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CM पद तो मिला पर कद बनाना आसान नहीं, कैसे एकनाथ शिंदे का ताज कांटों भरा

इस रास्ते पर चलते हुए उन्हें कदम-कदम पर तमाम तरह के इम्तिहान से गुजरना पड़ सकता है। असल में भाजपा ने शिंदे को सीएम की गद्दी उनके पास मौजूद संख्याबल के आधार पर नहीं, बल्कि रणनीतिक चाल के तहत दी है।

CM पद तो मिला पर कद बनाना आसान नहीं, कैसे एकनाथ शिंदे का ताज कांटों भरा
Deepakलाइव हिंदुस्तान,मुंबईFri, 01 Jul 2022 08:09 PM

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महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री का पद तो मिल गया है, लेकिन अब उनके सामने चुनौती कद बनाने की होगी। सीएम की कुर्सी के साथ उनके सिर पर कांटों भरा ताज भी सजा हुआ है। इस रास्ते पर चलते हुए उन्हें कदम-कदम पर तमाम तरह के इम्तिहान से गुजरना पड़ सकता है। असल में भाजपा ने शिंदे को सीएम की गद्दी उनके पास मौजूद संख्याबल के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी रणनीतिक चाल के तहत दी है। आइए जानते हैं कि सीएम शिंदे के सामने की पांच बड़ी चुनौतियां क्या होंगी?

1. खुद को असली शिवसेना साबित करना
एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत करके महाविकास अघाड़ी की सरकार अस्थिर की। शिवसेना के बागी विधायक गुवाहाटी में डेरा डाले रहे। काफी दिनों तक चले सियासी ड्रामे के बाद आखिर भाजपा ने शिवसेना के बागी विधायकों के साथ मिलकर सरकार बना ली। इसके बाद चौंकाने वाले फैसले के तहत शिंदे को सीएम पद भी दे दिया। शिंदे ने सीएम पद की शपथ लेते हुए शिवसेना के संस्थापक बालासाहब ठाकरे और अपने राजनैतिक गुरू आनंद दिघे का नाम लिया। माना जा रहा है कि इस कदम से उन्होंने खुद को असली शिवसेना साबित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनके पास शिवसेना के विधायक भी बड़ी संख्या में हैं। इसके बावजूद क्या वह ठाकरे परिवार की विरासत को चुनौती दे पाएंगे यह देखने वाली बात होगी।

2. कैडर को अपना बनाना
भले ही आज उद्धव ठाकरे से ज्यादा शिवसेना विधायक शिंदे के पास हों, लेकिन आम शिवसैनिकों के दिल में जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं होगा। इसका उदाहरण हाल ही में देखने को मिला था, जब शिवसेना विधायकों के बागी होने के बाद महाराष्ट्र में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान कई जगहों पर शिवसेना विधायकों के कार्यालयों में तोड़-फोड़ की गई थी। वहीं उनके पोस्टर भी फाड़े गए थे। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वक्त में शिंदे कैसे खुद को आम शिवसैनिकों के बीच पॉपुलर फेस के तौर पर स्थापित कर पाते हैं।

3. भाजपा के साथ अच्छे रिश्ते
बतौर मुख्यमंत्री सरकार चलाने के साथ-साथ शिंदे को भाजपा को तालमेल का भी खास ख्याल रखना होगा। असल में इस बार महाराष्ट्र में भाजपा किंगमेकर की भूमिका में है। ऐसे में भले ही शिंदे ने उद्धव ठाकरे की गणित गड़बड़ा दी है, लेकिन आगे के लिए उनका रास्ता बेहद कठिन होगा। खासतौर पर यह देखते हुए कि उनके साथ बतौर डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस होंगे जो बेहद तेज-तर्रार माने जाते हैं। ऐसे में जरा सी भी चूक से न सिर्फ उनकी सीएम की कुर्सी जाएगी, बल्कि भाजपा के साथ रिश्ते भी खराब होंगे।

4. अच्छा सीएम साबित होना
शिंदे को महाराष्ट्र में तमाम समीकरणों को साधकर चलना होगा। उन्हें खुद को प्रदेश के लिए एक अच्छा मुख्यमंत्री साबित करके दिखाना होगा। उद्धव ठाकरे ने ढाई साल के भीतर ही कुछ मामलों में मिसाल कायम की है। ऐसे में शिंदे को दिखाना होगा कि वह कितना और बेहतर कर सकते हैं। इसके अलावा उनके सामने यह भी चैलेंज होगा कि कहीं विपक्ष उनके ऊपर कठपुतली सीएम होने का आरोप न लगाए।

5. भविष्य के चुनाव के लिए खुद को तैयार करना
सरकार और प्रशासन को साधने के साथ शिंदे को यह भी ध्यान रखना होगा कि भविष्य में कई महत्वपूर्ण चुनाव आने वाले हैं। इनमें सबसे पहले तो उनके सामने बीएमसी चुनाव की चुनौती होगी। इसके अलावा 2024 में लोकसभा चुनाव भी हैं। यह सब बीतते-बीतते महाराष्ट्र के अगले विधानसभा चुनाव आ जाएंगे। यहां न शिंदे की इमेज और आगे का भविष्य सबकुछ दांव पर लोगा होगा। यहां शिंदे को खुद को नए सिरे से साबित करना होगा। 

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