स्कूलों में बच्चों का बनेगा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड
स्क्रीनिंग के बाद तैयार होगी आभा आईडी स्कूलों में बच्चों का बनेगा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड

गुरुग्राम, साक्षी रावत। जिले के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को अब डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जिन बच्चों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाती रहेगी, उनका डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए बच्चों की आभा आईडी बनाने और उसे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी से जोड़ने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। योजना के तहत स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में आभा क्यूआर स्कैनर प्रदर्शित किए जाएंगे। इन स्कैनर के माध्यम से संबंधित बच्चों की आभा आईडी बनाने और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल रूप से सुरक्षित करना है।
स्क्रीनिंग के बाद रिकॉर्ड से जुड़ेगी जानकारी:
आरबीएसके के तहत स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाती है। इसमें बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, विकास और विभिन्न बीमारियों से संबंधित समस्याओं की पहचान की जाती है। अब स्क्रीनिंग के दौरान सामने आने वाली जरूरी स्वास्थ्य जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। आभा आईडी बनने के बाद बच्चे से संबंधित स्वास्थ्य जानकारी को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। भविष्य में बच्चे को उपचार की जरूरत पड़ने पर उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड चिकित्सकीय जानकारी को समझने में उपयोगी हो सकता है। इससे पहले हुई जांच या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को दोबारा जुटाने में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।
स्कूल और आंगनवाड़ी बनेंगे अहम केंद्र:
गुरुग्राम में बड़ी संख्या में बच्चे सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े हैं। ऐसे में अभियान को जमीन पर लागू करने में इन संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों में हिंदी फॉन्ट में आभा क्यूआर स्कैनर प्रदर्शित किए जाने की तैयारी है, ताकि बच्चों, अभिभावकों और संबंधित कर्मचारियों को इसकी जानकारी आसानी से मिल सके। शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच समन्वय से अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। स्कूल स्तर पर शिक्षकों और संबंधित कर्मचारियों को भी प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी, जिससे पात्र बच्चों की आभा आईडी बनाने और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में अभिभावकों को सहयोग मिल सके।
इलाज और स्वास्थ्य निगरानी में मिल सकता है फायदा:
डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भविष्य में जरूरत के समय आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। खासकर ऐसे बच्चों के लिए, जिनकी स्क्रीनिंग के दौरान किसी स्वास्थ्य समस्या की पहचान होती है या जिन्हें आगे जांच और उपचार की आवश्यकता होती है, डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी साबित हो सकता है। इस व्यवस्था से बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी को भी बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। स्क्रीनिंग, उपचार और आगे की स्वास्थ्य सेवाओं के बीच समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है। गुरुग्राम जैसे बड़े जिले में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के स्तर पर डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार होने से बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से जोड़ने का रास्ता तैयार होगा।


