात करते रहना चाहिए।