सुपौल : खाद की कालाबाजारी पर रोक के लिए अब किसानों की होगी डिजिटल पहचान
सुपौल जिले में खाद की बिक्री में कालाबाजारी और अनियमित वितरण को रोकने के लिए अब डिजिटल निगरानी का उपयोग किया जाएगा। किसान की पहचान चेहरे के जरिए सत्यापित की जाएगी और बिक्री की जानकारी एफएफएस एप पर दर्ज की जाएगी। इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ाना और सही मात्रा में उर्वरक की बिक्री सुनिश्चित करना है।
सुपaul, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में खाद की बिक्री में मनमानी, कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर रोक लगाने के लिए अब डिजिटल निगरानी का शिकंजा कसने जा रहा है। उर्वरक खरीदने वाले किसान की पहचान अब चेहरे के जरिए डिजिटल रूप से सत्यापित की जाएगी। पहचान सत्यापित होने के बाद ही बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। किसान को कितनी मात्रा में कौन सा उर्वरक दिया गया, इसकी पूरी जानकारी एफएफएस (फर्टिलाइजर फ्लाइंग स्क्वाड) एप पर दर्ज की जाएगी। इतना ही नहीं, जिस केंद्र से खाद की बिक्री होगी, उसकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति भी अक्षांश और देशांतर के जरिए रिकॉर्ड की जाएगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य
जिला कृषि पदाधिकारी नीतीश भारती ने उर्वरक बिक्री से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया को लेकर गाइडलाइन जारी की है। नई व्यवस्था का उद्देश्य खाद की बिक्री को पारदर्शी बनाने के साथ वास्तविक किसानों तक निर्धारित दर और अनुशंसित मात्रा में उर्वरक पहुंचाना है। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद अधिकारियों के लिए यह पता लगाना आसान होगा कि किस किसान ने किस बिक्री केंद्र से कब और कितनी मात्रा में खाद खरीदी। इससे एक ही किसान के नाम पर बार-बार खरीद, फर्जी खरीद और उर्वरक की अनियमित बिक्री पर नजर रखी जा सकेगी। नई व्यवस्था में किसान की जरूरत और सामान्य उर्वरक अनुशंसा को ध्यान में रखकर खाद उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यानी किसान को उसकी आवश्यकता और निर्धारित अनुशंसा के अनुरूप ही उर्वरक देने की व्यवस्था होगी। इससे जरूरत से अधिक उर्वरक की खरीद और उसे दूसरे माध्यम से बेचने की संभावनाओं पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
डिजिटल रिकॉर्ड का महत्व
बिक्री के दौरान किसान की पहचान और खाद की मात्रा डिजिटल रूप से दर्ज होने के कारण पूरे वितरण तंत्र की निगरानी पहले की तुलना में आसान होगी। डिजिटल निगरानी की व्यवस्था केवल किसान तक सीमित नहीं रहेगी। खाद बिक्री केंद्र की वास्तविक लोकेशन भी रिकॉर्ड की जाएगी। केंद्र के अक्षांश और देशांतर दर्ज होने से यह सत्यापित किया जा सकेगा कि उर्वरक की बिक्री निर्धारित स्थान से ही हो रही है या नहीं। किसी दूसरे स्थान पर खाद की बिक्री किए जाने की स्थिति में भी निगरानी और जांच में मदद मिलेगी। जिला और संबंधित स्तर के अधिकारी बिक्री के रिकॉर्ड की जांच करेंगे। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी। जिले में यूरिया, डीएपी समेत अन्य उर्वरकों की मनमानी कीमत पर बिक्री की शिकायतें किसानों की ओर से लगातार सामने आती रही हैं। किसानों का आरोप है कि 266.50 रुपये निर्धारित दर वाली यूरिया की बोरी कई जगह 400 से 450 रुपये तक में बेची जाती है। डीएपी की कीमत को लेकर भी किसानों ने शिकायतें की हैं। पर्याप्त स्टॉक रहने के बावजूद समय पर खाद नहीं मिलने की समस्या भी किसान उठाते रहे हैं। ऐसे में नई डिजिटल व्यवस्था से निर्धारित दर पर उर्वरक की बिक्री और वितरण में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
किसानों के हित में
डीएओ नीतीश कुमार भारती ने कहा, “खाद की बिक्री में पारदर्शिता और किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। नई व्यवस्था के तहत किसान की पहचान का चेहरे के जरिए डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। बिक्री की पूरी जानकारी एफएफएस एप पर दर्ज होगी और बिक्री केंद्र की लोकेशन भी रिकॉर्ड की जाएगी। इससे फर्जी खरीद, अनियमित वितरण और कालाबाजारी पर प्रभावी नजर रखी जा सकेगी। किसान को उसकी जरूरत और निर्धारित अनुशंसा के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। निर्धारित दर से अधिक कीमत पर यूरिया, डीएपी या अन्य उर्वरक बेचने की शिकायत मिलने पर संबंधित स्तर पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। किसान किसी भी अनियमितता की सूचना कृषि विभाग को जरूर दें।


