हिन्दुस्तान विशेष: ईवीएम को आधार से जोड़ने की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी का इंतजार
राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम के विरोध के इतर चुनाव आयोग भविष्य की नई तकनीकों पर सोच रहा है। इसी कड़ी में ईवीएम में तकनीकी सुधार करके उसमें ‘आधार’ प्रमाणीकरण की सुविधा भी डाली जा सकती है।...

राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम के विरोध के इतर चुनाव आयोग भविष्य की नई तकनीकों पर सोच रहा है। इसी कड़ी में ईवीएम में तकनीकी सुधार करके उसमें ‘आधार’ प्रमाणीकरण की सुविधा भी डाली जा सकती है। इससे मतदाता की पहचान का झंझट खत्म हो जाएगा और ‘आधार’ प्रमाणीकरण से ही वह वोट डाल सकेगा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि ‘आधार’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है। हम उसका इंतजार कर रहे हैं। यदि हरी झंडी मिलती है तो हम उसके बाद मतदाता सूची को ‘आधार’ से जोड़ने के कार्य को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही ईवीएम में तकनीकी सुधार करके उसमें ‘आधार’ को भी समायोजित कर सकते हैं। आजतक रोज तकनीक में नई-नई चीजें हो रही हैं।
रावत ने कहा कि इससे फायदा यह है कि मतदाता को अपनी पहचान साबित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब मतदान होता है तो इस प्रक्रिया में काफी लोग लगे रहते हैं। नई तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया आसान होगी। दूसरे, मतदान प्रक्रिया में समय भी कम लगेगा।
चुनाव आयोग ने पूर्व में मतदाता सूचियों को ‘आधार’ से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। करीब 30 करोड़ मतदाताओं ने ‘आधार’ को मतदाता सूची से लिंक भी करा लिया था। लेकिन इसके बाद एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। तब से यह कार्य लंबित है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बाकायदा अर्जी दी है कि ‘आधार’ को मतदाता सूची से लिंक करने की अनुमति प्रदान की जाए।
- देश में कुल 87 करोड़ मतदाता हैं
- आधार नंबर करीब 121 करोड़ हैं
- 99 फीसदी वयस्क आबादी के पास आधार है।
-आधार कानून के अनुसार यदि किसी के पास आधार नहीं है तो उसे किसी सेवा को लेने के लिए अन्य विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। उसे वंचित नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था यदि लागू होती है तो भी बिना आधार वाले लोग पूर्व की व्यवस्था से वोट डाल सकते हैं।




