रजौली के सात गांवों के ग्रामीणों को आज भी बिजली का है इंतजार
एक तरफ देश आजादी का 80वां वर्षगांठ मना रहा है। दूसरी तरफ हरदिया पंचायत के सात गांवों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है। ग्रामीणों ने कई बार आवेदन दिए हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। उन्हें सुबह से रात तक अंधेरे में रहना पड़ता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

एक तरफ देश आजादी का 80वां वर्षगांठ मना रहा है। शहरों से लेकर गांवों तक विकास की नई तस्वीरें दिखाई जा रही हैं। दूसरी तरफ जिले का एक ऐसा पंचायत भी है, जहां के सात गांवों में आज तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंची है। प्रखंड अंतर्गत हरदिया पंचायत के पिपरा, परतौनिया, चोरडीहा, झराही, नावाडीह, जमुनदाहा और कोसदरिया गांव के लोग आज भी पीढ़ियों से अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
बिजली के लिए ग्रामीणों की पीड़ा
यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज भी बिजली आने का इंतजार करते-करते दुनिया से चले गए, लेकिन गांव की किस्मत नहीं बदली। शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। बिजली नहीं होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है, जिससे बच्चों को पढ़ाई करने में भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब दूसरे गांवों के बच्चे बिजली की रोशनी में पढ़ते हैं, तो उनके बच्चे ढिबरी और टॉर्च की सीमित रोशनी में भविष्य तलाशते हैं। रात में कीड़े-मकोड़े, सांप-बिच्छू का खतरा अलग बना रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि अब तो मिट्टी तेल भी आसानी से नहीं मिलता।
आवेदन और आश्वासन का सिलसिला
कई बार दिया आवेदन, फिर भी नहीं मिली सुविधा ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के लिए वर्षों से आवेदन पर आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। ग्रामीणों के पास हजारों आवेदनों की रसीदें मौजूद हैं। एक बार बिजली विभाग ने दो खंभे भी लगाए थे, लेकिन उसके बाद काम आगे नहीं बढ़ा। अपनी पीड़ा को लेकर हाल ही में ग्रामीण जनसुनवाई में डीएम से भी मिले और जल्द से जल्द गांव में बिजली पहुंचाने की गुहार लगाई। गांव के एक बुजुर्ग ने बताया, हमने बिजली के बारे में बहुत सुना है, लेकिन हमारी पूरी उम्र गुजर गई, हमने गांव में उसकी रोशनी नहीं देखी। हमारे पूर्वज भी इसी इंतजार में चले गए। ग्रामीणों के लिए बिजली सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि बेहतर जिंदगी का सपना है। सवाल उठता है कि सरकार के हर घर बिजली योजना के दावों के बीच आखिर इन सात गांवों तक रोशनी कब पहुंचेगी? फिलहाल इन गांवों के लोग उम्मीद और इंतजार के सहारे आने वाले उजाले की राह देख रहे हैं। (रजौली से राजेश कुमार)


