श्रीकृष्ण की प्रत्यक्ष वाङ्गमय मूर्ति है भागवत
वाराणसी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बालव्यास पं. श्रीकांत शर्मा ने कहा कि भागवत केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि ईश्वर के दर्शन का माध्यम है। कलियुग में सज्जनों को शराब, जुआ, कुमार्ग और हिंसा से बचना चाहिए तथा गौसेवा करनी होगी। यजमानों ने व्यासपीठ का पूजन किया।

वाराणसी। काशी सत्संग सेवा समिति की तरफ से महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में चल रहे सप्ताहव्यापी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को बालव्यास पं. श्रीकांत शर्मा ने भागवत रसपान कराया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत सिर्फ एक कागज का ग्रंथ नहीं बल्कि श्रीकृष्ण की प्रत्यक्ष वाङ्गमय मूर्ति है। बालव्यास ने कहा कि द्वापर में जब श्रीकृष्ण अपना दैहिक शरीर का त्याग कर रहे थे तो उद्धव की शंका का समाधान करते हुए कहा कि यह श्रीमद्भागवत नामक ग्रंथ में मैं अपना तेज समाहित कर रहा हूं, यही भागवत कलिकाल में मनुष्य को ईश्वर से मिलाने का साधन बनेगा। बालव्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण ने उद्धव से यह भी कहा है कि जो सुख, आनंद गोपियों को रासलीला के समय आया, वहीं परमानंद कलिकाल में मनुष्य को श्रीमद भागवत का श्रवण करके आएगा। यह कथा जीव और परमात्मा का मिलन कराने की कथा है।
कलियुग में भागवत की महिमा
कलियुग में भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए बालव्यास ने कहा कि इस काल में सज्जनों, नेताओं और विद्वानों को चार वस्तुओं से शराब (मदिरा), जुआ, कुमार्ग और हिंसा से सदैव बचना चाहिए। गलत मार्ग से धन कमाने से भी बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कलियुग का ही दुष्प्रभाव है कि आज गौमाता समाप्त हो रही है, श्रीमद भागवत में स्पष्ट लिखा है कि जब इस धरा पर गाय और बैल समाप्त हो जायेंगे तो कलियुग के प्रभाव चरम पर पहुंच जाएगा, यदि कलियुग का प्रभाव कम करना है तो गौसेवा और गौरक्षा करनी ही होगी।
यजमानों का पूजन
कथा से पूर्व यजमानों ने व्यासपीठ के पूजन से हुआ। इनमें ओपी तुलस्यान, बैजनाथ भालोटिया, शुभम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल, किशन भालोटिया, उर्मिला सिंह, भरत संथोलिया रहे। आरती में अवधेश खेमका, सुरेश तुलस्यान, महेश चौधरी, गोपाल अग्रवाल, आनन्द स्वरूप अग्रवाल आदि शामिल रहे। संचालन कृष्ण कुमार काबरा ने किया।


