स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में गूंजा जमशेदपुर का नाम: 'डिमना झील' के नाम पर बनी दर्शक दीर्घा
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली के लाल किला प्रांगण में आयोजित समारोह में जमशेदपुर की डिमना झील को विशेष स्थान मिला। समारोह में देश की प्रमुख झीलों के नाम पर दर्शक दीर्घाएँ बनाई गईं, जिसमें डिमना का शामिल होना झारखंड के लिए गर्व का क्षण है।

जमशेदपुर। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में जमशेदपुर और पूरे झारखंड के लिए एक बेहद गर्व का क्षण देखने को मिला। समारोह के लिए तैयार की गई दर्शक दीर्घाओं के नाम देश की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए, जिनमें जमशेदपुर की प्रसिद्ध 'डिमना झील' को भी विशेष स्थान मिला।इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य देश की समृद्ध प्राकृतिक संपदा, जलस्रोतों और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना था। देश की 25 प्रमुख झीलों को मिला राष्ट्रीय सम्मान
समारोह में झीलों का चयन
समारोह में अतिथियों के बैठने की दीर्घाओं के नाम देश के अलग-अलग राज्यों की 25 चुनिंदा और ऐतिहासिक झीलों पर रखे गए जिसमे उत्तर व पूर्वी भारत: भीमताल, चंद्रताल, पैंगोंग त्सो, वुलर, हाफलोंग, रवींद्र सरोवर, रामगढ़ ताल और रुद्रसागर। दक्षिण व मध्य भारत: हुसैन सागर, कोलेरू, पुलिकट, वेम्बनाड, बड़खल, कंवर, कांकरिया, लोनार, पुष्कर, सांख्य सागर और शांति सागर। झारखंड और तटीय क्षेत्र: डिमना, चिलिका, दलपत सागर, दूधसागर और लोकटक।
डिमना झील का इतिहास
टाटा स्टील और दलमा की पहाड़ियों से जुड़ा डिमना का इतिहास
जमशेदपुर शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित डिमना झील एक खूबसूरत कृत्रिम जलाशय है। वर्ष 1944 में टाटा स्टील द्वारा शहर में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कराया गया था।यह झील खूबसूरत दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य की तलहटी में पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरी हुई है।
पर्यटन और रोमांच
डिमना झील अपनी स्वच्छता और शांत माहौल के लिए जानी जाती है। नवंबर से फरवरी के दौरान यहाँ झारखंड और पड़ोसी राज्यों से हज़ारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
प्रकृति प्रेमियों के लिए यहाँ बोटिंग (नौका विहार), रोइंग, जेट स्कीइंग और आसपास ट्रेकिंग की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं।
झारखंड के लिए सम्मान का महत्व
राष्ट्रीय स्तर के इतने बड़े आयोजन में डिमना का नाम शामिल होना जमशेदपुर वासियों के लिए सम्मान की बात है। इससे न केवल डिमना झील की ऐतिहासिक व प्राकृतिक पहचान को देश भर में नई पहचान मिली है, बल्कि झारखंड के पर्यटन को भी राष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा मिला है।


