DA Image
हिंदी न्यूज़ › देश › पाक चुनाव की निगरानी से भारत ने कर दिया था इनकार- चुनाव आयोग
देश

पाक चुनाव की निगरानी से भारत ने कर दिया था इनकार- चुनाव आयोग

श्याम सुमन ,नई दिल्ली Published By: Mohan
Sun, 12 Aug 2018 06:35 AM
पाक चुनाव की निगरानी से भारत ने कर दिया था इनकार- चुनाव आयोग

पाकिस्तान के संभावित प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ संबंधों को मजबूत करेंगे। लेकिन भारत ने पाकिस्तान में पिछले माह हुए आम चुनाव की निगरानी करने के लिए प्रेक्षक भेजने से मना कर दिया था, जिसमें इमरान ने विजय हासिल की है। पाकिस्तान सरकार ने प्रेक्षक भेजने के लिए भारत सरकार से औपचारिक रूप से आग्रह किया था। 

भारत सरकार ने मैक्सिको और वेनेजुएला में हुए चुनावों में भी अपना प्रेक्षक दल भेजने इनकार कर दिया था। दक्षिण एशियाई, मध्य पूर्वी, दक्षिण अमेरिकी और अफ्रीकी देशों में भारतीय निर्वाचन आयोग की बड़ी साख है। निर्वाचन आयोग कई अफ्रीक्री देशों में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की आपूर्ति भी करता है। हालांकि ये ईवीएम भारत में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम से बिल्कुल अलग होती हैं। इनका सोर्सकोड भी उस देश के हिसाब से तैयार किया जाता है। इन देशों में होने वाले चुनावों में निर्वाचन आयोग के अधिकारी नियमित रूप से प्रेक्षक के रूप में जाते रहते हैं।

भारतीय निर्वाचन आयोग के उच्चस्तरीय सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने आम चुनाव में प्रेक्षक दल भेजने का आग्रह किया था, लेकिन इसके लिए जब विदेश मंत्रालय से अनुमति मांगी गई तो वह नहीं मिली। उन्होंने कहा, इसके पीछे क्या वजह थी यह नहीं पता लगा। शायद सीमा पर तनाव को देखते हुए आयोग को यह अनुमति नहीं दी गई। हालांकि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी पाकिस्तान के चुनाव में निजी प्रेक्षक के तौर पर गए थे। उन्होंने चुनाव को बहुत ही निष्पक्ष बताया था। 

इमरान खान से मिले भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया, गिफ्ट में दिया इंडियन बैट

मैक्सिको और वेनेजुएला से भी मिले थे ऐसे आवेदन 
यह पूछे जाने पर कि कुरैशी के बयान को आयोग कैसे देखता है, सूत्रों ने कहा कि वह निजी प्रेक्षक के तौर पर गए थे। उन्हें भारत सरकार की ओर से नहीं भेजा गया था। पाकिस्तान के चुनाव के बारे में उनकी राय निजी है। आयोग के सूत्रों ने कहा, ऐसे ही दो आवेदन दक्षिण अमेरिकी देश मैक्सिको और वेनेजुएला से मिले थे। इन देशों में भी पिछले माह चुनाव हुए हैं। लेकिन अमेरिका से इन देशों के रिश्तों को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने इन देशों में प्रेक्षक भेजने की अनुमति नहीं दी। अमेरिका नहीं चाहता कि यहां कम्युनिस्टों की सरकार बने, लेकिन दोनों देशों में कम्युनिस्टों ने प्रचंड बहुमत से जीतकर सरकारें बनाई हैं। 

पाकिस्तान की 15वीं संसद का पहला सत्र सोमवार से, पहले दिन सांसद लेंगे शपथ 

संबंधित खबरें