बाढ़ आपदा कार्य में लापरवाही मामले जिला पशुपालन पदाधिकारी पर हुई एफआईआर
बाढ़ आपदा के दौरान राहत कार्यों में लापरवाही के चलते जिला पशुपालन पदाधिकारी, डॉ. उदय दत्त कुमार बोस के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्हें हाजीपुर में प्राथमिकी का सामना करना पड़ा है। मामले की गंभीरता देखते हुए उन्हें निलंबित करने की अनुशंसा भी की गई है।

बाढ़ आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही,उदासीनता अथवा सरकारी दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता को जिला प्रशासन द्वारा गंभीरता से लिया गया है। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी के स्तर से बाढ़ आपदा कार्यों की सतत मॉनिटरिंग एवं अनुश्रवण के दौरान जिला पशुपालन पदाधिकारी, वैशाली डॉ. उदय दत्त कुमार बोस के विरुद्ध कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता के मामले में कार्रवाई की गई है।
कार्रवाई की प्रक्रिया
उक्त मामले में जिला पशुपालन पदाधिकारी,वैशाली डॉ. उदय दत्त कुमार बोस के विरुद्ध गंगाब्रिज थाना, हाजीपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्राथमिकी संख्या 249/2026, दिनांक 09.09.2026 है। प्राथमिकी में आपदा प्रबंधन कार्य के निर्वहन में लापरवाही से संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 एवं अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। इसके अतिरिक्त, संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध विभागीय स्तर पर भी अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
निलंबन की अनुशंसा
उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों के संबंध में आरोप पत्र गठित कर सचिव, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार, पटना को भेजा गया है। जिला प्रशासन द्वारा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों के तहत अनुशासनिक कार्रवाई किए जाने तथा मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पदाधिकारी को निलंबित किए जाने की अनुशंसा की गई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बाढ़ आपदा के दौरान राहत शिविरों में पशुधन के लिए आवश्यक चारा एवं अन्य व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करना पशुपालन विभाग के महत्वपूर्ण दायित्वों में शामिल है।
लापरवाही के अनेक मामले
प्रथम दृष्टया जिला पशुपालन पदाधिकारी द्वारा राहत एवं आपदा कार्यों के दौरान अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर शिथिलता बरते जाने, राहत शिविर से अनुपस्थित रहने, पशु चारा के समुचित वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करने तथा शिविर में उपलब्ध पशु चारा को हटाए जाने सहित कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। इसके साथ ही राहत शिविरों में पशुपालन विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में भी अपेक्षित तत्परता नहीं बरती गई।
निर्देशों का अनुपालन
प्रथम दृष्टया यह भी पाया गया कि संबंधित पदाधिकारी द्वारा आपदा प्रबंधन से संबंधित निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया एवं विभागीय निर्देशों के अनुरूप अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई तथा वरीय पदाधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन में भी शिथिलता बरती गई। बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में पशुधन के लिए आवश्यक राहत व्यवस्था से जुड़े कार्यों में इस प्रकार की लापरवाही को जिला प्रशासन द्वारा अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। -अमिताभ सिंह


