DRDO is making next generation hypersonic weapon - हाइपरसोनिक हथियार और मिसाइल बना रहा DRDO, ध्वनि से 5 गुना रफ्तार से दुश्मनों काम करेगा तमाम DA Image
21 नवंबर, 2019|11:04|IST

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हाइपरसोनिक हथियार और मिसाइल बना रहा DRDO, ध्वनि से 5 गुना रफ्तार से दुश्मनों काम करेगा तमाम

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भविष्य के युद्ध की तैयारियों के लिहाज से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) हाइपरसोनिक हथियार और मिसाइलें बनाने में जुट गया है। दिन प्रतिदिन अधिक महत्वपूर्ण होती जा रहीं हाइपरसोनिक मिसाइलों की गति ध्वनि से पांच गुना अधिक यानी पांच मैक होती है। 
मिसाइलों की गति को मैक में प्रदर्शित करते हैं। एक मैक की गति का मतलब ध्वनि की गति के बराबर चाल है। पांचवीं पीढ़ी का हथियार मानी जा रहीं हाइपरसोनिक मिसाइलें एक सेकंड में एक मील से ज्यादा की दूरी तय करती हैं। डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर कहा कि हाइपरसोनिक मिसाइल के परीक्षण के लिए एक विंड टनल बनाया गया है। माना जा रहा है कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जल्द ही इसका उद्घाटन करेंगे। अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें भी सुपरफास्ट गति से हमला करती हैं, लेकिन हाइपरसोनिक मिसालइलें बेमिसाल हैं। 

जरूरत के तीन कारण : 
डीआरडीओ तीन कारणों से हाइपरसोनिक मिसाइलें बना रहा है। पहला कारण यह है कि यह मिसाइल आसानी से मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर लक्ष्य को ध्वस्त कर देती हैं। दूसरा यह कि इसके जरिये लंबी दूरी तक परमाणु और परंपरागत मुखास्त्र भेजे जा सकेंगे। तीसरा, इन मिसाइलों को मार गिराना और इनका पीछा कर पाना करीब नामुमकिन होगा। 
    
तीन देशों के पास हाइपरसोनिक मिसाइलें! :   
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया के मुताबिक चीन ने हाल ही में अपने पास हाइपरसोनिक मिसाइल होने का दावा किया था। माना जा रहा है कि अमेरिका के पास भी इस तरह की मिसाइलें पहले से हैं। रूस के पास भी यह हो सकती है। तीनों ही देश तरह-तरह की हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण करने में जुटे हैं ताकि खुद को सैन्य लिहाज से मजबूत बना सकें। भाटिया के मुताबिक अब समय आ गया है कि भारत भी इस तरह की मिसाइल के विकास पर काम शुरू कर दे। उन्होंने बताया कि भविष्य के युद्ध में हाइपरसोनिक मिसाइल की बड़ी भूमिका होगी। 
  
उद्योगों को मुफ्त में मिलेगी तकनीक: 
देश में रक्षा उत्पादों को बढ़ावा देने के मकसद से डीआरडीओ अपनी 1500 पेटेंट तकनीक भारतीय उद्योगों को मुफ्त में मुहैया कराएगा। इसमें मिसाइल और चिकित्सा विज्ञान समेत कई अन्य क्षेत्रों से संबंधी तकनीक शामिल हैं। डीआरडीओ चेयरमैन जी सतीश रेड्डी ने कहा- स्टार्ट-अप, मध्य और मझोले उद्योगों को पेटेंट कराई गई तकनीक को मुफ्त में मुहैया कराया जाएगा। डीआरडीओ मेक इन इंडियो को बढ़ावा देने के मकसद से उद्योगों को परिष्कृत रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने के प्रति प्रतिबद्ध है। रेड्डी के मुताबिक देश में अभी 1800 रक्षा उद्योग हैं जिन्हें बढ़ाया जाएगा ताकि हाथियारों की तकनीकी क्षमता को बढ़ाया जा सके। 
  
उद्योगों से लाइसेंस शुल्क नहीं: 
डीआरडीओ के मुताबिक उद्योगों को पेटेंट कराई गई डीआरडीओ की तकनीक हासिल करने के एवज में कोई लाइसेंस फीस या रॉयल्टी नहीं देनी होगी। ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) के तहत उद्योगों की मदद की जा रही है। फिलहाल टोओटी शुल्क को पहले के 20 फीसदी के मुकाबले घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। भारतीय सेना को हथियार आपूर्ति पर अब कोई रॉयल्टी नहीं ली जाती। हालांकि हथियारों का निर्यात करने पर नाममात्र की दो फीसदी रॉयल्टी ली जाएगी। 

दुनिया की दो शीर्ष गति वाली मिसाइलें : 
रिम-161 एसएम-3-इस अमेरिकी मिसाइल की गति 13.2 मैक है और मारक क्षमत 2500 किलोमीटर है।  
ब्रह्मोस- भारत और रूस द्वारा निर्मित इस मिसाइल की गति 2.8 मैक है। यह 290 किमी तक मार कर सकती है। 
 
ताकतवर अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें : 
आर-36: आर-36 रूस की सबसे ताकतवर मिसाइल है। यह एक साथ 10 से ज्यादा ठिकानों पर निशाना साधने में सक्षम है। यह 16 हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है।

16 डोंगफेंग-41:  इस चीनी मिसाइल की मारक क्षमता 15 हजार किलोमीटर है। माना जा रहा है कि एक साथ 10 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाने वाली इस मिसाइल की गति 25 मैक है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई।


एलजीएम-30 माइन्यूटमैनः इस अमेरिका मिसाइल की मारक क्षमता 13 हजार किलोमीटर है। यह एक साथ तीन परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है जो तीन अलग-अलग लक्ष्यों को भेद सकती है।


अग्नि पांच : इस भारतीय मिसाइल की मारक क्षमता पांच हजार किलोमीटर तक है। यह अपने साक्ष परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। 
 

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