‘चरित्र और मूल्यों का निर्माण करती है राजर्षि की शिक्षा’
यूपी कॉलेज में प्राचीन छात्र एसोसिएशन द्वारा ‘वर्तमान शिक्षा में मूल्य, राजर्षि के शिक्षा संबंधी विचार’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि प्रो. वांगचुक ने शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान के साथ-साथ चरित्र निर्माण बताया। डॉ. रामसुधार सिंह ने महान व्यक्तित्वों के विचारों के महत्व पर जोर दिया। डॉ. एसजे सिंह को सम्मानित किया गया।

वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। राजर्षि जयंती की पूर्व संध्या पर बुधवार को यूपी कॉलेज में प्राचीन छात्र एसोसिएशन की ओर से ‘वर्तमान शिक्षा में मूल्य, राजर्षि के शिक्षा संबंधी विचार’ विषयक संगोष्ठी हुई।
संगोष्ठी का उद्देश्य
मुख्य अतिथि केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने कहा कि राजर्षि की शिक्षा दृष्टि चरित्र और मूल्यों का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री और रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, चेतना और जीवन-मूल्यों का निर्माण करना है।
विचारों का महत्व
प्राचीन छात्र एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि महान व्यक्तित्वों का महत्व उनके शरीर से नहीं, बल्कि उनके विचारों के प्रभाव से आंका जाता है। इस दृष्टि से राजर्षि के शैक्षिक विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
सम्मानित व्यक्ति
एसोसिएशन की ओर से प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एसजे सिंह को सम्मानित किया गया। अस्वस्थ होने के चलते उनकी पुत्री डॉ. नीलिमा सिंह ने सम्मान ग्रहण किया। पूर्व शिक्षक विधायक चेतनारायण सिंह, डॉ. कृष्ण कुमार सिंह और डॉ. विनय कुमार सिंह ने भी विचार रखें। संचालन डॉ. (मेजर) अरविन्द कुमार सिंह, स्वागत भानु प्रताप सिंह और धन्यवाद ज्ञापन अमरनाथ सिंह ने किया। इस दौरान महेन्द्र प्रताप सिंह, अशोक आनंद, यादवेंद्र सिंह, प्रो. गोरखनाथ, डॉ. अलका गुप्ता, आनंद प्रकाश सिंह, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. रमेश प्रताप सिंह, डॉ. अनीता सिंह, राणा प्रताप सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह, सत्येंद्र बहादुर सिंह सहित अन्य प्राचीन छात्र शामिल थे।


