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नखरेबाज ट्रेनी IAS पूजा खेडकर ने विकलांगता को लेकर बोला झूठ? UPSC चयन पर बहुत बड़ा खुलासा

IAS Pooja Khedkar News: चयन के बाद यूपीएससी ने उनकी विकलांगता की पुष्टि करने के लिए मेडिकल टेस्ट कराने को कहा। खेडकर ने छह अलग-अलग मौकों पर इन टेस्ट में शामिल होने से इनकार कर दिया।

नखरेबाज ट्रेनी IAS पूजा खेडकर ने विकलांगता को लेकर बोला झूठ? UPSC चयन पर बहुत बड़ा खुलासा
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईWed, 10 Jul 2024 07:23 PM
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IAS Pooja Khedkar News: प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर कथित तौर पर सत्ता के दुरुपयोग के कारण चर्चा में हैं। विवाद के बाद उनका पुणे से ट्रांसफर भी किया जा चुका है। अब उनकी सिविल सेवा परीक्षा को लेकर चौंकाने वाले दावे किए जा रहे हैं। सिविल सेवा परीक्षा के दौरान उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को एक हलफनामा दिया था जिसमें दृष्टिबाधित और मानसिक रूप से बीमार होने का दावा किया था। खेडकर द्वारा बताई गई विकलांगताओं का इस्तेमाल यूपीएससी चयन के दौरान विशेष रियायतें प्राप्त करने के लिए किया गया था। 

बार-बार मेडिकल टेस्ट से बचती रहीं पूजा खेडकर

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के बावजूद, इन रियायतों के कारण वह परीक्षा पास करने में सफल रहीं और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) 841 हासिल की। चयन के बाद यूपीएससी ने उनकी विकलांगता की पुष्टि करने के लिए मेडिकल टेस्ट कराने को कहा। खेडकर ने छह अलग-अलग मौकों पर इन टेस्ट में शामिल होने से इनकार कर दिया। उनका पहला मेडिकल एग्जामिनेशन 22 अप्रैल, 2022 को दिल्ली के एम्स में शेड्यूल था। लेकिन उन्होंने कोविड पॉजिटिव होने का दावा करते हुए टेस्ट के लिए जाने से मना कर दिया। इसके बाद दिल्ली के एम्स और सफदरजंग अस्पताल में 26 और 27 मई को उनका मेडिकल एग्जामिनेशन होना था लेकिन वह वहां भी नहीं गईं। वह लगातार इन टेस्ट से बचती रहीं। 1 जुलाई को एक और अपॉइंटमेंट था लेकिन इस बार भी वह जाने से चूक गईं।

बाहर से कराई MRI, यूपीएससी ने की खारिज 

हालांकि वह शुरू में 26 अगस्त, 2022 को किसी तरह एक मेडिकल एग्जामिनेशन के लिए सहमत हो गई थीं। इस बार वह टेस्ट के लिए गई थीं। कुछ टेस्ट करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें 2 सितंबर को एक बेहद जरूरी एमआरआई कराने के लिए बुलाया था। इस एमआरआई का उद्देश्य उनकी दृष्टि हानि (vision loss) का आकलन करना था। लेकिन वह नहीं गईं। 

इन टेस्ट में शामिल होने के बजाय, खेडकर ने एक बाहरी सेंटर से एमआरआई कराई और रिपोर्ट लाकर दी। लेकिन यूपीएससी ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इसके बाद यूपीएससी ने उनके चयन को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में चुनौती दी, जिसने 23 फरवरी, 2023 को उनके खिलाफ फैसला सुनाया। इसके बावजूद, बाद में उनके एमआरआई प्रमाणपत्र को स्वीकार कर लिया गया और उनकी आईएएस के तौर पर नियुक्ति हो गई। विकलांगता के दावों के अलावा, खेडकर के ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर दर्जे के दावों में भी विसंगतियां पाई गईं।

संपत्ति को लेकर भी विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक, आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने कहा कि पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर के चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्ति 40 करोड़ रुपये बताई गई है। उनके पिता की संपत्ति को देखते हुए खेडकर का ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर का दर्जा पाना सवालों के घेरे में है। दिलीप खेडकर ने वंचित बहुजन आघाड़ी के टिकट पर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। कार्यकर्ता ने कहा, "ऐसी आय नॉन-क्रीमी लेयर में कैसे आ सकती है? उन्होंने मानसिक रूप से बीमार होने और कई तरह की विकलांगताओं से ग्रस्त होने की बात स्वीकार की है। हालांकि, उन्होंने कई बार मेडिकल टेस्ट नहीं दिए। उन्होंने आईएएस के लिए कैसे क्वालीफाई किया? ये बड़े सवाल हैं।"

महाराष्ट्र सरकार द्वारा सत्ता के दुरुपयोग की शिकायतों के कारण खेडकर को पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया है। यह कदम पुणे कलेक्टर डॉ. सुहास दिवासे द्वारा मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र के बाद उठाया गया है। खेडकर अब वाशिम में अतिरिक्त सहायक कलेक्टर के पद पर काम करेंगी। पुणे में अपने प्रोवेशन के दौरान, खेडकर ने कई विशेषाधिकारों की मांग की थी, जो ऐसे अधिकारियों को नहीं मिलते। उन्होंने लाल-नीली बत्ती और वीआईपी नंबर प्लेट वाली अपनी निजी ऑडी कार का इस्तेमाल किया, अपने वाहन पर 'महाराष्ट्र सरकार' का बोर्ड लगाया और एक आधिकारिक कार, आवास, एक कार्यालय कक्ष और अतिरिक्त कर्मचारियों भी मांगे थे।