चार महानगरों में डिलीवरी के लिए इस्तेमाल ईवी सलाना रोक रहे है 5 लाख टन जहरीली गैस
देश के प्रमुख शहरों में ईवी डिलीवरी सेक्टर में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनसे 3.25 लाख ईवी सालाना 5 लाख टन से अधिक कार्बन गैस को रोक रहे हैं। नीति आयोग के अध्ययन के अनुसार, डिलीवरी क्षेत्र में ईवी की संख्या 300 फीसदी बढ़ी है। सरकार का 2030 तक 1.1 करोड़ वाणिज्यिक ईवी का लक्ष्य है।

नई दिल्ली, अरविंद सिंह। देश के प्रमुख शहरों में डिलीवरी के लिए इस्तेमाल हो रहे इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) जहरीली हवा के खिलाफ जंग में अहम भूमिका निभा रहे। चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई की हवा में 3.25 लाख से अधिक ईवी सालाना पांच लाख टन से ज्यादा कार्बन गैस को हवा में घुलने से रोक रहे। केंद्र सरकार के डिजिटल शून्यता डैशबोर्ड के ताजा आंकड़ों से ये खुलासा हुआ है। नीति आयोग ने चार महानगरों का अध्ययन किया गया है। डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन साल में डिलीवरी क्षेत्र में ईवी की संख्या में 300 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शहरी आबो-हवा में आए इस क्रांतिकारी बदलाव को देखते हुए भारत सरकार और नीति आयोग ने अब इसका दायरा पूरे देश में बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश की सड़कों पर 1.1 करोड़ से अधिक वाणिज्यिक ईवी उतारने का है, जो मिलकर 1,500 अरब विद्युतीकृत किलोमीटर तय करेंगे। इससे न केवल वायु प्रदूषण में भारी गिरावट आएगी, बल्कि विदेशी तेल पर देश की निर्भरता भी कम होगी。
प्रदूषण नियंत्रण की तस्वीर तेजी से बदली
अधिकारी ने बताया कि नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) द्वारा संचालित शून्य अभियान के तहत शुरू हुए इस डैशबोर्ड के आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि वाणिज्यिक डिलीवरी क्षेत्र में हरित क्रांति की गति अभूतपूर्व है। घर-घर सामान पहुंचाने में जुटी कंपनियां तेजी के साथ शून्य उत्सर्जन की तरफ बढ़ रही है। इससे शहरों में प्रदूषण नियंत्रण की तस्वीर तेजी से बदल रही है।
एक हजार करोड़ के ईंधन की बचत
डैशबोर्ड पर 225 से अधिक कंपनियों जोमैटो, स्विगी, अमेजन, फ्लिपकार्ट) का डेटा रियल-टाइम में दर्ज हो रहा। डिलीवरी क्षेत्र में ईवी के इस्तेमाल से अब तक एक हजार करोड़ से अधिक के पेट्रोल और डीजल की बचत हुई है। पारंपरिक वाहनों की तुलना में ईवी चलाने का खर्च 70 फीसदी तक कम आता है और रखरखाव खर्च भी 40 फीसदी कम होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों के मुनाफे का अंतर 15 से 25 फीसदी तक बढ़ा है।
डिजिटल डैशबोर्ड से अतिरिक्त कमाई
डैशबोर्ड के जरिए डिलीवरी कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व भी मिल रहा। डैशबोर्ड पर दर्ज ईवी के किलोमीटर और कार्बन बचत का डेटा 100 फीसदी प्रमाणित होता है। एक टन कार्बन उत्सर्जन बचाने पर एक कार्बन क्रेडिट मिलता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक कार्बन क्रेडिट की कीमत 1,200 से 2,500 रुपये है। इस आधार पर केवल इन 4 महानगरों की कंपनियां हर साल कार्बन क्रेडिट बेचकर 60 से 125 करोड़ तक की अतिरिक्त कमाई कर सकती हैं।
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