रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ दो आरोपपत्र दाखिल
प्रवर्तन निदेशालय ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कंपनियों और उनके पूर्व अधिकारियों के खिलाफ धनशोधन के मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया है। पहले मामले में हेराफेरी का आरोप 187 करोड़ रुपये का है। दूसरे मामले में 40,185 करोड़ रुपये की अपराध की आय का अनुमानों का उल्लेख है।

नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) की कंपनियों और उनके पूर्व अधिकारियों के खिलाफ धनशोधन के दो अलग-अलग मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया है। ईडी ने रविवार को यह जानकारी दी। पहले मामले में ईडी ने शनिवार को द्वारका स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, समूह के पूर्व अधिकारी सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की। सेठ को ईडी ने जून में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में रिलायंस समूह छोड़ दिया था। दूसरा मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़ा है, जिसमें ईडी ने शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। इस मामले में मुख्य आरोपपत्र मार्च में दाखिल किया जा चुका है। एजेंसी के मुताबिक, इस अभियोजन शिकायत में आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल), सतीश सेठ, गौतम दोशी, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को आरोपी बनाया गया है। दोशी और सेठ दोनों इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। दोशी ने वर्ष 2020 में समूह छोड़ दिया था।
पहला मामला: 187 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े पहले मामले की जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा 11 फरवरी 2026 को दर्ज प्राथमिकी से शुरू हुई थी। इसमें आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के जरिए शेल कंपनियां बनाकर काल्पनिक बिल और अधिक कीमत पर हीरों के निर्यात के नाम पर धन का लेन-देन किया गया। ईडी की जांच में सामने आया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की चार परियोजनाओं- त्रिची-करूर (एनएच-67), त्रिची-डिंडीगुल (एनएच-45), सालेम-उलुंदुरपेट (एनएच-68) और जयपुर-रींगस (एनएच-11) से जुड़े टोल रोड परियोजनाओं से सार्वजनिक धन को डायवर्ट करने की संगठित साजिश रची गई। ये परियोजनाएं एनएचएआई की ग्रांट और बैंकों व वित्तीय संस्थानों के कर्ज से वित्तपोषित थीं। ईडी के मुताबिक, सितंबर-अक्तूबर 2010 के दौरान करीब 187 करोड़ रुपये फर्जी और पिछली तारीखों में तैयार किए गए सब-कॉन्ट्रैक्ट के जरिए निकाल लिए गए। ईडी ने इस मामले में तीन अगस्त को 187 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं, जिनमें अचल संपत्तियां, रिलायंस पावर लिमिटेड के शेयर (जो रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पास हैं) शामिल हैं।
दूसरा मामला: 40 हजार से अधिक आंकी अपराध की आय
दूसरा मामला आरकॉम, आरटीएल और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई की कई प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू हुई। इसमें आरोप है कि फंड आधारित और गैर-फंड आधारित क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग कर धन को डायवर्ट किया गया। जांच में सामने आया कि नई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल बार-बार पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाने, घुमाने के लिए किया गया। ईडी के मुताबिक, धन को समूह की कंपनियों, विशेष रूप से बनाए गए माध्यमिक संस्थानों, कई बैंक खातों और लिक्विड म्यूचुअल फंड के जरिए घुमाया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कर्ज की राशि को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस कैपिटल जैसी समूह कंपनियों में डायवर्ट किया गया और उसे विदेश में प्रमोटरों की निजी संपत्तियां खरीदने में लगाया गया। इस मामले में अपराध की आय को 40,185 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि ईडी ने 8,078 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। एजेंसी ने अदालत से इन संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है।
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