यूएई से भारत लाया गया भगोड़ा ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया
यूएई से भारत लाया गया भगोड़ा ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया- 13 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड अब हिरासत में- अमित शाह ने कहा, ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे कानून की...

यूएई से भारत लाया गया भगोड़ा ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया - 13 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड अब हिरासत में
- अमित शाह ने कहा, ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे कानून की पकड़ से बच नहीं सकते
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता
नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बड़ी सफलता हासिल की है। विदेश में छिपे वांछित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू उर्फ बसोया को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत वापस लाया गया है। भारत पहुंचते ही उन्हें नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया।
बसोया को गिरफ्तारी की जानकारी
बसोया को जून 2026 में यूएई में इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। भारतीय एजेंसियों ने यूएई अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर उनकी भारत वापसी सुनिश्चित की। यह कार्रवाई एनसीबी के ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ के तहत हुई है।
अमित शाह ने कहा नहीं बचेंगे ड्रग तस्कर
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और सख्त रवैया अपनाते हुए उनके पूरे नेटवर्क को खत्म कर रही है। नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए, एनसीबी ने ड्रग तस्करी के सरगना और भगोड़े वीरेंद्र सिंह बसोया को यूएई से वापस लाने में सफलता हासिल की है। हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे कानून की पकड़ से बच नहीं सकते।”
13 हजार करोड़ रुपये का ड्रग्स नेटवर्क
दिल्ली से लेकर गुजरात, पंजाब और विदेश तक फैले करीब 13 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स नेटवर्क में वीरेंद्र सिंह बसोया को जांच एजेंसियां कथित मास्टरमाइंड के रूप में देख रही थीं। लंबे समय से विदेश में रह रहा बसोया अब भारतीय एजेंसियों की गिरफ्त में है। यह घटनाक्रम 13 हजार करोड़ के ड्रग्स सिंडिकेट की जांच में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
मामले की शुरुआत अक्टूबर 2024 से
इस पूरे मामले की शुरुआत अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की कार्रवाई से हुई। 1 अक्टूबर 2024 को गुप्त सूचना के आधार पर महिपालपुर एक्सटेंशन में छापेमारी की गई। यहां से तुषार गोयल, हिमांशु कुमार और औरंगजेब सिद्दीकी को पकड़ा गया। उनके कब्जे से करीब 16 किलो कोकीन जैसा पदार्थ मिला। उसी इमारत से पुलिस ने करीब 547 किलो कोकीन और 39.706 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया।
बड़ी मात्रा में जब्ती
इन सभी बरामदगियों को जोड़ने पर जांच में कुल 1,289 किलो कोकीन/मेफेड्रोन और करीब 39.7 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा सामने आया। जनवरी 2026 में इसी सिंडिकेट से जुड़े होने के आरोप में सिक्किम से तिलक प्रसाद शर्मा की गिरफ्तारी हुई। इस मामले में कुल 14 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी है।
कई देशों में फैला नेटवर्क
पुलिस जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े थे। वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू और सैंडिप संसार धुने को कथित किंगपिन बताया गया है। जांच में नेटवर्क के कनेक्शन यूके, मलेशिया, पाकिस्तान, थाईलैंड और दुबई तक सामने आए।
पाकिस्तान का भी कनेक्शन
एजेंसियों के अनुसार, ड्रग्स की सप्लाई के लिए कई कंपनियों और कथित फर्जी कारोबारी ढांचे का इस्तेमाल किया गया। जांच में फार्मा सलूशन सर्विसेज , आरएम बायोकेम और लाइफ सेवर फार्मा नाम की कंपनियों का जिक्र है। इनके ई-मेल खातों की लोकेशन पाकिस्तान और मलेशिया से जुड़ने की बात सामने आई।
इस रूट का इस्तेमाल
दक्षिण अमेरिका से ड्रग्स को दुबई के रास्ते भारत लाया जाता था। गुजरात के अंकलेश्वर में फार्मा और केमिकल कंपनियों की आड़ में ड्रग्स को प्रोसेस कर मेडिकल कंसाइनमेंट के नाम पर आगे भेजा जाता था। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर समेत दूसरे शहरों तक सप्लाई की जाती थी।
डिलीवरी का तरीका
नेटवर्क सीधे फोन पर बातचीत के बजाय सुरक्षित और कोडेड तरीकों का इस्तेमाल करता था। पेड और एन्क्रिप्टेड ऐप्स तथा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान की बात जांच में सामने आई। ड्रग्स को कभी केमिकल कंसाइनमेंट तो कभी कार्डबोर्ड बॉक्स में कपड़ों या नमकीन के पैकेटों के बीच छिपाकर भेजा जाता था। सप्लाई दिल्ली, पंजाब, मुंबई, हैदराबाद और गोवा तक पहुंच रही थी। कुछ ड्रग्स की खपत पार्टियों और म्यूजिक इवेंट्स में होने का आरोप है।
970 किलो मेफेड्रोन वाला मामला भी जुड़ा
वीरेंद्र बसोया का नाम इससे पहले पुणे पुलिस के मामले में भी सामने आ चुका था। 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई करते हुए दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया गया था। इनके कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद हुई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों कथित तौर पर वीरेंद्र बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे। इस तरह एक तरफ दिल्ली-गुजरात में कोकीन का बड़ा नेटवर्क, तो दूसरी तरफ मेफेड्रोन को विदेश भेजने की साजिश में भी बसोया का नाम जुड़ा।
भाई और बेटा भी जांच के घेरे में
इस नेटवर्क की जांच में वीरेंद्र के भाई रविंदर बसोया का नाम भी सामने आया। 5 अक्टूबर 2024 को जिस फॉर्च्यूनर से ड्रग्स बरामद हुई थी, वह रविंदर की थी। रविंदर को दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था।
वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ बसोया का नाम भी सामने आया। जांच के मुताबिक, ऋषभ की एसयूवी का इस्तेमाल ड्रग्स की खेप लेने के लिए किया गया था। उसने अपनी फॉर्च्यूनर जतिंदर सिंह गिल उर्फ जस्सी को उपलब्ध कराई थी, जिससे पंजाब में ड्रग्स बरामद हुई। दिल्ली के हुडको प्लेस और पंचशील एन्क्लेव इलाके के एक होटल की सीसीटीवी फुटेज में ऋषभ और जस्सी के बीच संपर्क के सबूत मिले।
एजेंसियों का आरोप है कि ऋषभ नेटवर्क के लॉजिस्टिक्स और ड्रग्स की आवाजाही में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। ऋषभ के खिलाफ भी इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। नवंबर 2025 में खबर आई थी कि वह विदेश में है और गिरफ्तारी से बच रहा है।
बसोया कौन है?
वीरेंद्र बसोया दक्षिणी दिल्ली के पिलांजी गांव का रहने वाला है। 2023 में उसके बेटे ऋषभ की शादी उत्तर प्रदेश के नोएडा से जुड़े एक पूर्व विधायक की बेटी से हुई थी। शादी दिल्ली एयरपोर्ट के पास एक आलीशान फार्महाउस में हुई थी। शादी के अगले ही दिन पुणे पुलिस ने उसके घर में रेड की। वीरेंद्र बसोया रेड होने से पहले परिवार समेत विदेश भाग गया था।
लुक-आउट सर्कुलर जारी किया था
अक्टूबर 2024 में दिल्ली ड्रग्स केस सामने आने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किया था। वह भारत से बाहर रहकर नेटवर्क चला रहा था। अब लंबी अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के बाद यूएई से भारत प्रत्यर्पण हुआ है।
अब जांच एजेंसियों को सीधे उससे पूछताछ का मौका मिलेगा। खास तौर पर विदेश से भारत तक ड्रग्स पहुंचाने का नेटवर्क, हवाला और मनी ट्रेल, विदेशी संपर्क, पाकिस्तान-दुबई कनेक्शन, कथित फर्जी कंपनियों और नेटवर्क में उसके बेटे ऋषभ समेत दूसरे आरोपियों की भूमिका की जांच अहम होगी।
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट जारी
यह कार्रवाई एनसीबी के ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ और भारत के ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026–2029) के तहत हो रही है। इससे पहले मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये और नवीन चिकर को मलेशिया से भारत लाया जा चुका है। गृहमंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में एनसीबी का लक्ष्य पूरे मादक पदार्थ तस्करी तंत्र को ध्वस्त करना है।
सफ़ेमा के तहत अवैध संपत्तियों की जांच
उपलब्ध जानकारी और एजेंसियों के बयानों के अनुसार वीरेंद्र सिंह बसोया का नेटवर्क और बेनामी वित्तीय साम्राज्य दिल्ली-एनसीआर से लेकर दुबई और लंदन तक फैला हुआ बताया जा रहा है। एनसीबी और अन्य एजेंसियां उनके वित्तीय स्रोतों तथा बेनामी संपत्तियों को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए ‘टॉप-टू-बॉटम’ जांच कर रही हैं।
हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग कनेक्शन
एनसीबी बसोया से पूछताछ के दौरान अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला चैनलों का पूरा ब्योरा खंगाल रही है।जांच में यह सामने आया है कि नेटवर्क में भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और हवाला जैसे तरीकों का इस्तेमाल होने की आशंका है।
शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए फंड ट्रांसफर और ड्रग्स के लेन-देन की भी जांच चल रही है।
एक करीबी पाकिस्तान भागा
वीरेंद्र सिंह बसोया का करीबी सहयोगी संदीप धुनिया पाकिस्तान भाग गया था। संदीप धुनिया को लगभग 13,000 करोड़ रुपये के बड़े ड्रग्स सिंडिकेट मामले का मुख्य आरोपी माना जाता है।बसोया को उसके करीबी सहयोगी के रूप में चिन्हित किया गया है।एजेंसियों के अनुसार, संदीप धुनिया दुबई से पाकिस्तान भागने में सफल रहा था।


