डिजिटल अरेस्ट की ठगी से बचाएगी पुलिस
बागपत में साइबर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' नामक नए तरीके से ठगी करना शुरू किया है। लोग पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करने वाले अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं, जो गिरफ्तारियों की झूठी जानकारी देकर पैसे मांगते हैं। बागपत पुलिस ने इस ठगी से बचने के लिए सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाने का काम शुरू किया है।

बागपत। साइबर ठगों ने लोगों को अपने चंगुल में फंसाने के लिए इन दिनों एक ओर नया तरीका अपनाया है। जिसका नाम है ‘डिजिटल अरेस्ट’। इसमें ठगी करने वाले लोगों को फंसाने के लिए ‘ब्लैकमेलिंग’ या भयादोहन का खेल खेलते हैं और लोग उनके जाल में फंस जाते हैं, लेकिन अब बागपत पुलिस इससे बचाव के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रही है। पुलिस की ओर से एक पोस्टर जारी कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ------
इस तरह देते ठगी को अंजाम
पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को कॉल लिया जाता है। फोन रिसीव करते ही मोबाइल पर कहते हैं कि आपके बेटे-बेटी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसने साथियों के साथ मिलकर गंभीर व बड़ा अपराध किया है। आगे कहते हैं कि बेटे को बचाना चाहते हो, तो तत्काल रुपये भेजो। जो अभिभावक थोड़ा भी भावुक हुआ वह साइबर अपराधी की जाल में फंस कर पैसा गंवा देता है। इस तरह के मामले जनपद में पिछले एक पखवाड़े से काफी बढ़े है। कई लोग ठगी का शिकार हो चुके है, तो कई ने सूझ-बूझ का परिचय देते हुए फोन कर कर दिया और पुलिस को सूचना दे दी।
नंबर पर लगी होती है पुलिस अधिकारी की फोटो
जब किसी व्यक्ति के पास कॉल आता है, तो दूसरी तरफ के नंबर के डीपी पर पुलिस की वर्दी पहने अधिकारी का फोटो नजर आता है। कॉल करने वाला काफी रोब में बात करता है। तरह-तरह की धमकी देता है। बच्चे की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए कहता है कि उसकी बात नहीं मानी गई, तो बच्चे पर भारी पड़ेगा। हालांकि इस तरह के कॉल आने पर अधिकतर लोग पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराते हैं।
कॉल आए तो ये उठाएं कदम
एसपी सूरज कुमार राय ने बताया कि अगर ऐसे कॉल आएं तो इस प्रकार का कदम उठाएं। 1930 नेशनल टोल फ्री नंबर पर जानकारी दें। साइबर क्राइम के थाने में सूचना दें। साइबर हेल्प डेस्क पर तुरंत जानकारी दें। अपने परिवार के सभी सदस्यों को इस तरह की ठगी की जानकारी दें। किसी सदस्य की कॉल आने पर सांसत में न पड़े, कॉल कर पुष्टि करें। अगर मैसेज, फोन या वीडियो से कोई धमकी देता है, तो फौरन स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
इन बातों का रखे ध्यान
किसी भी तरह डरना और पैसे नहीं भेजना चाहिए।
अगर कोई झांसे में लेने का प्रयास करे तो उसके नंबर को तत्काल ‘ब्लाक’ कर देना चाहिए।
पुलिस विभाग की वेबसाइट पर तमाम जानकारियां और उसके अफसरों के नंबर रहते हैं, उनसे भी जानकारी ली जा सकती है।
प्राथमिकी की धमकी देने वाले को नजरअंदाज करना चाहिए।


