राजस्थान : शाहबाद जंगल में पावर प्रोजेक्ट रोकने की अपील
एक पर्यावरण संरक्षण संस्था ने सुप्रीम कोर्ट की अरावली कमेटी को पत्र लिखा है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद जंगल में पंपड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए एक लाख से अधिक पेड़ काटने पर रोक लगाई जाए। यह परियोजना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा चिह्नित चीता गलियारे के नजदीक है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट की बनाई अरावली कमेटी को खुला पत्र लिखा है। पत्र में संस्था ने राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद जंगल में ‘पंपड स्टोरेज प्रोजेक्ट’ लगाने के लिए एक लाख से ज्यदा पेड़ काटने पर रोक लगाने की सिफारिश करने को कहा है। इस साल मई में बनी इस कमेटी को अरावली पहाड़ी रेंज की परिभाषा और सीमा तय करने पर केंद्र सरकार की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा करने का काम सौंपा गया है। पत्र में कहा गया है कि ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ की सितंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, बारां की पहाड़ियां और जंगल अरावली पर्वतमाला का हिस्सा हैं।
पत्र में कहा गया कि बारां की शाहबाद तहसील में प्रस्तावित 1,800 मेगावाट के ‘पंप-स्टोरेज पावर प्रोजेक्ट’ को ग्रीनको एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड विकसित करेगी और इसके लिए 400 हेक्टेयर से अधिक वन के भू-उपयोग में बदलाव की जरूरत होगी। पत्र में कहा गया कि यह परियोजना मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान के नजदीक है और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से चिह्नित चीता गलियारे का हिस्सा है। इसमें कहा गया है कि इस वजह से इसके निर्माण से चीते एवं अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही और उनके कल्याण पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।


