स्टार्टअप ने बनाई राष्ट्रीय पहचान,हैंडीक्राफ्ट की विदेशों में डिमांड
झांसी में महिलाओं ने एक स्टार्टअप के जरिए हैंडीक्राफ्ट बनाने की राष्ट्रीय पहचान बनाई है। प्रदेश सरकार प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। हर माह पांच हजार से अधिक हैंडीक्राफ्ट तैयार होते हैं, जिनकी अमेरिका, दुबई और थाईलैंड जैसे देशों में डिमांड है। स्टार्टअप ने बुंदेली लोक कला को प्रमोट किया है।

झांसी। स्टार्टअप के जरिए ग्रामीण महिलाओं ने हैंडीक्राफ्ट बनाए है उनकी राष्ट्रीय पहचान बन चुकी है। प्रदेश सरकार इसके लिए ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही है। बुविवि स्टार्टअप हर माह पांच हजार से अधिक हैंडी क्राफ्ट तैयार कर रहा है। इनकी डिमांड विदेशों अमेरिका दुबई थाईलैंड तक है। स्टार्टअप को बढ़ावा देने प्रदेश सरकार की नीति के तहत संचालित हो रहा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का इनक्यूबेशन सेंटर नवाचारों को प्रोत्साहित करने में काफी मददगार साबित हो रहा।
स्टार्टअप का परिचय
इनक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत स्टार्टअप ''सराहना हैंडीक्राफ्ट ने न सिर्फ बुंदेली लोक कला चितेरी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई बल्कि इस स्टार्टअप द्वारा तैयार किए। हैंडीक्राफ्ट और पेंटिंग की दुनिया के कई देशों में अच्छी खासी डिमांड है।
हैंडीक्राफ्ट निर्माण प्रक्रिया
हैंडीक्राफ्ट से जुड़े सामान तैयार करता है और इस काम में रेजन आर्ट, लिपिन आर्ट, चितेरी आर्ट सहित अन्य आर्ट विधाओं का उपयोग किया जाता है। पेंटिंग सहित घरेलू सजावट के कई तरह के सामान तैयार किए जाते हैं। लगभग पांच हजार पेंटिंग और हैंडीक्राफ्ट हर महीने तैयार किए जाते हैं। स्टार्टअप से प्रत्यक्ष तौर पर पांच मेंबर जुड़े हैं।
महिलाओं का प्रशिक्षण
स्टार्टअप की फाउंडर राशि दुबे ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को इस स्टार्टअप से जोड़ने के मकसद से झांसी के मडोरा गांव में महिलाओं और युवतियों को चितेरी कला और हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण प्रदान किया। महिलाएं क्राफ्ट और पेंटिंग तैयार कर रहीं,झांसी शहर में स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में लगभग 150 बालिकाओं को इस स्टार्टअप के माध्यम से चितेरी कला सिखाई जा रही। तैयार किए गए हैंडीक्राफ्ट और पेंटिंग की अमेरिका, दुबई, थाईलैंड समेत कई देशों में डिमांड है। नियमित रूप से बिक्री लिए इन देशों में भेजे जा रहे हैं।


