स्कूलों की जमीन से छत तक का होगा डिजिटल हिसाब
स्कूलों की जमीन से छत तक का होगा डिजिटल हिसाब स्कूलों की जमीन से छत तक का होगा डिजिटल हिसाबस्कूलों की जमीन से छत तक का होगा डिजिटल हिसाबस्कूलों की जमी

कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। जिले के सरकारी स्कूलों में अब कागजों पर दर्ज सुविधाओं के बजाय जमीन पर उपलब्ध संसाधनों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। शिक्षा विभाग जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का व्यापक डिजिटल सर्वे कराने जा रहा है। इसमें स्कूल की छत, कमरे, बिजली, पंखे और बल्ब से लेकर पेयजल, शौचालय, चहारदीवारी और जल निकासी तक की स्थिति दर्ज की जाएगी। इतना ही नहीं, विद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण है या नहीं, इसकी जानकारी भी सर्वे में ली जाएगी। विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को निर्धारित ऑनलाइन प्रपत्र में स्कूल की वास्तविक स्थिति की जानकारी भरनी होगी। इसके बाद प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं का सत्यापन किया जाएगा। गूगल शीट और विभागीय पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक विद्यालय की जरूरतों का रिकॉर्ड तैयार होगा。
जर्जर भवन से लेकर वायरिंग तक की होगी जांच
सर्वे में विद्यालय भवन की रंगाई-पुताई की जरूरत, नाम पट्ट की स्थिति, कमरों की संख्या और उनकी हालत, छत की मरम्मत, खिड़की-दरवाजे, बिजली कनेक्शन तथा प्रत्येक कक्षा की वायरिंग की स्थिति दर्ज की जाएगी। कक्षाओं में पंखे और बल्ब उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी भी जानकारी ली जाएगी।
स्कूल की जमीन भी नहीं रहेगी नजरअंदाज
इस बार सर्वे का दायरा केवल भवन और सुविधाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। विद्यालय परिसर में जल निकासी की व्यवस्था, जर्जर भवनों की संख्या, अनुपयोगी सामग्री, उसके निस्तारण की स्थिति और विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण की भी जानकारी मांगी गई है। इससे स्कूलों की वास्तविक समस्याओं का एक समग्र डाटा तैयार हो सकेगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी राहुल चन्द्र चौधरी ने बताया कि डिजिटल सर्वे का उद्देश्य जिले के प्रत्येक सरकारी विद्यालय की वास्तविक आवश्यकता को चिन्हित करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक सही और अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि सत्यापन के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर जरूरतमंद विद्यालयों को प्राथमिकता दी जा सके।
रिपोर्ट के आधार पर बनेगी विकास की योजना
जिला स्तर पर सत्यापन पूरा होने के बाद अंतिम रिपोर्ट बिहार राज्य शैक्षिक आधारभूत संरचना विकास निगम को भेजी जाएगी। उपलब्ध बजट और विद्यालयों की जरूरत के आधार पर नए भवन, अतिरिक्त कक्ष, मरम्मत, शौचालय, पेयजल, बिजली, चहारदीवारी सहित अन्य कार्यों की योजना तैयार की जाएगी।
इस डिजिटल सर्वे से पहली बार जिले के सरकारी विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं का एक व्यवस्थित और वास्तविक डाटाबेस तैयार होने की उम्मीद है। इससे जहां संसाधनों की कमी वाले स्कूलों की पहचान आसान होगी, वहीं विकास योजनाओं में प्राथमिकता तय करने में भी विभाग को मदद मिलेगी।


