प्रबन्धन की गलत नीतियों से 02 माह में 36 संविदा कर्मियों की मौत
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का यूपीपीसीएल प्रबन्ध पर आरोप एल प्रबन्ध पर आरोप दमनात्मक-शोषणकारी नीतियों में तत्काल

अनपरा,संवाददाता। प्रदेश में बिजली की मांग में रिकार्ड इजाफे से संविदा कर्मियों पर असहनीय कार्यभार डाल दिया गया है। पिछले लगभग दो माह में बिजली व्यवस्था बनाए रखने की जद्दोजहद में लगभग 36 संविदा कर्मियों की दुर्घटनाओं में मृत्य होना अत्यंत गंभीर हालात है। दुर्घटनाओं के पीछे केवल तकनीकी कारण नहीं, बल्कि पावर कॉरपोरेशन शीर्ष प्रबंधन की गलत नीतियां जिम्मेदार है।
संविदा कर्मियों की समस्याएं
रविवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने यूपीपीसीएल प्रबन्ध पर आरोप लगाते हुए चेताया कि यदि प्रबंधन ने अपनी मनमानी, दमनात्मक एवं शोषणकारी नीतियों में तत्काल सुधार नहीं किया और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन शीर्ष प्रबंधन की होगी। आरोप लगाया कि निजीकरण और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की गई है जो आज भी जारी है। जहां पहले किसी फॉल्ट पर चार कर्मचारियों की गैंग कार्य करती थी, वहीं अब एक संविदा कर्मी को पूरे गैंग का कार्य करने के लिए भेजा जा रहा है। बढ़ती बिजली मांग के बीच यह व्यवस्था संविदा कर्मियों के जीवन के साथ खिलवाड़ है और दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि न्यूनतम वेतन की बात तो दूर, मुख्यमंत्री द्वारा घोषित रु 18,000 प्रतिमाह भुगतान भी अधिकांश संविदा कर्मियों को नहीं मिल रहा है। संघर्ष समिति ने मार्च 2023 से अब तक हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लेने। संविदा कर्मियों को आउटसोर्स निगम के दायरे में लाने ,18,000 प्रतिमाह सहित सभी वैधानिक सुविधाएं बहाल करने समेत संयुक्त संघर्ष समिति के साथ तत्काल वार्ता कर समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।


