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सिकुड़ते जंगलों और इंसानों के बढ़ते दखल से हमलावर हो रहे हाथी

हाथी के हमले के बाद हाईवे पर लगा जाम

सिकुड़ते जंगलों और इंसानों के बढ़ते दखल से निपटने लिए हाथी हमलावर रुख अपनाने के साथ-साथ अपने व्यवहार और सामाजिक जीवन में भी बदलाव ला रहे हैं। 

इंसानी बस्तियों के पास रहने वाले हाथी पहले की तुलना में अब ज्यादा बड़े झुंड में रह रहे हैं। इसमें हथिनी की बजाय उन युवा हाथियों को शामिल किया जा रहा है, जिन्हें पहले सिर्फ अपनी मां के साथ रहने की इजाजत थी। विशेषज्ञों की मानें तो हाथियों के आक्रामक होने के पीछे की एक वजह यह भी है। 

‘साइंटिफिक रिपोर्ट’ नामक जर्नल में प्रकाशित एशियाई हाथियों पर आधारित एक अध्ययन के मुताबिक इंसानी बस्तियों के पास रहने वाले हाथियों के लिए कुछ चीजें खासतौर पर चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। जंगलों की जगह खेतों ने ले ली है। ऐसे में हाथियों को भरपेट खाना मिलना मुश्किल हो गया है और वो खेतों का रुख करने लगे हैं। मगर इसमें जान को जोखिम रहता है। 

यह अध्ययन दक्षिण भारत के हाथियों के व्यवहार पर किया गया। वन्यजीव विशेषज्ञ निशांत श्रीनिवास के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के मुताबिक बढ़ते जोखिम की वजह से बुजुर्ग हाथियों ने युवाओं को अपने साथ रखना शुरू कर दिया है। 

युवा हाथी का नेतृत्व 

हाथियों के बढ़ते हमलों की एक वजह से झुंड में युवा हाथियों की बढ़ती संख्या मानी जा रही है। वयस्क हाथी और हथिनी की तुलना में युवा हाथी ज्यादा आक्रामक होते हैं। युवा हाथियों को भूख भी ज्यादा लगती है।   

जरूरत ज्यादा जंगल कम 

बीते 32 साल से बिना कोई छुट्टी लिए हाथियों का इलाज करने में जुटे डॉ. कुशल कंवर सरमा ने कहा कि हाथियों के आक्रामक होने के पीछे हम इंसान ही हैं। ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘जंगल खत्म हो रहे हैं। उनकी गुणवत्ता खत्म हो रही है। हाथियों की जरूरत ज्यादा, जंगल कम हो रहे हैं।’

शराब के शौक से भी टकराव 

डॉ.कुशल कंवर सरमा ने कहा कि हाथी को शराब बहुत पसंद होती है और वो दूर से इसकी गंध सूंघ सकते हैं। ऐसे में घरों, पर्यटन स्थलों पर रखी शराब उन्हें आकर्षित करती है। 

जिम कॉर्बेट में बाघ से दोगुने हो सकते हैं हिंसक हाथी 

हल्द्वानी। जिम कॉर्बेट पार्क और इससे सटे जंगलों में बाघों की संख्या अधिक है। लेकिन पांच साल में बाघो के हमलों के मुकाबले हाथियों के हमले की संख्या दोगुनी थी। पांच साल में बाघों ने 15 जानलेवा हमले किए जबकि हाथियों ने इंसानों को 34 पर निशाना बनाया। कॉर्बेट पार्क के दो गश्त कर्मचारियों सहित तीन लोगों को हाथी ने पटककर मार डाला है। जंगलों में हाथियों  हिंसक व्यवहार से वन विभाग के अधिकारी हैरत में है। हाल में हाथियों और बाघों के संघर्ष के मामले भी सामने आए हैं। 

टाइगर रिजर्व में छोड़ते ही हाथियों ने मचाया उत्पात

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चार जिलों में आतंक का पर्याय बने दोनों हाथियों को रामपुर में ट्रैंक्युलाइज कर पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा गया। यहां पहुंचते ही दोनों हाथी फिर से रास्ता भटक गए। एक हाथी शारदा सागर डैम की तलहटी से होते हुए चूका स्पाट पहुंचकर तार र्फेंंसग तोड़ने के साथ बंबू हट क्षतिग्रस्त कर दिया। (हि.सं.)

इंसानी हस्तक्षेप से बदल रही हैं आदतें 

1. गलियारा बंद
हाथियों की याददाश्त बहुत तेज होती है। बुजुर्ग हाथी युवा हाथियों को एक जंगल से दूसरे जंगल के रास्तों की जानकारी देते हैं। लेकिन इंसान कई रास्तों में बस गया है और प्राकृतिक कॉरिडोर बंद हो गए हैं। झारखंड के दलमा वन्यजीव अभयारण्य में 12 कॉरिडोर में कई बंद हैं। 

2. जंगल घटे
जंगल पर आबादी का अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। जंगलों की अवैध रूप से कटाई की जा रही है। कई जंगलों के बीच में इंसानी आबादी बसी है। ऐसे में घने और बड़े जंगलों लगातार घटते जा रहे हैं। ऐसे में हाथियों की अपनी भूख मिटाने इंसानी आबादी के पास आना पड़ता है। 

3. पर्यटन से तनाव
जंगलों में जाकर वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास में देखने का कारोबार तेजी से हो रहा है। इंसानी आबादी के पहुंचने से हाथी सहित अन्य जानवर तनाव महसूस करते हैं। सेल्फी लेने के चक्कर में कई पर्यटक नजदीक पहुंच जाते हैं जिससे वे असहज हो जाते हैं। 

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  • Web Title:Elephants attacking due to shrinking forests