'माफ नहीं करूंगा' की जिद में पति-पत्नी बन रहे ‘कातिल’
अलीगढ़ में घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। आज 'वैश्विक क्षमा दिवस' के अवसर पर सहिष्णुता की कमी और रिश्तों में आक्रोश की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक हैं। पिछले 10 वर्षों में पारिवारिक विवादों में वृद्धि हुई है, जिसमें पति-पत्नी के कातिल बन जाने की घटनाएं भी शामिल हैं।

अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। ‘तूने मेरी बात नहीं मानी, अब तुझे जीने नहीं दूंगा...’ ये लाइन अब सिर्फ फिल्मों में नहीं, जिले के लगभग हर घर में गूंज रही है। सहिष्णुता और क्षमा खत्म होने से रिश्तों में 'जानलेवा' आक्रोश पनप रहा है। हालात ये हैं कि पति पत्नी का कातिल बन रहा है तो कहीं पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर जीवनसाथी को मौत के घाट उतार दिया। आज सात जुलाई को पूरी दुनिया 'वैश्विक क्षमा दिवस' मना रही है, जिसका उद्देश्य लोगों के बीच आपसी मनमुटाव को भुलाकर सहनशीलता को बढ़ावा देना है। लेकिन, इसकी जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। अलीगढ़ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में पारिवारिक दृष्टि से सहनशीलता और क्षमा की भावना तेजी से घटी है, जिसका सीधा असर घरेलू हिंसा और जघन्य अपराधों के रूप में सामने आ रहा है। इसीलिए पिछले 10 सालों में इस तरह के हादसे भी तेजी से बढ़े हैं।
प्रदेश में घरेलू हिंसा के मामले
प्रदेश में धारा 498-ए (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और घरेलू हिंसा के मामलों में पिछले 10 वर्षों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल दर्ज मामलों में घरेलू प्रताड़ना सबसे अधिक है। हालांकि पुलिस प्रशासन का मानना है कि 'मिशन शक्ति' और हर थाने में महिला हेल्प डेस्क होने की वजह से अब महिलाएं चुप रहने की बजाय मामले दर्ज करा रही हैं, जिससे पिछले दस साल में मुकदमों की संख्या बढ़ी है। अलीगढ़ की बात करें तो पिछले एक साल में काउंसलिंग के लिए आने वाले वैवाहिक विवादों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पुलिस लाइन में परिवार परामर्श केंद्र बना हुआ है। यहां की प्रभारी शिखा त्यागी बताती हैं कि हर महीने औसतन 300 से अधिक मामले आते हैं। लेकिन, 40 प्रतिशत मामलों के पीछे की वजह बेहद नजरअंदाज करने वाली होती हैं। जैसे ठीक से खाना नहीं बना, पत्नी फोन चलाती है... या एक-दूसरे से सॉरी न बोल पाना। इसी तरह महिला थाने में भी 400 मामले हर माह आते हैं। उधर, परिवार न्यायालय में काउंसलर योगेश सारस्वत बताते हैं कि पहले झगड़े के बाद बड़े-बुजुर्ग बीच-बचाव करते थे। अब दंपतियों को लगता है कि 'मैं क्यों झुकूं'। पार्टनर की छोटी सी गलती भी माफ करने को तैयार नहीं। ईगो इतना बड़ा कि रिश्ता छोटा लगने लगा है।
खराब रिश्तों के आंकड़े
35 प्रतिशत केस तीन साल पुरानी शादियों के :
फैमिली कोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि रिश्तों की डोर कमजोर हो रही है। पारिवारिक विवादों के मुकदमों में पिछले 5 साल में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। आपसी विवाद और तलाक के केस 15 प्रतिशत तक बढ़ गए। कुल मामलों में 35 प्रतिशत केस सिर्फ एक से तीन साल पुरानी शादियों के हैं। शादी के तीन साल भी साथ नहीं निभा पा रहे।
क्षमा का महत्व
रिश्तों की डोर को चाहिए क्षमा का संबल :
हालांकि जिन परिवारों ने काउंसलिंग में थोड़ा धैर्य दिखाया, 'मैं सही' की जिद छोड़कर 'हम सही' पर बात की, वहां 80 प्रतिशत विवाद कोर्ट की दहलीज तक पहुंचे ही नहीं। थाने और मीडिएशन सेंटर पर ही सुलह हो गई।
केस स्टडी
केस : 1 - दिव्यांग प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या :
लोधा क्षेत्र के गांव हैवतपुर में 17 दिसंबर 2025 को आगरा के इलेक्ट्रीशियन राजकुमार की हत्या हुई। पुलिस ने खुलासा किया तो पता चला कि पत्नी ज्योति का दिव्यांग प्रेमी बॉबी से अफेयर था। पति रोड़ा बन रहा था तो पत्नी ने प्रेमी संग साजिश रची। प्रेमी ने 1.5 लाख की सुपारी देकर दोस्तों से हत्या कराई।
केस : 2 - प्रेमी से गोली मरवाकर पति की हत्या :
गोंडा क्षेत्र के गांव कलुआ में 11 अक्टूबर 2025 को रिंकू की हत्या की गई। रिंकू की पत्नी बृजेश का गांव के अजित से अफेयर था। दवा लेने के बहाने पत्नी पति को साथ ले गई और प्रेमी को लोकेशन भेज दी। प्रेमी अजित ने मां-बेटी के सामने ही रिंकू को गोली मार दी।
केस :3 - पति ने पत्नी की हत्या की :
जवां क्षेत्र के गांव रामपुर में 14 मई 2026 को कमल सिंह ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। कमल सिंह शराब का आदी था। पत्नी नीलम मजदूरी कर पांच बच्चों का पेट पालती थी। रात 10 बजे शराब के लिए पैसे मांगे। मना करने पर फावड़े से काटकर पत्नी की हत्या कर दी।
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