नए पावर सब-स्टेशन से बदल जाएगी तस्वीर

हिन्दुस्तान, सीतामढ़ी
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सीतामढ़ी जिले में बिजली की बढ़ती मांग के बीच, नए पावर सब-स्टेशन और उच्चदाब विद्युत लाइनों का निर्माण किया जा रहा है। बिजली विभाग का मानना है कि इन परियोजनाओं से छह लाख उपभोक्ताओं को अधिक भरोसेमंद बिजली मिलेगी, जिससे कृषि, उद्योग और शिक्षा संस्थानों को भी लाभ होगा।

नए पावर सब-स्टेशन से बदल जाएगी तस्वीर

सीतामढ़ी। जिले में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग के बीच वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर काम शुरू किया गया है। बिजली विभाग जिले में आधा दर्जन से अधिक नए पावर सब-स्टेशन, नई उच्चदाब विद्युत लाइन और वितरण नेटवर्क विस्तार की योजना पर काम कर रहा है। विभाग का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद करीब छह लाख बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर और अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। इससे ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर, बार-बार ट्रिपिंग, लो वोल्टेज और लोकल फॉल्ट की समस्या में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान बिजली की अधिकतम मांग 200 मेगावाट से बढ़कर 225 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। घरेलू कनेक्शनों में वृद्धि, गर्मी के दौरान एसी और कूलर का बढ़ता उपयोग, सिंचाई के लिए मोटरों का संचालन तथा छोटे उद्योगों के विस्तार से बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। इसके मुकाबले कई क्षेत्रों में पुराने वितरण नेटवर्क और सीमित क्षमता वाले पावर सब-स्टेशन पर दबाव बढ़ने से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती को देखते हुए विभाग रुन्नीसैदपुर, गाढ़ा,पितौंझिया, मेजरगंज, नानपुर,भटियाही, बाजपट्टी समेत आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर नए पावर सब-स्टेशन का निर्माण करा रहा है। इसके साथ नई उच्चदाब विद्युत लाइनें बिछाई जा रही हैं और फीडरों का पुनर्गठन भी किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि नए सब-स्टेशन चालू होने के बाद लंबी दूरी से बिजली आपूर्ति की आवश्यकता कम होगी, जिससे लाइन लॉस घटेगा और फॉल्ट की संख्या में भी कमी आएगी。

जिले में 26 पावर सब-स्टेशन संचालित

वर्तमान में जिले में 26 पावर सब-स्टेशन संचालित हैं और सिमरा, सुरसंड, रुन्नीसैदपुर, बेलसंड तथा ढाका ग्रिड से बिजली आपूर्ति की जाती है। बढ़ती आबादी और नए कनेक्शनों के कारण कई सब-स्टेशनों पर क्षमता से अधिक लोड पहुंच गया है।

स्थिर बिजली मिलने से खेती-किसानी व उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

इसका असर शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है, जहां ओवरलोड के कारण बार-बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की शिकायतें सामने आती हैं। खेती-किसानी पर भी इन परियोजनाओं का सीधा असर पड़ेगा। धान रोपनी, सिंचाई, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज, आटा चक्की, वेल्डिंग और अन्य छोटे उद्योगों को अधिक स्थिर बिजली मिलने से उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। वहीं अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, कॉलेजों और डिजिटल शिक्षा संस्थानों में भी निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नए सब-स्टेशन बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इनके साथ समय पर ट्रांसमिशन लाइन, फीडर, ट्रांसफॉर्मर क्षमता वृद्धि, नियमित रखरखाव और त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि सभी परियोजनाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं तो जिले की बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव है और करीब छह लाख उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।

नई परियोजनाओं से मिलेगी गति

बिजली विभाग का कहना है कि नई परियोजनाओं के तहत पुराने उपकरणों के स्थान पर अधिक क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त फीडर भी बनाए जाएंगे। साथ ही जर्जर तारों को बदलने और वितरण नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण की नई योजना भी तैयार की जा रही है। इससे बारिश और तेज हवा के दौरान होने वाले फॉल्ट में भी कमी आने की संभावना है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोकल फॉल्ट ठीक होने में अपेक्षा से अधिक समय लग जाता है। विभाग का दावा है कि शहरी क्षेत्र में खराब ट्रांसफॉर्मर 24 घंटे के भीतर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में दो से तीन दिनों के भीतर बदल दिए जाते हैं, लेकिन कई बार सामग्री और तकनीकी कारणों से इसमें विलंब भी होता है। नए सब-स्टेशन और अतिरिक्त फीडर बनने के बाद वैकल्पिक आपूर्ति की सुविधा बढ़ेगी, जिससे लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की स्थिति कम होगी।

सामान्य प्रश्न

बिजली विभाग कितने नए पावर सब-स्टेशन का निर्माण कर रहा है?
बिजली विभाग आधा दर्जन से अधिक नए पावर सब-स्टेशन का निर्माण कर रहा है।
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