धीमी चाल और किराया ज्यादा होने पर लखनऊ में डबलडेकर बस बंद
कमता से अयोध्या के बीच चलने वाली इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा एक साल में तीसरी बार बंद हो गई है। धीमी गति और अधिक किराये के कारण यात्रियों की कमी हुई है। तीन बसें गोरखपुर, दो नोएडा और एक प्रयागराज भेजी गई हैं। परिवहन निगम नए मार्गों पर विचार कर रहा है।

कमता स्थित अवध बस स्टेशन से अयोध्या (लता मंगेशकर चौक) के बीच चलने वाली इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा एक साल में तीसरी बार बंद हो गई। धीमी रफ्तार और अधिक किराये के चलते यात्रियों से रिस्पॉन्स न मिलने के कारण बस का परिचालन खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा था। यात्रियों की कमी को देखते हुए लखनऊ परिक्षेत्र को एक वर्ष पहले मिलीं 8 डबल डेकर बसों में से तीन बसें गोरखपुर, दो नोएडा और एक प्रयागराज स्थानांतरित कर दी गई हैं, जबकि दो बसें बैटरी व चार्जिंग की समस्या के कारण लखनऊ में ही खड़ी हैं।
इसलिए असफल हुई डबल डेकर सेवा
कम रफ्तार: डबल डेकर बसों की अधिकतम गति (स्पीड लिमिट) 50 किमी प्रति घंटा तय की गई थी। इसके कारण लखनऊ से अयोध्या पहुंचने में 3 से 4 घंटे लग रहे थे, जबकि शुरुआत में डेमो बस की स्पीड 80 किमी प्रति घंटा बताई गई थी।
अधिक किराया: अन्य सार्वजनिक व निजी साधनों की तुलना में इसका किराया ज्यादा था।
यात्री लोड फैक्टर में गिरावट: करीब ढाई करोड़ की लागत वाली डबलडेकर बस का संचालन शुरू होने पर रोजाना करीब ₹20,000 आय की उम्मीद थी, लेकिन यह सिमटकर महज ₹8,000 रह गई। प्रति ट्रिप ₹4,000 से ₹5,000 का परिचालन खर्च आने के कारण सेवा घाटे में चली गई।
रायबरेली और हरदोई रोड पर चलाने की तैयारी
अयोध्या रूट पर सेवा ठप होने के बाद परिवहन निगम अधिकारी रायबरेली, हरदोई और सीतापुर जैसे वैकल्पिक रूटों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इन स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन न होना एक बड़ी चुनौती है। कानपुर में चार्जिंग है, लेकिन बस को आलमबाग बस अड्डे तक नहीं लाया जा सकता।
कमता से अन्य बसों का किराया और समय
-डबलडेकर से तीन से चार घंटा, किराया 230 रुपये
-रोडवेज बस से अयोध्या ढाई घंटा, किराया 212 रुपये
-प्राइवेट टैक्सी से अयोध्या पौने दो घंटा, किराया 200
-प्राइवेट बस से अयोध्या दो घंटा, किराया 150 रुपये
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बस की प्रमुख विशेषताएं
दो मंजिला वातानुकूलित (एसी) बैठने की व्यवस्था
सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन
पर्यावरण अनुकूल (शून्य प्रदूषण) ई-बस
वर्जन
लखनऊ में डबल डेकर बसों का पैसेंजर लोड फैक्टर काफी कम रहा, जबकि गोरखपुर में चल रही दो बसों का लोड फैक्टर 50% तक है। लखनऊ की शेष बसों के बेहतर उपयोग के लिए नए मार्गों का आकलन किया जा रहा है। जल्द ही इन्हें नए रूटों पर संचालित किया जाएगा।
विमल राजन, क्षेत्रीय प्रबंधक
परिवहन निगम लखनऊ क्षेत्र


