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'तितली’ से तबाही : चक्रवाती तूफान से भारत में 8 और श्रीलंका में 12 लोगों की मौत

Titli Cyclone

बंगाल की खाड़ी में उठे ‘तितली’ तूफान ने गुरुवार को ओडिशा, आंध्रप्रदेश में भारी तबाही मचाई। तूफान के कारण आंध्रप्रदेश में आठ लोगों की मौत हो गई। वहीं तितली से श्रीलंका में भी 12 लोगों के मारे जाने की खबर है। 

मौसम विभाग के मुताबिक तितली तूफान गुरुवार तड़के साढ़े चार बजे ओडिशा के गोपालपुर तट से टकराया। इसकी वजह से गंजम और गजपति जिलों में 126 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चली और कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। हालांकि, राज्य में किसी की मौत होने की खबर नहीं है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि राज्य शून्य जानहानि के लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहा है। जबकि ओडिशा के पांच जिलों गंजम, गजपति,पुरी, खुर्दा और जगतसिंह पुर में भारी बारिश हो रही है। 

आंध प्रदेश में अधिक नुकसान 

‘तितली’ ने सबसे अधिक नुकसान आंध्रप्रदेश के दो जिलों श्रीकाकुलम और विजयनगरम में देखने को मिला। श्रीकाकुलम में सात लोगों की मौत हुई है। जबकि विजयनगरम में एक व्यक्ति की जान चली गई। वहीं कई रेलवे स्टेशनों सहित संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। विशाखापत्तनम चक्रवात चेतावनी केंद्र के अधिकारी श्रीनिवास ने बताया कि ‘तितली’ जब तट से टकराया तो इसकी गति 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार पर पहुंच गई थी। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राहत और बचाव कार्य को शुरू करने के निर्देश दिए हैं। 

श्रीलंका में 12 की मौत

‘तितली’ तूफान का असर पड़ोसी देश श्रीलंका में भी देखने को मिला। बारिश और तेज हवाओं के कारण श्रीलंका में 12 लोगों की मौत होने की खबर है। जबकि 69 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। 

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हर जगह बर्बादी का मंजर  

- 3000 एकड़ में लगे बागान और 1000 एकड़ में लगी फसल विजयनगरम में बर्बाद

- 2000 से अधिक बिजली के खंभे आंध्रप्रदेश में उखड़ने की शुरुआती सूचना

-  हजारों की संख्या में पेड़ सड़कों पर गिरे, कई मवेशियों के भी मरने की खबर 

ओडिशा ने 1999 से सबक लिया

- आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। 

- राज्य के छह जिलो में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई। लोगों को एसएमएस से चेतावनी दी जाती है। 

- स्थायी चक्रवात आश्रय स्थलों की संख्या 1999 के 23 के मुकाबले 2018 में बढ़ाकर 879 की गई। इनमें पांच लाख लोगों को रखने की सुविधा। 

- ओडिशा सरकार ने कच्चे मकानों को कंक्रीट में बदलने की योजना पर काम शुरू किया

- स्पष्ट कमांड और नियंत्रण प्रोटोकॉल तैयार किया गया और सिपाही से लेकर अधिकारी तक की जिम्मेदारी तय की गई।

सतर्कता से बची जान 

- ओडिशा के गोपालपुर में समुद्र में नौका पलटने से पांच मछुआरे फंसे, जिन्हें तत्काल बचाव दल ने निकाला, गुरुवार और शुक्रवार को स्कूलों और कॉलेज बंद  

- आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के 67 मछुआरे कुछ दिन पहले समुद्र में गए थे, इनमें से 65 सुरक्षित लौटे

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पश्चिम बंगाल पर असर नहीं 

मौसम विभाग के मुताबिक तूफान का पश्चिम बंगाल में ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, दक्षिणी जिलों में बारिश हो सकती है। 

उत्तर प्रदेश में एक की मौत, बिहार-झारखंड में बारिश 

पश्चिमी विक्षोभ से आए तूफान और बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित मीरापुर में पेड़ की चपेट में आकर अध्यापक की मौत हो गई। गंगा में डॉलफिन की गणना करने वाली चार सदस्यीय टीम भी तूफान में फंस गई। वहीं, तूफान से उत्तराखंड, झारखंड और बिहार के कुछ इलाकों में रुकरुकर बारिश होती रही। 

देश में आए कुछ बड़े तूफान 

ओखी - नवंबर 2017 को दक्षिण-पश्चिम में बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव से ओखी तूफान बना। इससे 365 लोगों की मौत हो गई। 

फैलिन 2013 -  भारतीय तट से टकराने वाले सबसे ताकतवर तूफानों में से एक है। इससे 30 लोगों की मौत हुई थी।

पारादीप1999 - यह उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाला सबसे ताकतवर तूफान था। इससे 10 हजार से अधिक लोग मारे गए। 

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‘तितली’ के बाद अब ‘गज’ का डर 

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में आने वाले तूफानों का नाम आठ देश भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, ओमान, म्यांमार, थाईलैंड, मालदीव और बांग्लादेश मिलकर तय करते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस तूफान का नाम ‘तितली’ पाकिस्तान की ओर से प्रस्तावित किया गया था। अगले तूफान का नाम ‘गज’ होगा, जिसे थाइलैंड ने सुझाया है।

प्रशासन की तैयारियां

- 3 लाख लोगों को ओडिशा में सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया 

- 14 एनडीआरएफ की टीमें ओडिशा में तैनात की गई थी

- 30 जिलों में आपात संचालन केंद्र स्थापित किए गए थे 

- 300 पावर बोट हालात से निपटने को तैयार रखी गई थीं

- 879 बहुउद्देशीय आश्रय स्थल को भी तैयार किया गया था 

- सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द की गई थी

भारत को 80 अरब डॉलर की क्षति

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण गत दो दशकों में आई प्राकृतिक आपदाओं से भारत को 79.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

आर्थिक नुकसान, गरीबी और आपदा : 1998-2017 शीर्षक से बुधवार को जारी रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन से होने वाले महत्वपूर्ण बदलाव या मौसमी घटनाओं के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया गया है। 

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  • Web Title:Eight killed as Cyclone Titli lashes Andhra Odisha coast leaves thousands stranded