सहरसा: टेली-कंसल्टेशन में पिछड़ा कोसी, सहरसा 34वें, मधेपुरा 35वें और सुपौल 22वें स्थान पर
सहरसा से श्रुतिकांत की रिपोर्ट बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी टेली- कंसल्टेशन सेवा में कोसी

सहरसा से श्रुतिकांत की रिपोर्ट बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी टेली- कंसल्टेशन सेवा में कोसी प्रमंडल का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक जारी राज्य स्तरीय जिला रैंकिंग में सहरसा 34वें, मधेपुरा 35वें और सुपौल 22वें स्थान पर रहे। वहीं औरंगाबाद 15,885 टेली-कंसल्टेशन के साथ लगातार राज्य में पहले स्थान पर बना हुआ है। यह अंतर केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबंधन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का भी संकेत देता है। जारी रैंकिंग के अनुसार सुपौल में 4,070, सहरसा में 2,323 और मधेपुरा में मात्र 2,101 टेली-कंसल्टेशन दर्ज किए गए। दूसरी ओर शीर्ष स्थान पर रहे औरंगाबाद ने 15 हजार से अधिक टेली- कंसल्टेशन दर्ज कर यह साबित किया कि प्रभावी मॉनिटरिंग और स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता से इस योजना को जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है।
यदि 1 जुलाई से 9 जुलाई और 1 जुलाई से 10 जुलाई की रैंकिंग की तुलना करें तो स्थिति और चिंताजनक नजर आती है। सहरसा 32वें स्थान से फिसलकर 34वें, जबकि सुपौल 21वें से 22वें स्थान पर पहुंच गया। मधेपुरा 35वें स्थान पर ही बना रहा। यानी एक अतिरिक्त दिन मिलने के बावजूद कोसी प्रमंडल के तीनों जिले उल्लेखनीय सुधार नहीं कर सके। टेली- कंसल्टेशन सेवा का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के मरीजों को बिना बड़े अस्पताल पहुंचे विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श उपलब्ध कराना है। इससे मरीजों का समय और खर्च दोनों बचते हैं। लेकिन कोसी प्रमंडल के आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के प्रचार- प्रसार, मरीजों के पंजीकरण और स्वास्थ्य संस्थानों की सक्रियता में अभी भी काफी कमी है। नतीजतन हजारों जरूरतमंद मरीज इस सुविधा का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ प्रभावित और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण कोसी क्षेत्र में टेलीमेडिसिन सबसे अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। ऐसे क्षेत्र में डिजिटल माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह मिलने से मरीजों को जिला मुख्यालय या बड़े अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके बावजूद कोसी के तीनों जिलों का राज्य की रैंकिंग में निचले पायदान पर बने रहना स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। सबसे अधिक चिंता सहरसा को लेकर है। कोसी प्रमंडल का मुख्यालय होने, सदर अस्पताल और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों की उपलब्धता के बावजूद जिला 34वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं मधेपुरा भी 35वें स्थान पर है और सुपौल भी शीर्ष 20 में जगह नहीं बना सका। ऐसे में आवश्यकता है कि तीनों जिलों के स्वास्थ्य विभाग टेली- कंसल्टेशन सेवा की गहन समीक्षा करें, जवाबदेही तय करें और स्वास्थ्य केंद्रों को लक्ष्य आधारित कार्य करने का निर्देश दें, ताकि आने वाले दिनों में कोसी प्रमंडल भी राज्य के अग्रणी जिलों की श्रेणी में अपनी जगह बना सके।


