विंध्य क्षेत्र आदिशक्ति का निवास स्थल:बाल गोविंदाचार्य
शक्तिपीठों का संगम है मां विंध्यक्षेत्र 3- राजगढ़ में दुर्घटना 3- राजगढ़ में दुर्घटना 3- राजगढ़ में दुर्घटना 3- राजगढ़ में दुर्घटना 3- राजगढ़ में दुर
विंध्याचल, हिन्दुस्तान संवाद। गुप्त नवरात्रि के अवसर पर विंध्याश्रम विंध्याचल में देवी भागवत कथा का तृतीय दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के अद्भुत वातावरण में संपन्न हुआ। कथा व्यास जवाली पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी डॉ. बाल गोविंदाचार्य महाराज जबलपुर ने कथा में मां विंध्यवासिनी की दिव्य महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया।कहा कि विंध्याचल केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आदिशक्ति का साक्षात निवास है, जहां श्रद्धा और समर्पण के साथ पहुंचने वाले प्रत्येक भक्त पर मां की विशेष कृपा बरसती है। अपने अमृतमय प्रवचन में महाराज ने विंध्याचल की पावन त्रिकोण परिक्रमा के आध्यात्मिक महत्व का भी विस्तार से वर्णन किया। बताया कि यह परिक्रमा मां विंध्यवासिनी, मां अष्टभुजा और मां कालीखोह के दिव्य शक्तिपीठों का संगम है।
श्रद्धापूर्वक की गई त्रिकोण परिक्रमा साधक के जीवन में सुख, शांति, शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। कथा के बाद मां भगवती की भव्य आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।


