डीएसबी के छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई को खाता खोलने की चुनौती
नैनीताल के डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई की उपस्थिति लगभग नगण्य है। एबीवीपी ने पिछले कई चुनावों में जीत हासिल की है, जबकि एनएसयूआई ने 2025 में काले झंडे के प्रत्याशी को समर्थन दिया। गुटबाजी और नए दलों की वजह से एनएसयूआई को जीत में मुश्किलें आई हैं।

नैनीताल, संवाददाता। डीएसबी परिसर के छात्रसंघ चुनावी इतिहास में एनएसयूआई की उपस्थिति लगभग न के बराबर है। जबकि कई डिग्री कॉलेजों में अक्सर छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर एबीवीपी और एनएसयूआई में कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। बीते साल तो एनएसयूआई ने अपना अध्यक्ष प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में उतारना जरूरी नहीं समझा।कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार, 2025 के छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद पर काले झंडे के प्रत्याशी करन सती को अपना समर्थन दिया। करन सती 1466 वोट पाकर जीते। 2024 में सेमेस्टर लेट और कोर्स अधूरा होने के कारण छात्रसंघ चुनाव नहीं हुआ। 2023 में एबीवीपी के उत्कर्ष बिष्ट 1118 वोट से जीते।
2020 से 2022 तक कोरोना संक्रमण काल के दौरान छात्रसंघ चुनाव नहीं हो सके। जबकि, 2019 में एबीवीपी के विशाल वर्मा ने 1100 वोटों से जीत दर्ज की। 2018 में निर्दलीय प्रत्याशी महेश अध्यक्ष बने। 2015 से 2017 तक के छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी का दबदबा रहा। नतीजों से साफ है, छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई को जीत दर्ज करने के लिए खुद का मजबूत प्रत्याशी लड़ाना होगा। जिससे इस संगठन का नेतृत्व भी अन्य की तरह कायम रह सके। मामले में एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष शार्दुल नेगी का कहना है कि डीएसबी में गुटबाजी के कारण कई नए दल बन गए हैं। यही कारण रहा है, कि लंबे समय से एनएसयूआई अध्यक्ष पद का चुनाव में जीत नहीं पाई l


