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कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर आपके मन में भी हैं सवाल? यहां है हर जवाब

देश में दो टीकों के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी भले ही मिल गई हो, लेकिन लोगों के मन में टीकों को लेकर कई सवाल हैं, जिनका जवाब जरूरी है। विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर आइए इन सवालों का जवाब तलाशते...

कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर आपके मन में भी हैं सवाल? यहां है हर जवाब
हिन्दुस्तान ब्यूरो,नई दिल्ली।Mon, 04 Jan 2021 08:56 AM
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देश में दो टीकों के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी भले ही मिल गई हो, लेकिन लोगों के मन में टीकों को लेकर कई सवाल हैं, जिनका जवाब जरूरी है। विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर आइए इन सवालों का जवाब तलाशते हैं।

दो टीके मंजूर हुए हैं, किस व्यक्ति को कौन सा टीका लगेगा, यह कैसे तय होगा?

संभावना यह है कि सरकार राज्यों के हिसाब से अलग-अलग टीके लगाएगी। किसी राज्य में सीरम तो किसी में भारत बायोटेक का टीका लगाने के लिए दिया जा सकता है। इससे दूसरी खुराक लगाने में कोई गड़बड़ी या असुविधा नहीं होगी। हालांकि, कोविन सॉफ्टवेयर में दर्ज होगा कि किस व्यक्ति को कौन सा टीका दिया गया है।

टीके बाजार में कब आएंगे?

माना जा रहा है कि अभी दोनों टीके सरकार खरीदेगी, जिसका इस्तेमाल वह प्राथमिकता समूह में रखे लोगों को टीका लगाने में करेगी। इनकी संख्या करीब 30 करोड़ है। यानी 60 करोड़ खुराक सरकार को चाहिए। यह पूरा होने के बाद ही सरकार टीके को बाजार में बिक्री की अनुमति देगी।

क्या फाइजर, मॉडर्ना, स्पूतनिक के टीकों को मंजूरी मिलेगी?

बिल्कुल मिल सकती है। फाइजर ने तो आवेदन भी किया है। स्पूतनिक के ट्रायल चल रहे हैं। ये कंपनियां भी आवेदन करेंगी। इसलिए आने वाले समय में ये तीन टीके भी आएंगे। कैडिला का टीका भी तीसरे चरण में है। विश्व में कई और टीके भी तैयार हो रहे हैं। दूसरी छमाही में और टीके आ चुके होंगे।

कई टीकों के आने से क्या होगा?

यदि देश में कई और टीकों को मंजूरी मिलती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है तो सरकार टीकों को बाजार में बिक्री की अनुमति भी देगी और लोग खुद खरीद कर टीका लगा सकेंगे

बाजार में टीकों की कीमतें क्या रहेंगी?

अभी कहना मुश्किल है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि कितने टीके बाजार में हैं। देश में बनने से निश्चित रूप से टीकों की कीमत कम होगी।

आपातकालीन इस्तेमाल से क्या तात्पर्य है?

इन दो टीकों को अभी सीमित और आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। इसका एक मतलब तो यह है कि इस्तेमाल वह पूर्ण रूप से चिकित्सकीय निगरानी में होना है। प्रभाव पर नजर भी रखी जाएगी। लेकिन, कुछ बातें स्पष्ट हैं। मंजूरी से पहले पुष्टि की जाती है कि जिसे आपात मंजूरी दी जा रही है, वह प्रभावी है। इस समय उससे बेहतर विकल्प और कोई नहीं है। यदि उससे कहीं ज्यादा प्रभावी दवा आती है तो आपात मंजूरी वाली दवा की मंजूरी वापस भी ली जा सकती है। यदि चिकित्सकीय निगरानी के दौरान दवा या टीका सफल रहता है तो उसे अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी जाएगी।

सीमित आपातकालीन इस्तेमाल से क्या तात्पर्य है?

ऐसी मंजूरी के दौरान बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की मनाही है, लेकिन कितने लोगों पर इस्तेमाल करना है, इसकी कोई संख्या भी तय नहीं है। खासकर जब टीका देश की सवा सौ करोड़ आबादी को लगना हो तो ऐसे में एक-दो करोड़ को लगाना भी सीमित इस्तेमाल ही माना जाएगा।

भारत में कुल कितने टीकों पर कार्य चल रहा है?

कुल नौ टीकों पर कार्य चल रहा है। दो को आपात मंजूरी मिली है। सात विभिन्न चरणों में हैं।

सबसे पहले किन्हें टीका लगेगा?

पहले चरण में एक करोड़ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सबसे पहले टीका लगना है। इसमें सरकारी और निजी सभी स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। इसके बाद दो करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर हैं, जो कोरोना रोकथाम कार्य में लगे हैं, जिनमें पुलिसकर्मी, सरकारी कर्मी आदि शामिल हैं। इसके बाद 27 करोड़ वे लोग हैं, जिन्हें पहले से कोई बीमारी है तथा उन्हें कोरोना से ज्यादा खतरा हो सकता है।

क्या सभी को मुफ्त टीके लगेंगे?

अभी तक एक करोड़ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं दो करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर को ही केंद्र ने मुफ्त टीका लगाने का फैसला किया है। बाकी 27 करोड़ के बारे में अभी निर्णय होना बाकी है, लेकिन राज्य सरकारें चाहें तो वह मुफ्त टीका लगा सकती हैं। कई राज्य घोषणा भी कर चुके हैं।

क्या इन तीनों समूहों को एक साथ टीका लगेगा?

यह आने वाले दिनों में टीके की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

(विशेषज्ञों से बातचीत पर आधारित)