दिगंबर जैन समाजके दशलक्षण पर्व आज से शुरू
दिगंबर जैन समाजके दशलक्षण पर्व आज से:दिगंबर जैन समाजके दशलक्षण पर्व आज से:दिगंबर जैन समाजके दशलक्षण पर्व आज से:दिगंबर जैन समाजके दशलक्षण पर्व आज से:दि

श्री दिगंबर जैन समाज का दस लक्षण पर्व आज बुधवार को उत्तर क्षमा धर्म के साथ आरंभ हो रहा है। यह जैन धर्म में आत्मशुद्धि, संयम, तप और आत्मजागृति के लिए अत्यंत पवित्र माने गए हैं। यह बाहरी आडंबरों से ऊपर उठकर अपनी आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने तथा जीवन में सद्गुणों को धारण करने की प्रेरणा देते हैं। श्री दिगंबर जैन महासमिति के प्रांत संगठन मंत्री डा. पवन कुमार जैन ने बताया यह वर्ष में तीन बार माघ मास, चैत्र मास और भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी से अनंत चतुर्दशी तक मनाए जाने वाले पर्व हैं। इन्हें आत्म कल्याण और मोक्ष मार्ग की साधना का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। चातुर्मास एवं वर्षाकाल के कारण भाद्रपद मास में विशेष रूप से मनाया जाता है।
दशलक्षण पर्व के दस धर्म
दशलक्षण पर्व के दस धर्म:-
उत्तम क्षमा:- क्रोध का त्याग कर समता और मैत्रीभाव अपनाने की प्रेरणा देती है।
उत्तम आर्जव:- कपट छोड़कर सरल एवं निष्कपट जीवन जीना सिखाता है।
उत्तम शौच:- लोभ का त्याग और संतोषपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाता है।
उत्तम सत्य:- मन,वचन और कर्म मे्रं एकरूपता स्थापित करता है।
उत्तम संयम:- इंद्रियों एवं मन पर नियंत्रण सिखाता है।
उत्तम तप:- आत्मबल और कर्मनिर्जरा बढ़ाता है।
उत्तम त्याग:- असक्ति एवं स्वार्थ से बचाता है।
उत्तम आकिंचन्य:-‘कुछ भी मेरा नहीं’की भावना जागृत करना।
ब्रह्मचर्य:- इंद्रिय संयम और आत्म पवित्रता का संदेश देता है।
दश लक्षण पर्व का महत्व
उन्होंने बताया दश लक्षण पर्व केवल पूजा, व्रत और उपवास तक ही सीमित नहीं है, यह अपने भीतर झांकने, दोषों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अफसर देता है। इसमें प्रतिक्रमण,सामायिक,स्वाध्याय, ध्यान तथा क्षमा मांगते हैं। सभी के प्रति क्षमा और मैत्री भाव धारण करते हैं।
उन्होंने बताया मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने के लिए सम्यक दर्शन, सम्यकज्ञान और सम्यक चरित्र - रत्नत्रय को जीवन में अपनाना आवश्सक है। यही दश लक्षण का वास्तविक संदेश है, कि आत्मा गुणों को जागृत कर हम अपने जीवन को पवित्र, सरल और सार्थक बनाएं। दशलक्षण पर्व स्मरण कराता है कि सच्चा धर्म बाहरी प्रदर्शन में नहीं, आतमा के परिष्कार और आचरण की निर्मला में निहित हैं।


