लद्दाख तक पहुंची मेरठ से गणेशजी की इको फ्रेंडली मूर्तियां
गणेश चतुर्थी पर्व पर मेरठ में इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों की मांग बढ़ी है। इन मूर्तियों को पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनाया जा रहा है, जिससे जल में डालने पर जलीय जीवों को नुकसान नहीं होता है। इनकी कीमत 250 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक है और देशभर में आपूर्ति की जाती है।

गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर भगवान श्री गणेश के नए-नए अवतार की मूर्तियां खरीदारों को काफी पसंद आ रही है। यह सभी इको फ्रेंडली मूर्तियां (पर्यावरण के अनुकूल) तैयार की जा रही हैं, जिससे जब आप इन्हें जल में समाहित करें, तो जलीय जीवों को भी नुकसान ना हो। मेरठ में हाथ से तैयार इको-फ्रेंडली गणेश जी की मूर्तियां लेह-लद्दाख तक डिमांड में रही। थापरनगर इलाके से गणेशजी की मूर्तियां वहां भेजी गई हैं। मेरठ में चार इंच से 40 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई। अधिकांश मूर्तिययों का तीन महीने पहले ही ऑर्डर मिल जाता है। ये मूर्तियां पूरी तरह हाथ से और इको-फ्रेंडली सामग्री से बनाई जाती हैं।
बाजार में सामान्य मूर्तियां 250 रुपये से 10,000 रुपये तक उपलब्ध हैं, जबकि विशेष ऑर्डर पर छह से सात फीट तक की बड़ी मूर्तियां 25,000 से 50,000 रुपये तक में तैयार की जाती हैं।मूर्ति बनाने वाले अमन ने बताया कि बाजार में ट्रेंड के हिसाब से मूर्तियों का चलन रहता है। ऐसे में भगवान श्री गणेश के विभिन्न नए अवतार की मूर्तियां तैयार की गई। जिनके प्रति भक्तों का काफी रुझान है। बताया कि मेरठ में तैयार होने वाली मूर्तियां मेरठ ही नहीं बल्कि देश भर के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई होती है। मूर्ति बनाने वाले कलाकार बताते हैं कि हर साल तीन महीने पहले ही मूर्तियां बनाने का आर्डर मिल जाता है, क्योंकि भगवान श्री गणेश की जो विशाल मूर्तियां हैं, उन्हें बनाते समय बारिश का भी विशेष रूप से ख्याल रखना पड़ता है। ऐसे में एक मूर्ति को तैयार करने में लगभग डेढ़ से दो महीने का समय लग जाता है।


