गुरु की आज्ञा, निस्वार्थ प्रेम और भगवान के नाम में ही कल्याण

हिन्दुस्तान, भभुआ
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गुरु-भक्ति और निष्काम प्रेम के महत्व पर जीयर स्वामी जी महाराज ने चातुर्मास महायज्ञ में भगवान शिव, माता पार्वती और अन्य महान व्यक्तित्वों के प्रसंगों के माध्यम से ज्ञान साझा किया। उन्होंने बताया कि वास्तविक कल्याण गुरु की आज्ञा और भगवान के नाम में है। श्रद्धालुओं को प्रेम, त्याग और मर्यादा के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।

गुरु की आज्ञा, निस्वार्थ प्रेम और भगवान के नाम में ही कल्याण
गुरु की आज्ञा, निस्वार्थ प्रेम और भगवान के नाम में ही कल्याण

गुरु की आज्ञा, निस्वार्थ प्रेम और भगवान के नाम में ही कल्याण शिव-पार्वती संवाद, नारद मुनि, भरत, गोपियों और शुकदेव के प्रसंगों को सुनाया जीयर स्वामी जी महाराज ने गुरु-भक्ति और निष्काम प्रेम की महिमा का किया वर्णन भभुआ, नगर संवाददाता।

गुरु-भक्ति का महत्व

भभुआ के परसियां में चल रहे चातुर्मास महायज्ञ में रविवार को कथावाचक जीयर स्वामी जी महाराज ने भगवान शिव, माता पार्वती, देवर्षि नारद, भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, भरत और महर्षि शुकदेव से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया और कहा कि मनुष्य का वास्तविक कल्याण गुरु की आज्ञा, निस्वार्थ प्रेम, भगवान के नाम और सत्संग में ही निहित है।

श्रद्धा और समर्पण

उन्होंने कहा कि सांसारिक प्रेम प्राय: स्वार्थ से जुड़ा होता है, जबकि ईश्वर और भक्त का संबंध त्याग, विश्वास और समर्पण पर आधारित होता है। स्वामी जी ने बताया कि माता पार्वती देवर्षि नारद को अपना गुरु मानती हैं, क्योंकि उनके मार्गदर्शन से ही भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। वहीं नारद मुनि माता पार्वती को जगतजननी मानकर उनका सम्मान करते हैं।

कथा का संदेश

कथा में भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद के माध्यम से मुंडमाला का रहस्य, सती के पुनर्जन्म और अमर कथा का प्रसंग सुनाया गया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने माता को समझाया कि गुरु और ईश्वर की आज्ञा की अवहेलना का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ता है, जबकि श्रद्धा और समर्पण अमरत्व का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने रामायण और भागवत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भरत का प्रेम त्यागमय था। उन्होंने भगवान श्रीराम की इच्छा को सर्वोपरि रखा। इसी प्रकार श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के समय गोपियों ने अपने विरह से अधिक भगवान की इच्छा का सम्मान किया। यही निष्काम प्रेम का सर्वोच्च स्वरूप है, जिसमें अपने सुख से पहले प्रिय की प्रसन्नता को महत्व दिया जाता है।

जीवन की सफलता के लिए मार्गदर्शन

उन्होंने कहा कि अमरनाथ में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई और प्रत्येक विराम पर हुंकारी भरने को कहा। स्वामी जी ने महर्षि शुकदेव के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वे बारह वर्षों तक गर्भ में इसलिए रहे क्योंकि उन्हें संसार की माया का भय था। भगवान के आश्वासन के बाद ही उन्होंने जन्म लिया और जन्म से ही वैराग्य एवं ब्रह्मज्ञान का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सतयुग में तप, त्रेता में यज्ञ, द्वापर में भगवान की सेवा और कलियुग में केवल भगवान के नाम, भागवत कथा और सत्संग से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। अंत में स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे जीवन में गुरु का सम्मान करें, भगवान के नाम का निरंतर स्मरण करें तथा प्रेम, त्याग और मर्यादा के आदर्शों को अपनाकर अपने जीवन को सफल बनाएं। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। तस्वीर: 19 जुलाई भभुआ- कैप्शन: भभुआ प्रखंड के परसियां स्थित चातुर्मास यज्ञ स्थल पर रविवार को कथा पंडाल में जीयर स्वामी जी महाराज से भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।

सामान्य प्रश्न

जीयर स्वामी जी महाराज ने कथा में किस विषय पर चर्चा की?
जीयर स्वामी जी महाराज ने गुरु-भक्ति और निष्काम प्रेम के महत्व पर चर्चा की।
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