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दिवाली: पटाखों से दिल्ली ही नहीं पटना-लखनऊ तक का भी दम फूला

दिवाली प्रदूषण

प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए दिशानिर्देश से बेपरवाह लोगों ने दिवाली पर आतिशाबाजी का मोह नहीं छोड़ा। नतीजा यह हुआ कि महज कुछ घंटों में ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ही नहीं लखनऊ पटना के तमाम शहर प्रदूषण की मोटी परत से ढक गए और लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया। 

बिहार: पटना सबसे खराब हालात 

दिवाली के दिन पटना, राज्य में ही नहीं बल्कि देश के सबसे प्रदूषित शहरों में एक रहा। पटना में पीएम 2.5 का स्तर पटाखे फोड़ने के दौरान अधिकतम सीमा 500 के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 435 रहा। वहीं, पीएम 2.5 का स्ता मुजफ्फरपुर में 392 और गया में 307 रहा। पटना में सल्फर डाय ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा मानक से अधिक पाई गई।

उत्तर प्रदेश : वाराणसी से बागपत तक आफत 

राजधानी लखनऊ सहित तमाम बड़े शहर पटाखों के धुएं से हांफते नजर आए। लखनऊ स्थित तालकटोरा औद्योगिक जिला केंद्र पर लगे वायु गणवत्ता मापक के कांटा 442 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं रामपुर का गुरुवार को सुबह 5.25 बजे वायु गुणवत्ता स्तर 526 था, जो 10.38 बजे 595 के स्तर पर पहुंच गया। मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता का स्तर गुरुवार सुबह 412 रिकॉर्ड किया गया, जबकि आधी रात के बाद ही यह 500 तक पहुंच गया था। मेरठ का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 रिकॉर्ड किया गया, जो खतरनाक स्तर का है। यही हाल कमोवेश वाराणसी,आगरा का रहा। बागपत में तो दिल्ली की तरह स्मॉग की मोटी परत दिन के 12 बजे तक छाई रही।  

उत्तराखंड : हल्द्वानी में आफत हरिद्वार को राहत 

दीपावली पर राज्य के प्रमुख शहर देहरादून, हल्द्वानी में प्रदूषण में इजाफा हुआ है। जबकि हरिद्वार में इस साल प्रदूषण के स्तर में पूर्व के मुकाबले काफी सुधार है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक हल्द्वानी में दिवाली पर प्रदूषण के स्तर में 200 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। दिवाली से पहले वायु में प्रदूषण का स्तर 126.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो बढ़कर 229.1 के स्तर तक पहुंच गया। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीके जोशी ने इसकी पुष्टि की। 

उत्तर से बेहतर दक्षिण भारत के शहरों का हाल 

उत्तर भारत में पटाखों की वजह से जहां एक ओर वायु गणवत्ता खतरनाक स्तर को भी पार गया। इसके उलट दक्षिण भारत के शहरों में वायुगुणवत्ता औसत बनी रही। 

उत्तर भारत के शहर         वायु गुणवत्ता (शाम छह बजे गुरुवार)
पटना                 429 (खतरनाक)
मुजफ्फरपुर             387(बहुत खराब)
वाराणसी             322(बहुत खराब)
लखनऊ                437(खतरनाक)
मुरादाबाद             361(बहुत खराब)
मुजफ्फरनगर             355(बहुत खराब)
बुलंदशहर             430(खतरनाक)
हापुड़                399(बहुत खराब)
धनबाद                 350(बहुत खराब)
रोहतक                350(बहुत खराब)
जालंधर                 302(बहुत खराब)

दक्षिण भारत की स्थिति     वायु गुणवत्ता (शाम छह बजे गुरुवार)
हैदराबाद                                 102(औसत)
तिरुवनंतपुरम                           94(संतोषजनक)
तिरुपति                                 48(अच्छा)
विजयवाड़ा                            117(औसत)
राजमहेंद्रवरम                        161(औसत)
बेंगलुरु                                138(औसत)
चिकबल्लापुर                      92(संतोषजनक)
पुणे                                   187(औसत)
नवी मुंबई                          101(औसत)
नागपुर                              166 (औसत)
नासिक                             180(औसत)

महानगरों का हाल 
शहर                 वायु गुणवत्ता (शाम छह बजे गुरुवार)
चेन्नई                     111 (औसत)
दिल्ली (मथुरा रोड)     447(खतरनाक)
कोलकाता                 366(बहुत खराब)
मुंबई                        237(खराब)

स्रोत : नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स 

दक्षिण में बेहतर आबोहवा क्यों
-प्रायद्वीप होने के कारण उत्तर भारत के मुकाबले औसत तापमान अधिक होता 
- समुद्र के किनारे कई शहर बसे हैं, जहां पर देर शाम अपेक्षाकृत तेज हवाएं चलती हैं 
- इसके उलट उत्तर भारत में रात का तापमान गिर जाता और प्रदूषक का घनत्व बढ़ जाता है 
- इस मौसम में उत्तर भारत में हवाओं की गति भी मंद पड़ जाती है, जिससे प्रदूषक केंद्रीत हो जाते 

आदेश की अवहेलना में कोई पीछे नहीं 
- 2100 मुकदमे पूरे तमिलनाडु में दर्ज किए गए निर्धारित समय के बाद पटाखे फोड़ने पर 
- 344 मामले अकेले चेन्नई में दर्ज हुए, 160 मुकदमे विलुपुरम में भी पंजीकृत किए गए 
- 38 मामले चंडीगढ़ में दर्ज किए गए 37 लोगों की संबंधित मामलों में हुई गिरफ्तारी 
- पूर्वोत्तर के सबसे बड़े शहर गुवहाटी में भी देर तक फूटे पटाखे पर किसी पर मुकदमा नहीं
- 7 लोगों की गिरफ्तारी मुंबई में हुई, निर्धारित समय से परे पटाखे जलाने पर 

हवा ही नहीं ध्वनि ने भी किया परेशान 
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ तौर पर पटाखों की ध्वनि को नियंत्रित किया था। लेकिन इसकी अवहेलना भी देखी गई। पटना में मानक से चार से पांच गुणा अधिक शोर मापा गया। उत्तराखंड स्थित गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विभाग के एचओडी प्रोफेसर पीसी जोशी के मुताबिक इस वर्ष ध्वनि का स्तर  120 से 130 डेसीबल मापा गया। मुंबई के कई साइलेंस जोन में भी 55 डेसीबल के स्थान पर 114 डेसीबल ध्वनि दर्ज की गई।

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  • Web Title:Diwali Due to the firecrackers Delhi too does not even fall in Patna Lucknow