जेल से आंगन तक गले लगाया, भाई-बहन का प्यार लहराया
फतेहपुर में रक्षाबंधन पर एक दिल को छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला। जिला जेल में 668 बहनों ने अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इस अवसर पर 225 बच्चों ने भी अपने पिताओं से मुलाकात की। जेल के ठंडे वातावरण में भाई-बहन के प्रेम की गूंज सुनाई दी।

फतेहपुर। रक्षाबंधन पर एक बेहद अनूठी और दिल को छू लेने वाली तस्वीर देखने को मिली। शहर के गुलजार बाजारों में जहां एक तरफ बहनों की चहल-पहल और खरीददारी का उल्लास था, वहीं दूसरी तरफ जिला जेल में भी यह त्योहार उतने ही स्नेह के साथ मनाया गया। जेल प्रशासन की विशेष व्यवस्था के बीच 668 बहनों ने सलाखों के पीछे बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान 225 मासूम बच्चों ने भी अपने बंदियों पिताओं से मुलाकात की। जेल की ठंडी सलाखों के पीछे जब बहनों ने भाइयों को गले लगाया, तो वहां का माहौल पूरी तरह से भावुक हो गया और शहर से लेकर कारागार तक सिर्फ भाई-बहन के अटूट प्रेम की ही गूंज सुनाई दी।
रक्षाबंधन की तैयारियां
श्रावण पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले रक्षाबंधन त्योहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा। त्योहार को लेकर बहनों ने पहले से ही तैयारियां कर ली थीं। गुरुवार को पूरे दिन बहनों ने मेहंदी लगवाई और शुक्रवार को नए वस्त्र धारण कर सज-धजकर भाइयों को राखी बांधी। जो बहनें इस त्योहार पर घर नहीं आ सकीं, उन्होंने भाइयों के लिए रक्षासूत्र भेजे। इन रक्षासूत्रों को या तो किसी ब्राह्मण ने या परिवार की किसी अन्य कन्या ने भाइयों की कलाई पर बांधा। रक्षाबंधन के त्योहार का सबसे अधिक लुत्फ बच्चों ने उठाया। बच्चों में सुबह से ही राखी बंधवाने की ललक रही। जब बहनों ने अपने छोटे भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर राखी बांधी तो वे खुशी से झूम उठे। सुबह से शाम तक राखी बांधने का सिलसिला चलता रहा। अधिकांश बहनें अपने भाइयों के घर पहुंचीं और राखी बांधी, जबकि कुछ बहनों के नहीं पहुंच पाने पर भाई खुद बहनों के घर गए और रक्षासूत्र बंधवाया। रक्षाबंधन का त्योहार मनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने अपने पति की आयु बढ़ाने और उनकी रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था।
जिला कारागार में रक्षाबंधन
जिला कारागार में भी रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कारागार प्रशासन की ओर से मुलाकातियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। कारागार में निरुद्ध 452 बंदियों को 668 बहनें राखी बांधने पहुंचीं। उनके साथ 225 बच्चे भी आए। सभी बहनों ने अपने भाइयों को तिलक लगाकर राखी बांधी और उनका मुंह मीठा कराया। जेल प्रशासन की ओर से तिलक सामग्री, राखी और मिष्ठान नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया। कारागार की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में जेल कर्मियों के अतिरिक्त जिला पुलिस का भी सराहनीय योगदान रहा।
त्योहार की खुशियां
खूब बिकी मिठाइयां, दुकानों पर रही भीड़ रक्षाबंधन के त्योहार पर राखी बांधने के बाद भाइयों का मुंह मीठा कराने की भी परंपरा है। गुरुवार देर रात से लेकर शुक्रवार तक मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ रही। रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही मिठाई की दुकानें सज गई थीं। मिठाई विक्रेताओं ने डायबिटीज के मरीजों के लिए शुगर-फ्री मिठाइयां भी तैयार की थीं। इनकी भी खूब बिक्री हुई।


